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Friday, 14 April 2017

Amulya Khabar

Self Improvement in Hindi...ये काम आपकी जिन्दगी को बर्बाद कर सकते हैं...







Self Improvement in Hindi...ये काम आपकी जिन्दगी को बर्बाद कर सकते हैं...
Posted on 15.04.2017 By: Deep Singh Yadav 

 जिंदगी को बेहतर बनाने  और बेहतर तरीके से जीने के लिये बहुत सी बातों का, बहुत सी चीजों का ध्यान रखना पड़ता है। कुछ लोग ऐसे होते हैं जो अपनी जिन्दगी में ऐसे काम करते रहते हैं जिनके कारण उन्हें बाद में पछताना पड़ता है। ऐसे बहुत से काम और बहुत सी आदतें हैं जो  हमें शुरूआत में तो सही लगती हैं लेकिन बाद में पछताना पड़ता है।   हमें पता ही नहीं चलता है कि हम कुछ गलत कर रहे हैं लेकिन ये  आदतें और ये ही काम आने वाले समय में हमारी खुशियों को छीन लेते हैं, आपकी जिन्दगी को बर्बाद कर देते हैं।

 हम में से बहुत से लोग ऐसे होते हैं जो दिखावे की जिन्दगी जीते हैं और जिंदगी की हकीकत से अंजान रहते हैं, सच्चाई से दूर भागते हैं। अगर आपने समय पर ध्यान नहीं दिया कि आप जो कर रहें हैं वो सही है या गलत है या उन कामों को करके आपका भविष्य कैसा होगा.  तो एक दिन आप ऐसे दोराहे पर आकर खड़े हो जायेंगे जहाँ पर आपको आपकी जिंदगी अपने हाथों से फिसलती हुई दिखाई देगी।

आज मैं आपको ऐसी ही बातों और  कामों के बारे में बता रहा हूँ जिनको छोड़ कर आप अपनी जिंदगी में बदलाव ला सकते हैं, अपनी जिन्दगी को बर्बाद होने से बचा सकते हैं।

*  कमी निकालना या बात बात पर शिकायत करना...

अगर आप बात-बात पर शिकायत करते हैं या हर छोटी बड़ी चीजों में कमी निकालते हैं  तो ये काम, ये आदत आपकी जिन्दगी के लिये सही नहीं हैं। ऐसा करने से एक तो आपको गुस्सा आता है, आपके स्वभाव में चिड़चिड़ापन आ सकता हैं, आप हतोत्साहित हो सकते हैं जो आपकी खुशियों को चुरा लेता है । इससे आपकी सामाजिक इमेज भी खराब होती है। आपका किसी से झगड़ा भी हो सकता है। ऐसा करने वाला व्यक्ति नकारात्मक विचारों से घिरा रहाता है। वह खुद तो टेंशन मे रहता ही है , दूसरों को भी टेंशन देता है। अगर कोई बात या शिकायत सही है  तो उसे  उचित समय पर कहें, हमेशा नहीं। जिंदगी में कुछ बातों और कुछ चीजों को नजरअंदाज करना ही ठीक रहता है। 

 
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...Ten Rules Of Success in Hindi... >>> सफलता के दस सूत्र



* लोगों को माफ़ ना करना, बातों को पकड़कर बैठ जाना...

आप जिंदगी में बहुत ज्यादा और हर समय गम्भीर रहकर नहीं जी सकते। दूसरें लोगों की बहुत सी बातें, बहुत से काम आपको हमेशा अच्छे नहीं लगेंगे। आपकी भी बहुत सी बातें दूसरों को हमेशा अच्छी नहीं लगेंगी। लोग किसी ना किसी बात पर आपको चोट पहुँचाने की कोशिश करेंगे । किसी ने या कभी आपके साथ कुछ गलत किया है, बुरा व्यव्हार किया है, धोखा दिया है या आपका अपमान किया है तो उसको भूलना  थोड़ा कठिन होता है ,  लेकिन अगर आप लोगों पर अपने गुस्से को लेकर बैठें रहेंगे या बार-बार आप उसी बात के बारे में या बदला लेने के बारे में सोचते रहेंगे तो आप उन  कामों पर ध्यान नहीं दे पायेंगे जो आपके जीवन के लिये जरूरी हैं
,और आप अपनी जिंदगी के बहुमूल्य समय  और  खुशियों को खो देंगे।इसलिये अपनी शक्ति को, अपनी सोच को, अपने समय को ऐसी बातों पर लगायें, ऐसी चीजों पर लगायें, ऐसे कामों पर लगायें जो आपकी जिन्दगी को बेहतर बना सकते हैं। जिसने आपके साथ कुछ गलत किया है या आपको चोट पहुँचाई हो तो उसे माफ़ कर दें और  अपने लक्ष्यों पर ध्यान केन्द्रित करें । जो बात आपको बार बार परेशान करती है उसे भूलने की कोशिश करें। लोगों को माफ़ करना सीखें।

*  ऐसा काम या ऐसी नौकरी करना जो आपको पसन्द ना हो...

कभी-कभी हम ऐसा काम या ऐसी नौकरी करते हैं जो हमें पसंद नहीं होती है। चाहे वो काम या वो नौकरी हम किसी मजबूरी या परेशानी में ही क्यों न कर रहें हों, वो हमारी शांति और खुशियों को हमसे छीन लेते हैं। ऐसे काम करके हम अपने वर्तमान में ही उलझ जाते हैं और भविष्य के बारे में नहीं सोच पाते हैं। इसलिये ऐसी नौकरी करें जो आपकी योग्यता
, पसंद के अनुसार हो, जो आपके कैरियर, आपके भविष्य के लिये अच्छी हो। ऐसे काम करें जो आपको ख़ुशी दें, जिन्हें करके आपको आनन्द आये, आपको सुख शांती मिले।

 यह भी पढ़ें...Self Improvement (आत्म सुधार) के लिये अवश्य पढ़ें >>>रहीम दास के अनमोल दोहे in Hindi



* गलत सम्बन्धों में रहना...

