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Wednesday, 10 May 2017

Amulya Khabar

शास्त्रों के अनुसार इन संकेतो से आप जान सकते है, Death Date in Hindi !



शास्त्रों के अनुसार इन संकेतो से आप जान सकते है, Death Date in Hindi !
 posted on 10.05.2017 By: Deep Singh Yadav
इस दुनियाँ में मृत्यु सृष्टि का एक ऐसा नियम है, जिसे कोई नहीं झुठला सकता । जिसने इस धरती पर जन्म लिया है, उसकी एक न एक दिन मृत्यु  अवश्य होगी।  व्यक्ति के जन्म के साथ ही ईश्वर द्वारा यह भी निश्चित कर दिया जाता है कि किसी व्यक्ति की मृत्यु कब, कहाँ और कैसे होगी। ऐसे में इस कड़वे सच को जानते हुए भी हर व्यक्ति इससे बचने का प्रयास  करता है। जिसके चलते वह हमेशा इस चिंता में रहता है कि कही उसे या उसके परिजनों,रिश्तेदारों को कुछ हो तो नहीं जाएगा।

 इसमें कोई दोराय नहीं कि जैसे जीवन एक सत्य है, ठीक उसी तरह जीवन के बाद मृत्यु का आना भी एक बहुत बड़ा सत्य है. पर वही मृत्यु के बाद क्या होता है, इंसान की आत्मा कहाँ जाती है और क्या उसका दोबारा पुनर्जन्म होता है, ये सब बातें आज भी एक रहस्य की तरह बनी हुई हैं। इसके इलावा भले ही मनुष्य को अब तक ये पता नहीं चला कि उसका अंत कितना पास है, पर हमारे ग्रंथो और पुराणों में कुछ ऐसे संकेतो के बारे में बताया गया है, जिनकी सहायता से हमें ये पता चल सकता है, कि व्यक्ति का अंतिम समय यानि उसकी मृत्यु का समय कब आएगा।

 कि शिव पुराण में कुछ ऐसी बातें कही गयी है. जिससे व्यक्ति के मृत्यु के समय को ज्ञात किया जा सकता है। आज हम शिव पुराण में मृत्यु से सम्बन्धित लिखी इन्ही बातों के बारे में आपको बताने जा रहे हैं...

* चेहरे के रंग में बदलाव...  शिव पुराण के अनुसार यदि किसी व्यक्ति के चेहरे का रंग पीला, सफ़ेद या हल्का लाल पड़ जाए तो यह इस बात का संकेत है कि उस व्यक्ति की मृत्यु छह महीने के अंदर होनी निश्चित है।

* परछाई का न दिखना...  हम जब भी पानी या तेल से भरे किसी बर्तन में झाँकते है तो उसमे हमें अपनी परछाई साफ़ नजर आती है, पर ऐसे में यदि व्यक्ति को तेल या पानी में अपनी परछाई दिखाई देना बंद हो जाए तो यह इस बात का संकेत है, कि उसकी मृत्यु पास है।

* शीशे में चेहरा न दिखाई दे...  इसके इलावा यदि व्यक्ति को धूप या शीशे में भी अपनी परछाई दिखना बंद हो जाए, तो यह भी व्यक्ति की मृत्यु का बड़ा संकेत है

* वस्तु का काला नजर आना...   जिस व्यक्ति की मृत्यु का समय बहुत नजदीक होता है, उसे रंगो की पहचान करने में दिक्क्त आती है. ऐसे में उसे हर वस्तु काले रंग की दिखाई देती है।

* बाएं हाथ का काँपना...  शिव पुराण के अनुसार यदि किसी व्यक्ति का बाया हाथ एक हफ्ते तक लगातार कांपता रहे, तो यह इस बात का संकेत है, कि उस व्यक्ति की मृत्यु एक महीने में होना तय है.


* इन्द्रियों में कड़ापन..  इसके इलावा यदि मनुष्य की पाँचों इन्द्रियों जैसे आँख. नाक, कान, जीभ और हाथ इन सभी में कड़ापन आ जाए, तो यह भी व्यक्ति की मृत्यु को सुनिश्चित करने के संकेत हैं।


* नाक का  दिखाई न  देना...  आम तौर पर हर व्यक्ति अपनी नाक को देख सकता है, फिर चाहे वो उसे धुंधली ही क्यों न दिखाई देती हो, पर यदि व्यक्ति को नाक दिखना बिलकुल बंद  हो जाए तो ऐसा कहा जाता है, कि व्यक्ति की आँखे मृत्यु के समय ऊपर की तरफ मुड़ने लगती हैं।


* रौशनी देखने में असमर्थ होना...  मनुष्य को सूर्य, चन्द्रमा और आग से ही रौशनी दिखाई देती है, पर  जिस व्यक्ति की मृत्यु पास हो उसके लिए इन सब में दिखने वाली रौशनी केवल लाल रंग में परिवर्तित हो जाती है।

* खंडित चाँद...  इसके अनुसार यदि व्यक्ति की मृत्यु कुछ ही क्षणों में होने वाली हो तो उसे चाँद में दरारे या खंडित चाँद नजर आता है।

* मृत परिजनों का एहसास...   यदि किसी व्यक्ति की मृत्यु नजदीक हो तो उसे अपने मृत परिजनों का एहसास होने लगता है. ऐसे में यह एहसास इतना गहरा होता है, कि उस व्यक्ति को लगता है, कि उसके मृत परिजन उसके करीब ही है और वह उन्हें सुन सकता है।