एक गलत साथी के साथ रिश्ता रखना, एक गलत रिलेशनशिप में रहना आपकी जिन्दगी को बर्बाद कर  सकता है। अगर आपका साथी  आपकी केयर नहीं करता है आपको प्यार नहीं करता है तो आपको खुशियाँ नहीं दे सकता तो ऐसे साथी  के साथ रहना नुकसान दायक है। इसलिये अपने पार्टनर का चुनाव समझदारी से करना चाहिये । पहले उसे जाने, उसे समझें फिर उसके साथ रिश्ते की शुरुआत करें। भावनाओं में बहकर फैसलें ना करें। अगर आपका पार्टनर गलत है तो उसके साथ अपनी जिंदगी बर्बाद करने से अच्छा है कि आप उससे अपना रिश्ता खत्म कर दें।

*  फिजूलखर्ची करना...

मैंने बहुत से ऐसे लोगों को देखा है जो पैसे को बेवजह और बिना मतलब के ही ऐसी चीजों पर खर्च कर देते हैं जिनकी उन्हें कोई ज़रूरत नहीं होती। जब तक उनके हाथ में पैसा होता है तो ऐसे ही फालतू में उड़ाते रहते हैं और मँहगे  शौक पाल लेते हैं, गंदी आदतें लगा लेते हैं,  लेकिन जब कभी उन्हें पैसे की कमी होती है या जब कभी उनके पास पैसा नहीं होता है तो फिर पछताते हैं या फिर अपने शौक पूरे करने के लिए गलत काम करते हैं, गलत रास्ते पर चलते हैं । ऐसा करके वो अपने लिये मुसीबतों का पहाड़ खड़ा के लेते हैं।

आपने जायज शौक और अपनी जरूरतें पूरी करना अच्छी बात है लेकिन शौक के नाम पर फिजूलखर्ची करने की आदत आने वाले समय में आपके लिये नुकसान दायक साबित हो सकती हैं। जो लोग पैसों की कद्र नहीं करते, पैसों को पैसा नहीं समझते,  उनको आगे चलकर बहुत नुकसान उठाना पड़ता है। अगर आप पैसे की कद्र नहीं करोगे तो एक समय ऐसा आयेगा कि पैसा भी आपकी कद्र नहीं करेगा। इसलिये सोच समझकर और अपनी जायज जरूरतों और शौक पर ही पैसा खर्च करें। पैसे का इस्तेमाल सही जगह और अच्छे कामों में करें। अगर आपके पास बहुत ज्यादा या बेहिसाब पैसा है तो उसे किसी अच्छे काम में लगायें, किसी की भलाई में लगायें। भूखे को खाना खिलायें।
*  दिखावे की जिन्दगी और झूठी शान में जीना...

जो लोग झूठी जिंदगी जीते हैं या लोगो के सामने अपनी झूठी शान दिखाते हैं, अपने बारे में बढ़ा चढ़ा कर बताते हैं , एक दिन ऐसे लोग अक्सर ऐसी स्थिति में आ जाते हैं जहाँ पर वे खुद को बिल्कुल असहाय और अकेला महसूस करते हैं। जो लोग अन्दर से कुछ और बाहर से कुछ और होतें हैं, उनकी असलियत कभी ना कभी लोगों के सामने आ ही जाती है। झूठी शान दिखाने  वालों को कभी ना कभी अपमानित होना ही पड़ता है। इसलिये झूठी और दिखावे की जिन्दगी ना जियें। आप जो हैं वही रहें, वही दिखें और वैसी ही जिन्दगी जियें।

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जिंदगी जीने के तरीके...



चाहे कोई माने या न माने लेकिन अगर कोई व्यक्ति ऊपर बताये गए कामों को करता है तो उसे एक दिन निश्चित रूप से पछताना  पड़ता है। आपमें से ऐसे बहुत से लोग होंगे जो ये काम करते हैं या पहले कभी कर चुके हैं
मेरी इस बात से बिल्कुल सहमत होंगे कि आपको कभी न कभी किसी बात के लिए पछताना जरुर पड़ा होगा और आप ऐसी बातो में, ऐसी सोच में उलझ कर रह गए कि आप अपनी जिंदगी में आगे बढ़ पाने के बारे में सोच ही नहीं पाए या अपनी जिंदगी के उन कामों पर, उन बातों पर ध्यान ही नहीं दे पाए होंगे जो आपको अपनी मंजिल तक पहुंचा सकती थीं।

मित्रो,  अभी भी कुछ नहीं बिगड़ा है इन कामों और आदतों को जितनी जल्दी हो सके छोड़ दें और अपने सपनों को पूरा करने,  लक्ष्य को प्राप्त करने और अपनी मंजिल तक पहुँचने वाले कामों ,आदतों पर ध्यान देना शुरु कर दें।




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Wednesday, 14 December 2016

Amulya Khabar

जिंदगी जीने के तरीके...