* अनजान साये के साथ होने का एहसास...  जब किसी व्यक्ति की मृत्यु में मात्र दो तीन दिन का समय रह जाता है, तो उसे यह एहसास होने लगता है कि उसके साथ कोई अनजान साया भी रह रहा है।


* ध्रुव तारे का न दिखना...  इसके अनुसार यदि किसी व्यक्ति की मृत्यु पास हो तो वो आसमान में सबसे अधिक चमकने वाले तारे यानि ध्रुव तारे को नहीं देख पाता है। यह भी इस बात का संकेत है कि व्यक्ति की मृत्यु छह महीने के अंदर हो जाएगी।

* शीशे में किसी और का चेहरा नजर आना...  आमतौर पर जब हम शीशा देखते है, तो हमें उसमे अपना प्रतिबिम्ब ही नजर आता है। पर यदि व्यक्ति को शीशे में देखने पर किसी और का चेहरा नजर आये तो यह उसकी  मृत्य 24 घंटे में होने का संकेत है।
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Saturday, 22 April 2017

Amulya Khabar

History of Ajan in Hindi / About Ajan in Hindi...अज़ान का इतिहास...अज़ान क्या है?







History of Ajan in Hindi / About Ajan in Hindi...अज़ान का इतिहास...अज़ान क्या है?

Posted on 23.04.2017 By: Deep Singh Yadav

अजान लाउड स्पीकर पर होनी चाहिए या नहीं, इसको लेकर इन दिनों चर्चा गर्म है। इस मुद्दे से एक बात की तरफ ध्यान जाता है कि आखि़र अज़ान है क्या?  अज़ान हमसे क्या कहती है?  अज़ान का अर्थ और इसका  इतिहास क्या है?
 

अज़ान का इतिहास‍‍‍‍‌... मदीना में जब सामूहिक नमाज़ पढ़ने के लिए मस्जिद बनाई गई तो इस बात की जरूरत महसूस हुई कि लोगों को नमाज़ पढ़ने के लिए किस तरह बुलाया जाए  कि नमाज़ का समय हो गया है।   मोहम्मद साहब ने जब इस बारे में अपने साथियों सहाबा से सलाह मश्वरा किया तो सभी ने अपनी राय अलग अलग  दी। किसी ने कहा कि प्रार्थना के समय कोई झँडा दिखाया  जाए। किसी ने कहा  कि किसी ऊँची जगह पर आग जला दी जाए। बिगुल  और घँटियाँ बजाने का भी प्रस्ताव दिया गया, लेकिन मोहम्मद साहब को ये सभी तरीके पसंद नहीं आए।
 
रवायत है कि उसी रात एक अंसारी सहाबी हज़रत अब्दुल्लाह बिन ज़ैद ने सपने में देखा कि किसी ने उन्हें अज़ान और इक़ामत के शब्द सिखाए हैं। उन्होंने सुबह  पैगंबर साहब की सेवा में हाज़िर होकर अपना सपना बताया तो उन्होंने इसे पसंद किया और उस सपने को अल्लाह की ओर से सच्चा सपना बताया। 
पैगंबर साहब ने हज़रत अब्दुल्लाह बिन ज़ैद से कहा कि तुम हज़रत बिलाल को अज़ान इन शब्‍दों में पढ़ने की हिदायत कर दो, उनकी आवाज़ बुलंद है इसलिए वह हर नमाज़ के लिए इसी तरह अज़ान दिया करेंगे। इस तरह हज़रत बिलाल रज़ियल्लाहु अन्हु ने इस्लाम की पहली अज़ान कही।
  

 अज़ान के प्रत्येक बोल के बहुत गहरे मायने हैं। मुअज्जिन (जो अज़ान कहते हैं) अज़ान की शुरुआत करते हुए कहते हैं कि अल्लाहु अकबर। यानि ईश्वर महान हैं। अज़ान के आखिर में भी अल्लाहू अकबर कहा जाता है और फिर ला इलाहा इल्लाह के बोल के साथ अज़ान पूरी होती है। यानि ईश्वर के सिवाए कोई माबूद नहीं।  
 अज़ान की शुरुआत और उसका मुकम्मल अल्लाह की महानता के साथ होता है, जबकि इसके बीच के बोल अज़ान की अहमियत पर रौशनी डालते हैं। अब पूरी अज़ान के अर्थ पर एक नज़र डालते हैं...  
अल्लाहु अकबर, अल्लाहु अकबर
अल्लाहु अकबर, अल्लाहु अकबर


ईश्वर सब से महान है।

अश-हदू अल्ला-इलाहा इल्लल्लाह
अश-हदू अल्ला-इलाहा इल्लल्लाह 

मैं गवाही देता हूं कि ईश्वर के अतिरिक्त कोई दूसरा इबादत के योग्य नहीं।
 

अश-हदू अन्ना मुहम्मदर रसूलुल्लाह
अश-हदू अन्ना मुहम्मदर रसूलुल्लाह

 

मैं गवाही देता हूं कि मुहम्मद सल्ल,
ईश्वर के अन्तिम मैं गवाही देता हूं कि ईश्वर के अतिरिक्त कोई दूसरा इबादत के योग्य नहीं।
 