जिंदगी जीने के तरीके...
Posted On 15.12.2016 By: Deep Singh Yadav
 सुबह उठने पर एक अच्छा सुविचार रखें...आप सुबह स्वयं से क्या कहते हो? इसके दिन में पूरे होने की पूरी सम्भावना रहती है, क्यों न इसका लाभ उठाया जाए। सुबह उठने पर एक अच्छा वाक्यांश तैयार रखें और इसे अपने आप से कहें। यह कोई कठिन काम नहीं है।
 अपने दोस्तों की गलतियों को स्वीकार करें...किसी के वजह से अगर आपको ठेस पहुँचती है तो इसे स्वीकार करें। अपने आप को इससे नुकसान न पहुँचायें। लोगों से गलतियाँ हो जाया करतीं हैं, उन्हें अपना समझ कर माफ करें। कुछ नया सोचें और सभी को प्यार करें।
 नई आदतें बनायें...हम रोजाना एक मशीन की तरह काम करते हैं. कुछ नया नहीं करते। हमें अपने जीवन में उन सभी आदतों को शामिल करना चाहिए जो अच्छी एंव सही हों। हमें अपनी शक्ति को अच्छे काम में लगानी चाहिए। हमारे अंदर ऊर्जा का भण्डार है, बस उसे सही जगह लगाने की जरुरत है।
 स्व अनुशासन का निर्माण करें...प्रत्येक व्यक्ति का अपना व्यक्तित्व होना चाहिए। लोगों को न देखें कि वो क्या, कैसे करते हैं। अपना एक नियम बनायें। आत्म अनुशासन से आपके जीवन में बहुत परिवर्तन होंगे। यह थोड़ा कठिन है लेकिन इसके परिणाम बहुत अच्छे होते हैं।
 नए दोस्त बनायें...बाहर निकलें नये दोस्त बनायें। लोगों के बीच अपनी पहचान बनायें। लोगों से अपनी तरफ से बात करने की पहल करें। सामाजिक कार्यों में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लें।
 अपने भोजन में बदलाव करें...शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए अच्छा भोजन बहुत आवश्यक होता है। आप भोजन किस प्रकार का करते हैं यह भी महत्वपूर्ण है। भोजन में हमेशा बदलाव करते रहना चाहिए, क्योंकि कोई भी चीज अपने आप में पूर्ण नहीं होती।
 डायरी बनायें...अपने विचारों, कार्यों और टारगेट को लिखने की आदत डालें। डायरी बनाने से आपका जो टारगेट होता है उसको सही दिशा मिलती है। डायरी आपके सहायक की तरह काम करती है। बस एक पेन और नोट बुक की जरुरत पड़ेगी।
.अपनी गलतियाँ स्वीकार करें...आप सब जानते हैं कि गलतियाँ इंसान से ही होतीं हैं। लेकिन सबसे बड़ी बात अपनी गलती को स्वीकार करना और अगली बार गलती न करना और कुछ अच्छा सोचना है। अपने आप को सजा देने की जरुरत नहीं है बल्कि अपनी गलती को स्वीकार करके एक अच्छी शुरुआत कर सकते हैं, क्योंकि गलती सफलता की ही एक सीढ़ी है। इसे पार किये बिना आप सफलता तक नहीं पहुँच सकते।
 रात को सोते समय अंतिम विचार एंव सुबह उठते समय पहला विचार...रात को सोते समय कोई अच्छा विचार अपने मन में बार बार दोहराएं। यह कोई अच्छा प्रेरक कथन, सुविचार या अनमोल विचार भी हो सकता है। बार बार दोहराने से यह अच्छा विचार पूरी रात आपके अवचेतन मन में चलता रहेगा। सुबह जब आप उठेंगे तो वही विचार आपको मिलेगा जैसे कि आप पूरी रात उसके बारे में सोच रहे थे। अगर आपको कोई दृढ़ निश्चय करना है तो उसे रात को दोहराते हुए सो जायें , इससे आपका आत्मविश्वास बढ़ेगा।
 अवसर का महत्व...हमेशा अवसर को पहचान कर उसका लाभ उठाना चाहिए क्योंकि अवसर बार बार नहीं मिलता। अगर आप यह सोचें कि मैं सफलता कैसे प्राप्त  करुँ, मेरे पास साधन नहीं हैं, सुविधाएं नहीं हैं, कुदरत ने मेरा साथ नहीं दिया । लेकिन ऐसे बहुत से लोग हैं जिन्होंने बिना सुविधाओं के सफलता हासिल की। सफलता का मतलब जो दूसरों को आपके लिए असम्भव जैसा लगे । सफलता हासिल करने के लिए मेहनत, लगन और दृढ़ निश्चय का होना बहुत जरुरी है।
अपने आसपास का वातावरण स्वच्छ रखें...आप का व्यक्तित्व आपके चारों तरफ के माहौल को देखकर तय किया जा सकता है कि आप किस प्रकृति के व्यक्ति हैं। जब हम किसी के कार्यालय या घर पर जाते हैं तो वहाँ का वातावरण माहौल देखकर हमें वहाँ के माहौल के बारे में अंदाजा लग जाता है कि हमें यहाँ किस प्रकार से वर्ताव करना है।

 नया सीखने की ललक..."मैं सीख सकता हूँ" ऐसी चुनौती अपने मन को दीजिए। आप कोई नई चीज सीखने की सोच रहे हैं लेकिन उसकी शुरुआत नहीं कर पा रहे हैं। अगर आप कोई नई चीज सीख लेते  हैं तो वह आपके व्यक्तित्व के विकास में सहायक होगी।  नई चीज सीखना कोई कठिन काम नहीं है। अगर आपसे यह कहा जाये कि आप पंजाबी भाषा या अन्य कोई भाषा 7 दिन में सीख लें, इसके लिए आपको 1 करोड़ रु० दिए जायेंगे,। मैं दावे के साथ कह सकता हूँ कि आप वह भाषा 5 दिन में ही सीख लेंगे। गम्भीरता से सोचिये आपके अंदर इतनी एनर्जी कहाँ से आई। बस आप शुरुआत कीजिए।

 उत्साह…किसी काम को करते समय प्रत्येक व्यक्ति में उत्साह होना चाहिए। अगर आप के अंदर उत्साह नहीं है तो आप सफल नहीं हो सकते हैं। कुछ लोगों का उत्साह शुरु में तो होता है लेकिन बाद में कम हो जाता है। ऐसे लोगों की सफलता भी संदिग्ध रहती है। इसलिए किसी भी काम में सफलता पाने के लिए हमारा उत्साह काम शुरु करने से लेकर काम खत्म होने एक जैसा ही रहना चाहिए।

 एक ब्लाग शुरुआत करें...आजकल लगभग सभी लोग ब्लाग के बारे में जानते हैं। ब्लाग को हिंदी में चिट्ठा कहा जाता है। इसके माध्यम से हम अपने विचार लोगों तक पहुँचा सकते हैं। ब्लाग किसी भी विषय पर लिखा जा सकता है।