अश-हदू अन्ना मुहम्मदर रसूलुल्लाह
अश-हदू अन्ना मुहम्मदर रसूलुल्लाह

 

मैं गवाही देता हूं कि मुहम्मद सल्ल,
ईश्वर के अन्तिम  संदेष्टा हैं।  

ह्या 'अलास्सलाह, ह्या 'अलास्सलाह

आओ नमाज़ की तरफ़।

हया 'अलल फलाह, हया 'अलल फलाह

आओ कामयाबी की तरफ़।
   अस्‍सलातु खैरूं मिनन नउम
अस्‍सलातु खैरूं मिनन नउम

(ये बोल केवल सुबह (फज़र) की अज़ान में कहे जाते हैं) 

नमाज़ सोए रहने से उत्तम है।
   अल्लाहु अकबर, अल्लाहु अकबर
 

ईश्वर सब से महान है।

ला-इलाहा इल्लल्लाह
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Wednesday, 19 April 2017

Amulya Khabar

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सैलरी जान कर हैरान रह जायेंगे आप…





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Wednesday, 12 April 2017

Amulya Khabar

Selfie Tips in Hindi...सेल्फी टिप्स...







Selfie Tips in Hindi...सेल्फी टिप्स...
Posted on 13.04.2017 By: Deep Singh Yadav

 शायद सेल्फी लेना  आपकी जिंदगी का भी अहम हिस्सा बन चुका होगा। सोशल मीडिया पर भी आप ऐसी कई तरह की सेल्फी देखते होंगे, जिन्हें सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है। लिहाजा आपके मन में भी तो यह बात आती होगी कि आपकी सेल्फी को भी लोग ज्यादा से ज्यादा लाइक करें। इसलिए मैं आपको बताने जा रहा हूँ सेल्फी लेने के कुछ खास तरीके, जिससे आप भी सोशल मीडिया पर छा सकते हैं।

सबसे पहले तो अपने मन से यह बात निकल दीजिए कि मेकअप करने से सेल्फी ज्यादा अच्छी आती या कुछ ही रंगों में  सेल्फी अच्छी आती है।  सेल्फी को इतना दिलचस्प कैसे बनाया जाये  कि लोग उसे देखें और पसंद करें। आइए इस बारे में आपको बाताते हैं...
 
*  पहले बात करते हैं ग्रुप सेल्फी की। जब भी आप दोस्तों या परिवार के साथ सामूहिक सेल्फी लेते हैं तो कोशि‍श कीजिए कि हर कोई अपने अलग अंदाज में दिखाई दे। सीधे खड़े होकर सेल्फी लेने की अपेक्षा अलग-अलग तरह से  खड़े होकर या कुछ लोग बैठकर सेल्फी लें।  

*  ग्रुप में सेल्फी लेते समय हर कोई अपने चेहरे पर अलग-अलग  भाव दिखाएगा, तो देखने वाला कुछ देर तक इस तस्वीर को जरूर देखेगा और पसंद भी करेगा। 

*  आप अपनी सेल्फी ले रहे हैं, तो अपने दोस्तों से पीछे की तरफ खड़े होकर अलग-अलग या अजीबो-गरीब प्रतिक्रिया देने के लिए कहें। इस तरह से देखने वाला पहले आपकी तस्वीर को देखने पर पीछे खड़े  लोगों को भी ध्यान से देखेगा।  

*  अगर आप व्यक्तिगत रूप से अपनी सेल्फी ले रहे हैं, तो इस बात पर ध्यान दें, कि या तो आप खुद को खास तरह से पेश करें या फिर आपके पीछे का क्षेत्र ध्यान खींचने वाला हो। 

*  अगर आपने कोई नई चीज खरीदी है और उसे सेल्फी के जरिए दुनिया को दिखाना चाहते हैं, लेकि‍न यह दिखावा आपको ठीक नहीं लगता तो एक काम कीजिए। आप अपनी इस सेल्फी में अपने किसी खास दोस्त को भी शामिल कर लिजिए।  ऐसे में किसी को अंदाजा भी नहीं होगा कि आप दिखावा कर रहे हैं, और लोग आपकी दोस्ती की तस्वीर को पसंद भी करेंगे।  

अगर दोस्तों का समूह बना है, और कुछ रोमांचक करना चाहते हैं तो सेल्फी में कुछ अलग करें। आप सभी एक घेरे में खड़े होकर अपने पैरों की सामूहिक तस्वीर ले सकते हैं। इसके बाद सभी दोस्तों को टैग करके यह तस्वीर फेसबुक पर डालें। यह तस्वीर आपको और अन्य लोगों में खुद को एवं एकदूसरे को पहचानने का रोमांच पैदा करेगी।  

*  इसी तरह से अगर आप चाहें तो पैरों की जगह हाथ, या सभी के चेहरे का एक तरफ का हिस्सा सेल्फी में लें सकते हैं। इस तरह से कर्इ नए तरीके आजमाकर आप अपनी सेल्फी को रोमांचक बना सकते हैं। 

यह जरूरी नहीं है कि सेल्फी लेते समय आपके चेहरे पर मेकअप लगा हुआ हो। इसकी जगह प्रकृतिक रूप से आप जैसे हैं , उसे ही अपने कैमरे में कैद करें। और मुस्कान के साथ-साथ चेहरे पर अन्य भाव-भंगिमाएं बनाकर देखें। इस तरह से आप सभी तस्वीरों को एक साथ लगा दें। यह जरूर पसंद की जाएगी। 