 सही बनने की कोशिश करो, परफेक्ट नहीं...परफेक्ट बनने की कोशिश में समय बर्बाद मत करो। केबल अच्छा करने की कोशिश करो। लोगों द्वारा सराहना की जायेगी। अपने आसपास देखो और कहो कि मैं अच्छा कर रहा हूँ।
 बोलने की कला...बोलने की कला से ही हम सर्वोपरि बनते हैं। मंच पर खड़े होकर बोलना एक कला है। आपको कुछ भी न आता हो, अगर बोलना आता है तो आप एक अनुभवी व्यक्ति से भी ज्यादा कर सकते हैं।  सफल लोग भी  मंच पर आते ही काँपने लगते हैं और कम सफल या संघर्षरत लोग धाराप्रवाह बोलते हैं, इसलिए हमें बेहिचक धाराप्रवाह बोलने की कोशिश करनी चाहिए।

 स्वयं को प्रेरित करें...हमेशा अपने आप को प्रेरित करते रहें, यह आपको नकारात्मक विचारों और नकारात्मक सोच से बचायेगा। अगर आपके चारों तरफ आपको प्रेरणा देने वाला कोई है तो आप अच्छा ही अच्छा करेंगे। अपने आप को प्रेरित करने के लिए आपको महापुरुषों के सुविचार, उनकी जीवनी ,प्रेरणादायक कहानियाँ, प्रेरक प्रसंग इस प्रकार के लेख पढ़ने चाहिए.

 अच्छा वक्ता...अगर आपको अच्छा बोलना आता है तो आप किसी अनुभवी व्यक्ति से भी अच्छा कर सकते हैं। अच्छा बोलने वाले ही सफल होते हैं। हर जगह अच्छा वक्ता ही नेतृत्व करता है।

 अपने आप को चुनौती दीजिए... हर महीने, तीन महीने या छः महीने में एक बार अपने आप को किसी काम को लेकर चैलेंज करें। काम ऐसा लें जो आपको कठिन लग रहा हो। अगर आप ऐसा करते हैं तो आपके अंदर का डर धीरे धीरे खत्म हो जायेगा और आप आत्मविश्वास से परिपूर्ण होंगे जो कि सफल होने के लिए बहुत आवश्यक है। 
 नया दिन अच्छी शुरुआत... हम यह सोच कर अपना दिन बर्बाद न करें कि कल क्या हुआ था, परसों क्या हुआ था। नये दिन की शुरुआत अच्छे ढ़ंग से करें। शांत और अच्छे तरीके से की गई शुरुआत आपको सफलता दिलायेगी।
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Tuesday, 15 November 2016

Amulya Khabar

Self Improvement in Hindi >>> आत्म उन्नति के चार चरण

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Self Improvement in Hindi... आत्म उन्नति के चार चरण...
Posted On 15.11.2016 By: Deep Singh Yadav

 दोस्तो, सामान्य स्थिति से ऊपर उठने के लिए हर व्यक्ति को स्वतंत्रता प्राप्त है। सही रास्ता,सही साधन अपनाकर कोई भी व्यक्ति आत्म उन्नति कर सकता है जैसेः बहादुरी ,ईमानदारी, जिम्मेदारी एंव समझदारी ,ये उन्नति के चार चरण हैं। इन्हें अपनाने के लिए हमेशा जागरुक एंव लगातार प्रयास करते रहना चाहिए।
आइए अब विस्तार से समझते हैं......... 

1. समझदारी.....
समझदारी को सौभाग्य का प्रवेश द्वार एंव बेवकूफी को दुर्भाग्य का प्रवेश द्वार कहते हैं। समझदारी मनुष्य का सबसे उत्तम गुण है।समझदारी का अर्थ है आकर्णष में संयम बरतना, दूर की सोचना, स्थिति के अनुसार निर्णय लेना एंव कोशिश करना, किसी काम के प्रकार को समझना। विवेकशील व्यक्ति लगातार अभ्यास करके समझदारी को स्थाई बनाते हैं। समझदारी के साथ विवेकशीलता और दूरदर्शिता जुड़ी रहती है। समझदार व्यक्ति अनुशासन, मेहनत, धैर्य एंव मनोयोग को उज्जवल भविष्य की मजबूत नींव मानते हैं। वे तुरंत मिलने वाले लाभ पर ध्यान न देकर दूरगामी परिणामों पर विचार करते हैं। इस प्रकार समझदार व्यक्ति अपने जीवन में अनेक उपलब्धियाँ हासिल कर लेते हैं। समझदार व्यक्ति फूँक फूँक कर कदम रखते हैं, लाभ हानि, गुण दोष पर विचार करते हैं। अनुचित के लिए दृढ़तापूर्वक "न" कह देते हैं।


2. ईमानदारी.....
समझदारी के अलावा ईमानदारी को मनुष्य की गरिमा में चार चाँद लगाने वाला माना जाता है। ईमानदारी का मतलब मोटे तौर पर आर्थिक लेन देन में प्रामाणिकता बरतना माना जाता है, लेकिन वह वहीं तक सीमित नहीं है। ईमानदारी की सीमा में वस्तुओं में मिलावट न करना, किसी की जेब न काटना, टैक्स चोरी न करना, रिश्वत न लेना आदि बातें आतीं हैं। ईमानदारी अपनाने पर शुरुआत में भले ही कोई घाटे में रहे लेकिन अंतता परिणाम लाभदायक ही रहता है। बेईमानी से कमाई हुई धन दौलत जिस किसी के पास जायेगी उसे दुर्वव्सनों में लिप्त कर देगी। हमें समाज के प्रति, परिवार के प्रति, भगवान एंव स्वंय के प्रति हमेशा ईमानदार रहना चाहिए़। हम अपनी आत्मा के दरबार में झूठे बेईमान साबित न हों। छल, कपट, झूठ एंव फरेब किसी भी प्रकार से हमारे जीवन में प्रवेश न करे और हम सभी जिम्मेदारियों के प्रति अपना फर्ज कुशलतापूर्वक निभायें।


3. जिम्मेदारी.....
मनुष्य को जिम्मेदारियाँ अनेक रुपों में सौंपी गई हैं, जो मनुष्य इनकी अवहेलना करता है उद्दंड माना जाता है। हर व्यक्ति अनुशासन का पालन, समाजनिष्ठा, पारिवारिक व्यव्स्था एंव शारीरिक रक्षा जैसी जिम्मेदारियों से बँधा हुआ है। जिम्मेदारियों को निभाने पर ही मनुष्य का शौर्य निखरता है ओर वह विश्वासी बनता है। विश्वास के आधार पर ही उसे और भी जिम्मेदारियाँ सौंपी जाती हैं। जिम्मेदार लोगों का ही व्यक्तित्व निखरता है और वे ही बड़े पराक्रम कर पाते हैं। हर समझदार व्यक्ति की जिम्मेदारी है कि जिस प्रकार वह अपनी अर्थव्यवस्था का धयान रखता है, उसी प्रकार अपने शरीर और मस्तिष्क का भी धयान रखे। हमारी जिम्मेदारी है कि जिस प्रकार चोर को घर में नहीं घुसने दिया जाता है उसी प्रकार हमारे मस्तिष्क में अनुपयुक्त विचारों का प्रवेश न होने पाये।


4.बहादुरी.....
समझदार, ईमानदार व जिम्मेदार होने के साथ साथ मनुष्य को बहादुर भी होना चाहिए। साहसी और पराक्रमी व्यक्ति कायरों की तरह असफलता की आशंका और कठिनाइयों से भयभीत होकर अपने कर्तव्यों को छोड़ कर बैठ नहीं जाते है बल्कि साहस और निर्भीकता से जो करने योग्य है उसे करते हैं। बहादुरी इसी में है अगर तुम्हारे पास कम साधन हैं फिर भी लगन, हिम्मत और मेहनत के बलबूते ऐसे काम करके दिखाओ जिससे लोगों को आश्चर्यचकित होकर दाँतों तले उँगलियाँ दबानी पड़े। बुराइयाँ संघर्ष के बिना नहीं जाती हैं और संघर्ष के लिए साहस, बहादुरी का होना बहुत जरुरी है। कठिनाइयों पर विजय पाने एंव प्रगति के पथ पर आगे बढ़ने के लिए साहस ही ऐसा एक मात्र साथी है जिसको साथ लेकर तुम अकेले भी कठिन मार्ग पर चल कर अपने उद्देश्य को हासिल कर सकते हो।

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Thursday, 13 October 2016

Amulya Khabar

Rules of Personality Development in Hindi >>>व्यक्तित्व विकास




Rules of  Personality Development in Hindi...व्यक्तित्व विकास...
 Posted On 13.10.2016 By: Deep Singh Yadav

दोस्तो, हम रोजाना बहुत से लोगों से मिलते है पर कुछ लोग ही ऐसे होते हैं जो हमे प्रभावित कर पाते हैं। ऐसे लोगों के लिए हम कह सकते हैं कि, the person has got a pleasant personality ऐसी personality वाले लोग अक्सर खुशहाल होते हैं और उनका हर जगह  सम्मान होता है, उन्हें लोग पसंद करते हैं, parties में invite किया जाता है और job में इन्हें प्रोमोशन भी जल्दी मिलती है। नैचुरली हम सभी ऐसी personality possess करना चाहेंगे और आज  मैं इस article में ऐसे ही कुछ points share कर रहा हूँ जो आपको एक आकर्षक व्यक्तित्व  पाने में मदद कर सकते हैं।

1. लोगों को लाइक कीजिए …

 जब हम किसी से मिलते हैं तो अपने मन में उस व्यक्ति की एक image बना लेते हैं। यह image positive या negative हो सकती है, अगर हम अपनी personality को improve करना चाहते हैं तो हमें इस image  को positive बनाना होगा । हमें अपनें दिमाग को trained करना पङेगा कि वह लोगों में अच्छाई खोजे बुराई नहीं।अगर आप अपने दिमाग को अच्छाई खोजने का आदेश देंगे तो वह अच्छाई खोजना शुरु कर देगा, यह कोई कठिन काम नहीं है।

हमें लोगों के साथ धैर्य से काम लेना चाहिए, उनकी किसी कमी से irritate नहीं होना चाहिए। खुद को उनकी जगह रखकर देखना चाहिए। शायद हम भी उन्हीं जैसे माहौल/ वातावरण में पले बढ़े होते तो उनके जैसे ही होते । इसलिये लोगों के  अलग तरह के व्यवहार से  irritate न हों।

दोस्तो, हमारे चारों तरफ जो नकारात्मकता/ negativity फैली हुई है वो हमें बहुत प्रभावित करती है। प्रतिदिन हम धोखाधड़ी, चोरी आदि के समाचार सुनते  रहते हैं, शायद इसी वजह से एक इंसान का दूसरे इंसान से विश्वास कम होता जा रहा हैं। लोगों पर विश्वास कीजिए लेकिन आँख मूँद कर अविश्वास भी न करें। ज्यादातर लोग अच्छे होते हैं। आप लोगों से
अच्छा व्यवहार कीजिए, उन्हें like कीजिए, इसके बदले लोग भी आपके साथ ऐसा ही करेंगे।

2.  मुस्कराते हुये मिलें...
जब आप अपने सबसे अच्छे friend से मिलते है तो एक दूसरे को देखकर  smile करते हैं। मुस्कराना इस बात को दर्शाता है कि आप सामने वाले को पसंद करते हैं। यही बात हर तरह के रिश्ते  में लागू होती है, इसलिए जब आप किसी  से मिलें तो चेहरे पर smile लायें। इससे लोग खुश होंगे और आपको पसंद करेंगे।