यह भी जरूरी नहीं कि सेल्फी के लिए पहले से कोई  तैयारी की जाए। आप चाहें हर एक दोस्त के पास जाकर अचानक कोई सेल्फी लें। अपनी भी ऐसे अचानक सेल्फी लें। कई बार अचानक ली गई तस्वीरों में आपके भाव बेहद गहराई लिए होते हैं। इसे लोग तो पसंद करेंगे ही, आप भी कुछ समय बाद देखेंगे तो आपको पसंद आएगी।  
*  अगर आपको लगता है कि आपका चेहरा सेल्फी में मोटा या बदसूरत लगता है, तो आप कैमरे को सामने रखने की अपेक्षा  साइड से रखकर, दाईं या बाईं ओर से फोटो खींचें। इससे आपका चेहरा मोटा नहीं लगेगा और फोटो भी साफ  दिखाई देगी।  
सेल्फी को और भी अधिक प्रभावी बनाने के लिए आप इसे काले सफेद या अन्य रंगों में बदल सकते हैं।  इसके लिए फोन में विकल्प मौजूद होते हैं। आप चाहें तो पूरी तस्वीर को काला-सफेद कर, केवल आँखों और होंठों को रंगने वाला विकल्प आजमा सकते हैं। यह प्रभाव बेहतरीन होगा। 
 


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Saturday, 8 April 2017

Amulya Khabar

दो साल बाद यह पिता अपनी बेटी के लिए नई ड्रेस खरीद पाया, पढ़ें भावुक कर देने वाली यह पोस्ट






दो साल बाद यह पिता अपनी बेटी के लिए नई ड्रेस खरीद पाया, पढ़ें भावुक कर देने वाली यह पोस्ट
Posted on 09.04.2017 By: Deep Singh Yadav

माता-पिता अपने बच्चों की जरूरतों को पूरा करने के लिए किस हद तक जा सकते हैं, इस बारे में जितना कहा जाए उतना कम है. ऐसी ही एक कहानी फेसबुक पर बार बार शेयर की जा रही है जिसमें एक पिता और बेटी के रिश्ते को खूबसूरती से दिखाया गया है. पत्रकार जीएमबी आकाश ने एक पिता के अपने बच्चों के प्रति प्यार की भावना को साझा करती हुई एक पोस्ट लिखी है. यह कहानी बांग्लादेश के रहने वाले एमडी कवसर हुसैन की है जो आखिर दो साल बाद अपनी बेटी के लिए नई ड्रेस खरीद पाए. 5 अप्रैल को शेयर की गई स पोस्ट को 11 हजार से ज्यादा बार शेयर किया जा चुका है.
पोस्ट में हुसैन के अपनी बेटी के लिए ड्रेस खरीदने के अनुभव के बारे में बात की गई है. लिखा गया है - जब मैंने दुकानदार को पांच टका नोट के 60 हिस्से थमाए तो वह मुझे भिखारी समझकर चिल्लाया. मेरी बेटी ने मेरा हाथ पकड़ा और रोते हुए कहने लगी कि उसे यह ड्रेस नहीं खरीदनी. मैंने एक हाथ से उसके आंसू पोंछे. हां मैं भिखारी हूं.'

हुसैन ने बताया कि किस तरह उन्होंने अपना एक हाथ गंवा दिया. पोस्ट में लिखा गया है - 'दस साल पहले मैंने सपने में भी नहीं सोचा था कि मुझे भीख मांगनी पड़ेगी.' हुसैन की बेटी सुमैया अपने हाथों से उन्हें खाना खिलाती थी और कहती थी कि वह जानती है कि एक हाथ से काम करना कितना मुश्किल है. पोस्ट में लिखा गया है 'जब मैं अपना हाथ आगे बढ़ाता हूं और वह मुझे देखती है तो मुझे शर्म आती है. लेकिन वह कभी मुझे अकेला नहीं छोड़ती.'

मुश्किल हालातों के बावजूद हुसैन ने अपने बच्चों को पढ़ने लिखने से पीछे नहीं रखा और आखिरकार वह दिन आया जब दो साल बाद वह अपनी बेटी के लिए नया ड्रेस खरीद पाए. लिखा गया है 'दो साल बाद मेरी बेटी ने नया ड्रेस पहना है और इसलिए मैं उसे यहां खिलाने के लिए लाया हूं. आज यह पिता भिखारी नहीं है, राजा है और यह रही उसकी राजकुमारी.'
source:ndtvindia


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Monday, 9 January 2017

Amulya Khabar

Ancient Indian Traditions in Hindi >> प्राचीन भारतीय परम्परायें






Ancient Indian Traditions in Hindi...प्राचीन भारतीय परम्परायें...

Posted On 09.01.2017 By: Deep Singh Yadav

समय के साथ सब कुछ बदलता रहता है लेकिन उनमें से कुछ बदलाव लाभदायक होते हैं और कुछ नुकसानदायक। जैसे परंपरागत खेती को छोड़कर आधुनिक खेती को अपनाया जा रहा है। जैसे परंपरागत जलस्रोतों को छोड़कर आरो का जल पीया जा रहा है। पूर्वजों के अनुभव से प्राप्त परंपराएं और ज्ञान को संरक्षित करने के  महत्व को शायद ही कभी कोई समझता होगा। हालांकि जब यह ज्ञान या परंपरा खो जाती है, तो इसका नुकसान भी उठाना पड़ता है। परंपरागत ज्ञान ही है विज्ञान।  भारत में ऐसी बहुत सारी परंपराएं और ज्ञान प्रचलन में था, जो अब लुप्त हो गया है या जो अब प्रचलन से बाहर है। परंपरागत ज्ञान या परंपरा का महत्व ही कुछ और था। ये  परंपराएं व्यक्ति को हर तरह की बाधाओं से मुक्त रखने के लिए होती थीं, लेकिन अब ये प्रचलन में लगभग बाहर हो चली हैं। आइए जानते हैं कि  कौन-सी परंपराएं थी, जो अब चलन में नहीं हैं.....
      
* नीम की दातौन करना : अब यह कुछ गाँवों में ही प्रचलित है कि नीम की छाल या डंडी तोड़कर उससे दांत साफ किए जाएं। कभी-कभी 4 बूंद सरसों के तेल में नमक मिलाकर भी दांत साफ किए जाते थे। वैज्ञानिक कहते हैं कि दांतों और मसूड़ों के मजबूत बने रहने से आपकी आंखें , कान और मस्तिष्क भी सही रहते हैं। 

* काला सुरमा लगाना : सुरमा दो तरह का होता है- एक सफेद और दूसरा काला। काले सुरमे का काजल बनता है।  दोनों ही तरह के सुरमा मूल रूप से पत्थर के रूप  पाए जाते हैं। इसका रत्न भी बनता है और इसी से काजल भी बनता है।   सुरमा लगाने से जहां आँखों के  रोग दूर हो जाते हैं, और  कुछ लोग इसका प्रयोग वशीकरण में भी करते हैं। इसका रत्न धारण करने के भी कई चमत्कारिक लाभ होते हैं। 


* गुड़-चने और सत्तू का सेवन : प्राचीनकाल में लोग जब तीर्थ, भ्रमण या अन्य कहीं दूसरे गाँव में जाते थे तो साथ में गुड़, चना या सत्तू साथ में रखकर ले जाते थे। घर में भी अक्सर लोग इसका सेवन करते थे। यह सेहत को बनाए रखने में लाभदायक होता है। हालांकि आजकल लोग इसका कम ही सेवन करते हैं। सत्तू पाचन में हल्का होता है तथा शरीर को छरहरा बना देता है। जल के साथ घोलकर पीने से बलदायक मल को प्रवृत्त करने वाले, रुचिकारक , श्रम, भूख एवं प्यास को नष्ट करने वाले होते हैं।  कई बार कब्ज की समस्या को दूर करने के लिए लोग गुड़ और चने खाना पसंद करते हैं, लेकिन इसके अलावा गुड़ और चना एनीमिया रोग दूर करने में काफी मददगार साबित होता है। कहते हैं कि 'जो खाए चना, वह रहे बना'। गुड़ और चना न केवल आपको एनीमिया से बचाने का काम करते हैं, बल्कि आपके शरीर में आवश्यक ऊर्जा की पूर्ति भी करते हैं।

* तुलसी और पंचामृत का सेवन : प्रतिदिन तुलसी और पंचामृत का सेवन करना चाहिए इसीलिए प्राचीनकालीन घरों के आंगन में तुलसी का पौधा होता था। हालांकि आज भी कई लोगों के घरों में यह मिल जाएगा लेकिन लोग इसका कम ही सेवन करते हैं। वे तुलसी को भगवान को चढ़ा देते हैं जबकि इसके पत्ते को ताँबे के लोटे में डालकर रखें और कुछ घंटों बाद उस जल को पीकर तुलसी के पत्ते को खा लेना चाहिए। ऐसा करने से जीवन में कभी भी कैंसर नहीं होगा और न ही किसी भी प्रकार का अन्य रोग।  तुलसी का पौधा एक एंटीबायोटिक मेडिसिन होता है। इसके सेवन से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता में बढ़ोतरी होती है, बीमारियां दूर भागती हैं । इसके अलावा तुलसी का पौधा अगर  घर में हो तो मच्छर, मक्खी, सांप आदि के आने का खतरा नहीं होता। 

* दोनों हाथ जोड़कर अभिवादन करना : आजकल दोनों हाथ जोड़कर 'नमस्ते' कहने का प्रचलन नहीं रहा। लोग एक-दूसरे से हाथ मिलाते हैं। वैज्ञानिक दृष्टि से देखें, तो 'नमस्ते' मुद्रा में हमारी अंगुलियों के शिरों बिंदुओं का मिलान होता है। यहां पर आंख, कान और मस्तिष्क के प्रेशर प्वॉइंट्स होते हैं।  दोनों हाथ जोड़ने के क्रम में इन बिंदुओं पर दबाव पड़ता है। इससे संवेदी चक्र प्रभावित होते हैं जिसकी वजह से हम उस व्यक्ति को अधिक समय तक याद रख पाते हैं। साथ ही, किसी तरह का शारीरिक संपर्क  न होने से कीटाणुओं के संक्रमण का खतरा भी नहीं रहता। दूसरी ओर ऐसा करने से हमारे मन में उस व्यक्ति के प्रति तो अच्छे भाव आते ही हैं, उसके मन में भी हमारे लिए आदर उत्पन्न होता है।
 