बस हल्का सा smile ही तो करना है, लेकिन बहुत से लोग इस बात पर ध्यान नहीं देते हैं अगर आप भी नहीं करते हैं तो आज से ही इसे अपनी practise में लाइए। मुस्कराता हुआ चेहरा उदास चेहरे की जगह ज्यादा आकर्षक/attractive  लगता है, और आपकी personality  को attractive बनाने में काफी मदद करता हैं।
मुस्कराने के कई फायदे हैं, जब हम अंदर से खुश होते हैं तो हमारे बाहरी expressions उसी अनुसार चेंज हो जाते हैं, हमें देखकर लोग समझ लेते हैं कि हम खुश हैं । जब हम अपने बाहरी expressions को को खुशनुमा बना लेते हैं तो उसका असर हमारे आंतरिक mood पर पड़ता है और वह अच्छा हो जाता हैं।

3.  नाम का रखें ध्यान...
किसी भी मनुष्य के लिए उसका नाम बहुत importance रखता है, इसलिए जब आप किसी से बात करें तो बीच बीच में उसका नाम भी लेते रहें। अगर कोई आपसे senior है तो नाम के साथ जरुरी suffix या prefix लगाना न भूले।

बीच बीच में नाम लेने से सामने वाला अपनी importance feel करता है और आपकी तरफ ध्यान भी देता है। वह इस बात से खुश होता है कि आप उसके नाम को importance  दे रहें हैं। आप भी नाम के महत्व समझिये।

4.  सामने वाले को महत्व दीजिए...
ऐसा ज्यादातर होता है कि हम उसे पसंद करते हैं जो हमारे मतलब की बात करता है, हमारी तारीफ करता है। लेकिन प्रत्येक मनुष्य अपने आप को आगे रखना चाहता है, वह केवल अपनी बात को सामने रखता है और सामने वाले की एक नहीं सुनना चाहता है।

लेकिन इसमें हमें थोड़ा बदलाव करना होगा। हम अपने आप को आगे न रखते हुए लोगों को आगे रखेंगे। जैसे...आप कैसे हैं? आप कहाँ रहते हैं? आपको क्या पसंद है? आदि। जब लोगों से आपका व्वहार इस प्रकार का होगा तो निश्चित ही लोग आपको पसंद करेंगे। जैसे आप मेरे ब्लाग अमूल्य खबर को पसंद करेंगे या इसके बारे में बात करेंगे तो मैं भी आपको पसंद करुँगा।

5.  पहले सुने फिर बोलेँ...
जो व्यक्ति ज्यादा बोलता है या सामने वाले की बात नहीं सुनता है, ऐसे लोगों से सभी कतराने  लगते है। उसके सामने आने से बचने की कोशिश करते हैं, और जो लोग सामने वाले को बोलने का मौका देते हैं , उसकी बातों को ईमानदारी से सुनते हैं, इस प्रकार के लोगों को सभी पसंद करते हैं। हमे सबसे पहले लोगों को ध्यान से सुनना चाहिए, उसके बाद ही स्वंय बोलें।
आप भी एक अच्छे स्रोता बनकर लोगों के चहेते प्रिय बन सकते हैं।

6.  बोलने का तरीका...
आप क्या बोल रहे हैं यह महत्वपू्र्ण नहीं है, कैसे बोल रहे हैं यह बेहद महत्वपू्र्ण होता है। हमें अपने बोलने के तरीके और शब्दों पर ध्यान देना चाहिए। जितना ज्यादा से ज्यादा सम्भव हो सके नम्रता और सभ्यता के साथ लोगों से वर्ताव करें।

7.  निस्वार्थ भावना से लोगों की मदद करें...
हमें बिना अपना स्वार्थ और फायदा सोचे लोगों की मदद करनी चाहिए। कुछ लोग मदद करने में आलस करते हैं या फिर ये सोचते हैं कि मेरा इसमें क्या फायदा है?  हमें निस्वार्थ भावना से लोगों की मदद करनी चाहिए। निस्वार्थ भावना से की हुई मदद आपके व्यक्तित्व में चार चाँद लगा देगी।

8.  सच्ची तारीफ करना...
महान हस्ती हो या कोई साधारण इंसान तारीफ सुनना सभी को अच्छा लगता है। सामने वाले की दिल खोल कर सच्ची तारीफ कीजिये, तारीफ करने में जरा सी भी कंजूसी न करें क्योंकि सामने वाले की तारीफ करने से आपके व्यक्तित्व में और ज्यादा निखार आयेगा।
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Monday, 5 September 2016

Amulya Khabar

An Introduction to Personality Development in Hindi >>> व्यक्तित्व विकास... एक परिचय

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 An Introduction to Personality Development in Hindi...व्यक्तित्व विकास... एक परिचय.
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Monday, 1 August 2016

Amulya Khabar

Ten Rules Of Success in Hindi... >>> सफलता के दस सूत्र



Ten Rules Of Success in Hindi...

Posted On 01.08.2016 By: Deep Singh Yadav
दोस्तो,
        अमेरिका के 36वें  President लिंडन जानसन ने सफलता प्राप्त करने के लिये दस सूत्रीय कार्यक्रम तैयार किया था। इतिहास इस बात का गवाह है कि वे अपने जीवन में इन सूत्रों  को उतारते थे। मुझे विश्वास है कि आपको भी निम्नलिखित दस सूत्रों से अपने जीवन मेँ सफलता प्राप्त करने में पूरी पूरी मदद मिलेगी।

1.  आप जिससे भी मिलें उनका नाम याद रखनें की आदत डालें। अगर आप ऐसा नहीं करते हो तो सामने वाले को यह लग सकता है कि उसमें आपकी रुचि नहीं है।

2.  एक ऐसे मजाकिया, हसमुख, मिलनसार और अनुभवी टाइप के व्यकि्त बनें जिससे आपके साथ रहने पर कोई तनाव में न रहे।