* पीपल में जल डालना : पीपल का पेड़ सबसे ज्यादा ऑक्सीजन का उत्पादन करता है। जहाँ अन्य पेड़-पौधे रात के समय में कार्बन डाई ऑक्साइड गैस का उत्सर्जन करते हैं, वहीं पीपल का पेड़ रात में भी अधिक मात्रा में ऑक्सीजन मुक्त करता है। इसी वजह से बड़े-बुजुर्गों ने इसके संरक्षण पर विशेष बल दिया है। पुराने जमाने में लोग रात के समय पीपल के पेड़ के नजदीक जाने से मना करते थे। उनके अनुसार पीपल में बुरी आत्माओं का वास होता है, जबकि सच तो यह है कि ऑक्सीजन की अधिकता के कारण मनुष्य को दम घुटने का अहसास  होता है। जिस घर के पास पीपल का वृक्ष होता है, वहां के लोग निरोगी रहते हैं। 

* महत्वपूर्ण व्रत : हालांकि अब यह परंपरा महिलाओं तक ही सीमित रह गई है। एकादशी, प्रदोष, चतुर्थी, पूर्णिमा और अमावस्या का व्रत रखना क्यों महत्वपूर्ण है? इसका उल्लेख पुराणों में मिलता है।  ये चन्द्र से संबंधित व्रत हैं। इन विशेष दिनों में व्यक्ति के शरीर और मन में बदलाव होते हैं।  यदि इन दिनों में व्यक्ति सिर्फ फलाहार ही करे, तो निश्चित ही वह सभी तरह की बाधाओं से मुक्त होकर सुखी जीवन-यापन कर सकता है।

* परंपरागत पोशाक : आजकल कोई परंपरागत पोशाक नहीं पहनता। पहले के लोग ढीले-ढाले वस्त्र पहनते थे, जैसे कुर्ता-पायजामा, धोती-कुर्ता, पगड़ी, साफा या टोपी, खड़ाऊ, सूती या खादी के कपड़े आदि।  परंपरागत पोशाक : आजकल कोई परंपरागत पोशाक नहीं पहनता। पहले के लोग ढीले-ढाले वस्त्र पहनते थे, जैसे कुर्ता-पायजामा, धोती-कुर्ता, पगड़ी, साफा या टोपी, खड़ाऊ, सूती या खादी के कपड़े आदि।  कुछ कपड़े तो ऐसे होते हैं जिसे पहनकर न तो आप ठीक से बैठ सकते हैं और न ही सो सकते हैं। खड़े भी कपड़ों के अनुसार ही रहना होता है। जो वस्त्र आपके तन को सुख दे या तन को अच्छा लगे, वही खास होता है। दूसरी बात, वस्त्र मौसम के अनुकूल भी होना चाहिए। प्राचीन लोगों ने सोच-समझकर ही वस्त्रों का निर्माण किया था।

  * लोक नृत्य-गान, लोकभाषा, लोक इतिहास और लोक व्यंजन : भारतीय समाज के लोकनृत्य, गान, भाषा और व्यंजन में कई राज छुपे हुए हैं। इनका संरक्षण किए जाने की जरूरत है। आप जिस भी क्षेत्र में रहते हैं वहां की भाषा से प्रेम करें। वहां की भाषा के मुहावरे, लोकोक्ति, लोकनृत्य, लोक-परंपरा, ज्ञान, व्यंजन आदि के बारे में ज्यादा से ज्यादा ज्ञान हासिल करें। वक्त के साथ यह सभी खत्म हो रहा है। उदाहरण के लिए मालवा से मालवी और कश्मीर से कश्मीरियत खत्म होती जा रही है।   क्या आप सोच सकते हैं कि यदि कश्मीरियत होती तो वहां कितनी शांति, सुख और सुगंध होती। सचमुच ही कश्मीर के लोगों में अब कश्मीरियत नहीं बची। जो क्षेत्र अपनी लोक-परंपरा और भाषा को खो देता है, देर-सबेर उसका भी अस्तित्व समाप्त हो जाता है। वहां एक ऐसा स्वघाती समाज होता है, जो अपनी पीढ़ियों को बर्बादी के रास्ते पर    धकेलता रहता है। यदि ऐसा नहीं होता तो आधुनिकता के नाम पर अपनी लोक-परंपरा खो रहे लोग भी एक दिन यह देखते हैं कि हमारे क्षेत्र में हम अब गिनती के ही रहे हैं।
  
 * परंपरागत नुस्खे : पहले के लोगों को इसका बहुत ज्ञान होता था लेकिन वर्तमान पीढ़ी यह ज्ञान प्राप्त नहीं करती, क्योंकि अब उनकी दादी और नानी या दादा और नाना भी वैसे   नहीं रहे, जो अपने अनुभव और ज्ञान को अपनी पीढ़ियों में हस्तांतरित करें। गाय के दूध में हींग या मैथी मिलाकर पीने से कब्ज की शिकायत दूर हो जाती है। जन्म घुट्टी पिलाने से बच्चा स्वस्थ हो जाता है। 