3.  अपने दिमाग को ठण्डा रखने की आदत डालें ताकि कठिन हालात आपको उत्तेजित या परेशान न करें।

4.  बङबोले न बनें। सामने वाले यह एहसास न होने दें कि आप खुद को बहुत जानकार , बहुत अक्लमंद समझते हैं।

5. दिलचस्प बनने की आदत डालें, ताकि लोग आपके आसपास रहना पसंद करें।

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6. अपने व्यवहार से "चुभने वाले" तत्वों को बाहर निकाल फेंकें ।

7.  सच्ची धार्मिक भावना से हर गलतफहमी दूर करने की पूरी कोशिश करें। अपनी शिकायतों को नाली में बहा दें।

8. लोगों को पसंद करने का अभ्यास करें, और कुछ समय बाद आप सचमुच आप उन्हें पसंद करने लगेंगे।

9. किसी कि सफलता और Achievement  पर बधाई देने का कोई मौका न गवाएँ और न ही दुःख या निराशा में संवेदना जताने का अवसर खोएँ।

10.  लोगों को प्रेरणा और ताकत देने का प्रयास करें ।

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Sunday, 31 July 2016

Amulya Khabar

Five Rules Of Success in Hindi >>> सफलता के पाँच सूत्र



Five Rules Of Success...
Posted on 31.07.2016 By:Deep Singh Yadav

जीवन में सफलता पाने के लिये विद्वानों ने पाँच सूत्रों को प्रमुख स्थान दिया हैं। जो मनुष्य इन पाँच सूत्रों को अपना लेता है उसे सफलता अवश्य मिलती है।
ये पाँच सूत्र निम्नलिखित हैं....
1. परिश्रम एवं पुरुषार्थ।
2. आत्मविश्वास एवं बलिदान।
3. स्नेह एवं सहानुभूति।
4. साहस एवं नियमितता।
5. प्रसन्नता एवं मानसिक संतुलन ।

1. परिश्रम एवं पुरुषार्थ...
  दीपक जलता है और संसार को प्रकाश देकर सफलता प्राप्त करता है। दीपक की सफलता का रहस्य यही है कि वह अपने तेल और बत्ती को तिल तिल कर जलाता रहता है। उसका प्रकाश उसकी  उस निरंतरता और ज्वलनशीलता का ही होता है, जिसको वह लौ के रुप में बत्ती से प्रकट करता है। दीपक का कर्त्तव्य जलना है। अगर वह अपने कर्त्तव्य से विमुख होकर निष्क्रय हो जायेगा तो प्रकाश रुपी सफलता उससे दूर चली जायेगी। वह एक मूल्यहीन मिट्टी के पात्र से अधिक कुछ नहीं रह जायेगा।
इसी प्रकार जो मनुष्य अपने शरीर का सार मेहनत रुपी तप में खर्च करते हैं,अपनी ताकत एवं छमताओं  का समुचित उपयोग करते हैं,वे आलोकित होते हैं। सक्रियता ही जीवन है और निष्क्रियता ही अंत है।आलसी मनुष्य को जीवित नहीं कहा जा सकता।

2.  आत्मविश्वास एवं बलिदान...
   आत्मविश्वास एवं स्वावलंबन से हीन मनुष्य की कोई भी सहायता एवं सहयोग नहीं करता है। लोग उसी की सहायता करते हैं जो अपनी सहायता स्वंय करता है और जिसका ह्रदय आत्मविश्वास की भावना से भरा होता है। अगर मनुष्य मेहनती और आत्मविश्वासी दोनों है लेकिन उसमें लगन की कमी है तो भी उसका नाम सफल मनुष्यों की सूची में आ पाना कठिन है।सफलता प्राप्त करने के लिये लगनशीलता का होना आवश्यक है। सफलता पाने या उसकी सम्भावनाएँ सुनिशि्चत करने के लिये यह आवशयक है कि किसी भी आवश्यक त्याग या बलिदान के लिये हमेशा तैयार रहा जाये।

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3.  स्नेह एवं सहानुभूति..



    सफलता या उसके लिये प्रयत्न में यदि स्नेह तथा सहानुभूति का समावेश न किया जाये तो वह या तो असफलता में बदल जायेगी अथवा प्राप्त नहीं होगी। उन्नति तथा विकास चाहने वालों को स्नेह तथा सहानुभूति को स्थान देना आवश्यक है। जिससे कि बदले में वह भी स्नेह व सहानुभुति पाता रहे और उसका रास्ता आसान हो जाये।

4. साहस एवं नियमितता...

    यदि मनुष्य में साहस और निर्भयता की कमी है तो समझ लेना चाहिये कि वह अपने लछ्य तक नहीं पहुँच सकता। डरपोक मनुष्य में आगे बढ़ने का साहस नहीं होता है। अनजाने डर की वजह से वह किसी भी काम को शुरु ही नहीं करता है, जब कोई शुरु ही नहीं होगा तो उसका परिणाम कैसे आयेगा।संसार में दुष्टों ब दुश्मनों की कमी नहीं है, वे उठते हुये मनुष्य के मार्ग में अवरोध एवं विरोध बनकर खङे हो जाते हैं। ऐसे समय में दुष्टों से निपटने के लिये उस साहस की आवश्यकता होती है जो डरपोक मनुष्य में नहीं होता है।

5. प्रसन्नता एवं मानसिक संतुलन...

   सफलता पाने के लिये प्रसन्नता उतनी ही आवश्यक है, जितनी शारीरिक यात्रा के लिये जीवन की। अप्रसन्न मनुष्य एक प्रकार से निर्जीव ही होता है। ऐक छोटी सी असफलता आने पर वह तुरंत हताश व निराश हो जाता है। इस प्रकार के निम्न स्वभाव वाला मनुष्य सफल कैसे हो सकता है। सफलता को प्राप्त करने की आकांछा रखने वाले मनुष्यों को हमेशा प्रसन्न रहना चाहिये।

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Tuesday, 12 July 2016

Amulya Khabar

Self Improvement (आत्म सुधार) के लिये अवश्य पढ़ें >>>रहीम दास के अनमोल दोहे in Hindi

रहीम दास के अनमोल दोहे 
Posted On 12.07.2016 By:Deep Singh Yadav


दोहा 1: रहिमन धागा प्रेम का, मत तोरो चटकाय.
                 टूटे पे फिर ना जुरे, जुरे गाँठ परी जाय.
                                                                        
हिन्दी अर्थ : रहीम कहते हैं कि प्रेम का नाता बहुत नाज़ुक होता है. इसे झटका देकर तोड़ना उचित नहीं होता. यदि यह प्रेम का धागा एक बार टूट जाता है तो फिर इसे मिलाना काफी कठिन होता है और अगर मिल भी जाए तो टूटे हुए धागों के बीच में गाँठ पड़ जाती है.

दोहा 2: जो रहीम उत्तम प्रकृति, का करी सकत कुसंग.
                  चन्दन विष व्यापे नहीं, लिपटे रहत भुजंग.

हिन्दी अर्थ : रहीम कहते हैं कि जो अच्छे स्वभाव के मनुष्य होते हैं, उनको बुरी संगति भी बिगाड़ नहीं पाती. जहरीले सांप चन्दन के पेड़ से लिपटे रहने पर भी उस पर कोई जहरीला प्रभाव नहीं डाल पाते.

दोहा 3: रहिमन देखि बड़ेन को, लघु न दीजिए डारि.
                    जहां काम आवे सुई, कहा करे तरवारि.

हिन्दी अर्थ : रहीम कहते हैं कि बड़ी वस्तु को देख कर छोटी वस्तु को फेंकना नहीं चाहिए. जहां पर छोटी सी सुई काम आती है, वहां पर तलवार बेचारी क्या कर सकती है ?

दोहा 4: बिगरी बात बने नहीं, लाख करो किन कोय.
               रहिमन फाटे दूध को, मथे न माखन होय.

हिन्दी अर्थ : मनुष्य को सोच-समझ कर व्यवहार करना चाहिए क्योंकि किसी कारणवश अगर बात बिगड़ जाती है तो फिर उसे बनाना कठिन होता है, जैसे यदि एक बार दूध फट गया तो लाख कोशिश करने पर भी उसे मथ कर मक्खन नहीं निकाला जा सकेगा.

दोहा 5: जो बड़ेन को लघु कहें, नहीं रहीम घटी जाहिं.
         गिरधर मुरलीधर कहें, कछु दुःख मानत नाहिं.

हिन्दी अर्थ : रहीम कहते हैं कि बड़े को छोटा कहने से बड़े का बड़प्पन नहीं घटता, क्योंकि गिरिधर (कृष्ण) को मुरलीधर कहने से उनकी महिमा में कमी नहीं होती.

दोहा 6: रूठे सुजन मनाइए, जो रूठे सौ बार.
   रहिमन फिरि फिरि पोइए, टूटे मुक्ता हार.

हिन्दी अर्थ : यदि आपका प्रिय सौ बार भी रूठे तो भी रूठे हुए प्रिय को मनाना चाहिए क्योंकि यदि मोतियों की माला टूट जाए तो उन मोतियों को बार बार धागे में पिरो लेना चाहिए.

दोहा 7: खीरा सिर ते काटि के, मलियत लौंन लगाय.
           रहिमन करुए मुखन को, चाहिए यही सजाय.

हिन्दी अर्थ : खीरे का कडुवापन दूर करने के लिए उसके ऊपरी सिरे को काटने के बाद नमक लगा कर घिसा जाता है. रहीम कहते हैं कि कड़ुवे मुंह वाले के लिए, कटु वचन बोलने वाले के लिए यही सजा ठीक है.

दोहा 8: जैसी परे सो सहि रहे, कहि रहीम यह देह.
              धरती ही पर परत है, सीत घाम औ मेह.

हिन्दी अर्थ : हीम कहते हैं कि जैसी इस देह पर पड़ती है, सहन करनी चाहिए क्योंकि इस धरती पर ही सर्दी, गर्मी और वर्षा पड़ती है अर्थात जैसे धरती शीत, धूप और वर्षा सहन करती है, उसी प्रकार हमारे शरीर को सुख-दुःख सहन करना चाहिए.

दोहा 9: रहिमन निज मन की बिथा, मन ही राखो गोय.
                     सुनी इठलैहैं लोग सब, बांटी न लेंहैं कोय.

हिन्दी अर्थ : रहीम कहते हैं की अपने मन के दुःख को मन के भीतर छिपा कर ही रखना चाहिए. दूसरे का दुःख सुनकर लोग इठला भले ही लें, उसे बाँट कर कम करने वाला कोई नहीं होता.

दोहा 10: दोनों रहिमन एक से, जों लों बोलत नाहिं.
         जान परत हैं काक पिक, रितु बसंत के माहिं.

हिन्दी अर्थ : कौआ और कोयल रंग में एक समान होते हैं. जब तक ये बोलते नहीं तब तक इनकी पहचान नहीं हो पाती है. लेकिन जब वसंत ऋतु आती है तो कोयल की मधुर आवाज़ से दोनों का अंतर स्पष्ट हो जाता है.

दोहा 11: पावस देखि रहीम मन, कोइल साधे मौन.
                 अब दादुर वक्ता भए, हमको पूछे कौन.

हिन्दी अर्थ : वर्षा ऋतु को देखकर कोयल और रहीम के मन ने मौन साध लिया है. अब तो मेंढक ही बोलने वाले हैं. हमारी तो कोई बात ही नहीं पूछता. इसका अभिप्राय यह है कि कुछ अवसर ऐसे आते हैं जब गुणवान को चुप रह जाना पड़ता है. उनका कोई आदर नहीं करता और गुणहीन बुरे व्यक्तियों का ही बोलबाला हो जाता है.

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