 उपरोक्त के अलावा भी सैंकड़ों ऐसी परंपरागत बातें हैं जिन्हें अपनाकर आप अपना जीवन बदल सकते हैं। जैसे चुल्हें की बनी रोटी खाना, पीतल के बर्तन में  भोजन और तांबे के ग्लास में पानी पीना। पानी भी मटके का पीना, ऐसे बिस्तर पर सोना जो परंपरागत हो। लकड़ी का पलंग या खाट, जल्दी सोना और जल्दी उठान। उत्तर, ईशान या पश्चिम मुखी मकान में ही रहना। प्रतिदिन प्रात: काल भ्रमण करना आदि। हालांकि कोल्ड्रिंक और कोक के जमाने में कोई मोसंबी और नींबू का रस   क्यों पीना चाहेगा। आम का रस भी नकली मिलने लगा है।
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Monday, 2 January 2017

Amulya Khabar

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Share on 02.01.2017 By: Deep Singh Yadav

 दोस्तो, अगर आप SHARE MARKET या COMMODITY MARKET में काम करते हैं तो यह SOFTWARE आपके लिए लाभदायक हो सकता है।
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Monday, 26 December 2016

Amulya Khabar

1 जनवरी नहीं है साल का पहला दिन... जरूर पढ़ें यह आलेख

1 जनवरी नहीं है साल का पहला दिन... जरूर पढ़ें यह आलेख  
 Share On 26.12.2016 By: Deep Singh Yadav
न तो जनवरी साल का पहला मास है और न ही 1 जनवरी पहला दिन। जो आज तक जनवरी को पहला महीना मानते आए हैं, वे जरा इस बात पर विचार करें...! 

सितंबर, अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर क्रम से 7वां, 8वां, 9वां और 10वां महीना होना चाहिए जबकि ऐसा नहीं है। ये क्रम से 9वां, 10वां, 11वां और 12वां महीना है। हिन्दी में 7 को सप्त, 8 को अष्ट कहा जाता है। इससे september तथा October बना। नवंबर में तो सीधे-सीधे हिन्दी के 'नव' को ले लिया गया है तथा 10 अंग्रेजी में 'Dec' बन जाता है जिससे December बन गया। ऐसा इसलिए कि 1752 के पहले दिसंबर 10वां महीना ही हुआ  करता था। 

इसका एक प्रमाण और है। जरा विचार कीजिए कि 25 दिसंबर यानी क्रिसमस को X-mas क्यों कहा जाता है? इसका उत्तर यह है कि 'X' रोमन लिपि में 10 का प्रतीक है और mas यानी मास अर्थात महीना।   चूंकि दिसंबर 10वां महीना हुआ करता था इसलिए 25 दिसंबर 10वां महीना यानी X-mas से प्रचलित हो गया। इन सब बातों से यह निष्कर्ष निकलता है कि या तो अंग्रेज हमारे पंचांग के अनुसार ही चलते थे या तो उनका 12 के बजाय 10 महीना ही हुआ करता था। 

ल को 365 के बजाय 305 दिन का रखना तो बहुत बड़ी मूर्खता है तो ज्यादा संभावना इसी बात की है कि प्राचीनकाल में अंग्रेज भारतीयों के प्रभाव में थे। इस कारण वे सब कुछ भारतीयों जैसा ही करते थे और इंग्लैंड ही  क्या, पूरा विश्व ही भारतीयों के प्रभाव में था जिसका प्रमाण यह है कि नया साल भले ही वे 1 जनवरी को मना लें, पर उनका नया बही-खाता 1 अप्रैल से ही शुरू होता है।

लगभग पूरे विश्व में वित्त-वर्ष अप्रैल से लेकर मार्च तक होता है यानी मार्च में अंत और अप्रैल से शुरू। भारतीय अप्रैल में अपना नया साल मनाते थे तो क्या यह इस बात का प्रमाण नहीं है कि पूरे विश्व को   भारतीयों ने अपने अधीन रखा था? 

इसका अन्य प्रमाण देखिए कि अंग्रेज अपनी तारीख या दिन 12 बजे रात से बदल देते हैं। दिन की शुरुआत सूर्योदय से होती है तो 12 बजे रात से नया दिन का क्या तुक बनता है? तुक बनता है  कि    भारत में नया दिन सुबह से गिना जाता है। सूर्योदय से करीब दो-ढाई घंटे पहले के समय को ब्रह्म मुहूर्त की बेला कहा जाता है और यहां से नए दिन की शुरुआत होती है यानी कि करीब 5 से 5.30 के आस-पास। और इस समय इंग्लैंड में समय रात 12 बजे के आस-पास का होता है। चूंकि वे भारतीयों के प्रभाव में थे इसलिए वे अपना दिन भी भारतीयों के दिन से मिलाकर रखना चाहते थे इसलिए उन लोगों ने रात के 12 बजे से ही नया  दिन और तारीख बदलने का नियम अपना लिया। 

जरा सोचिए, वे लोग अब तक हमारे अधीन हैं, हमारा अनुसरण करते हैं और हम राजा होकर भी खुद अपने अनुचर का, अपने अनुसरणकर्ता का या सीधे-सीधे कहूं तो अपने दास का ही हम दास बनने को बेताब हैं?    कितनी बड़ी विडंबना है यह! मैं यह नहीं कहूंगा कि आप आज 31 दिसंबर को रात के 12 बजने का बेसब्री से इंतजार न करिए या 12 बजे नए साल की खुशी में दारू मत पीजिए या नॉनवेज मत खाइए। 
मैं तो बस यह कहूंगा कि देखिए खुद को आप, पहचानिए अपने आपको। हम भारतीय गुरु हैं, सम्राट हैं तथा किसी का अनुसरण नहीं करते हैं। अंग्रेजों का दिया हुआ नया साल हमें नहीं चाहिए। जब सारे त्याहोर हम भारतीय संस्कृति के रीति-रिवाजों के अनुसार ही मनाते हैं, तो नया साल क्यों नहीं? 
स्रोत- पं. प्रणयन एम. पाठक ( वेब दुनियाँ)

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Monday, 19 December 2016

Amulya Khabar

Prediction about INDIA and PAKISTAN >> चौंकाने वाली भविष्यवाणी, 2017 में नहीं रहेगा पाकिस्तान

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Prediction about INDIA and PAKISTAN...
 चौंकाने वाली भविष्यवाणी, 2017 में नहीं रहेगा पाकिस्तान ...

भारत की सरजमीं से निकला पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान आए दिन अपनी हरकतों से बाज नहीं आता है। भारत समेत दुनिया के अधिकांश देश उसे आतंकवाद को बढ़ावा देने वाला देश मान चुके हैं। आने वाले साल में सितारों की गणना के आधार पर कहा जा रहा है कि पाकिस्तान का इस दुनिया से नामोनिशान मिट जाएगा।
  पाक के नष्ट होने व उसके द्वारा महाविनाशकारी परमाणु अस्त्रों के प्रयोग की भविष्यवाणी मेदनी ज्योतिष द्वारा वर्ष 2012 में ही की जा चुकी है। तब केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी अत: इस भविष्यवाणी की बहुतआलोचना की गई थी किन्तु काल के प्रवाह मे आज यह भविष्यवाणी सत्य प्रतीत हो रही है।
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने परमाणु हथियारों के प्रयोग की धमकी देकर इस भविष्यवाणी की पुष्टि की है।
 
मेदनी ज्योतिष के सुदर्शन चक्र की ज्योतिषीय गणना के अनुसार भारत की कुण्डली का सुक्ष्म विश्लेषण किया गया है। उसके अनुसार स्वतंत्र भारत की जन्मकुंडली में कर्क राशिस्थ चन्द्र, सूर्य, बुध, शुक्र एक साथ आकर पाकिस्तान के मूलभाव से षड़ाष्टक योग बना रहे हैं।

स्वतंत्र भारत की जन्मकुंडली वृषभ लग्न की है। कुंडली के लग्न में ही राहू, द्वितीय धनभाव में मारकेश मंगल, तीसरे पराक्रम भाव में चन्द्र, सूर्य, बुध, शुक्र और शनि, छठे शत्रु भाव में बृहस्पति और सातवें भाव में केतु बैठे हैं। जिसके स्वामी स्वयं भगवान् सूर्य हैं, मेदिनी ज्योतिष में किसी भी राष्ट्र की जन्मकुंडली का लग्न, द्वितीय, चतुर्थ, छठा और नवम् भाव अति महत्वपूर्ण होता है।

लग्न से उस देश की प्रगति, शासन की पारदर्शिता, सत्ता की ईमानदारी, द्वीतीय भाव से धन, पड़ोसी राष्ट्रों से संबंध, चतुर्थ भाव से देश की जनता की मानसिक स्थिति और छठे भाव से ऋण, रोग और शत्रु के बारे में  जाना जाता है। 

वर्तमान समय में भारत की कुंडली में अनंत कालसर्प योग बन रहा है तथा राहु की महादशा 06 जुलाई 2011 से चल रही है। उसमें भी अगस्त 2016 से शनि की अंतर्दशा आरंभ हो चुकी है। इन सभी योगों के परिणामस्वरूप 15  अगस्त 2016 के बाद देश के प्रधानमंत्री पाकिस्तान के संदर्भ में कठोर कदम उठाएंगे।  नतीजतन सर्जिकल स्ट्राइक हमारे सामने हैं। 26 जनवरी 2017 से शनि धनु राशि में जा रहे हैं जो दशम, दुतीय तथा पंचम भाव को पूर्ण दृष्टि से देखेंगे। शनि भारत की जन्मकुंडली में अकेले ही राजयोग कारक हैं अतः आने वाला वर्ष 2017 भारत की एकता अखंडता एवं संप्रभुता के लिए गौरवपूर्ण तथा वरदानदायक होगा। 
ज्योतिष के अनुसार पाकिस्तान का निर्माण दिनांक 14-08 -1947 समय सुबह 9.30 बजे स्थान कराची में हुआ था। जिसमें भाग्य स्थान से पूर्ण कालसर्प योग है। इस के आधार पर पाकिस्तान की कुंडली कन्या लग्न तथा मिथुन राशि की बनती है। लग्न कुंडली के अनुसार नौवें घर में बैठा हुआ राहु पाकिस्तान की मानवता विरोधी ताकत तथा हिंसात्मक रवैये को दर्शाता है।

दसवें घर में अष्टमेश मंगल की चन्द्र के साथ युति पाक सरकार की शांति विरोधी नीति व भारत के प्रति प्रतिशोध तथा कानून व्यवस्था को प्रकट करती है। लग्नेश बुध का सूर्य और शुक्र के साथ एकादश भाव में युति बनाना मानव विरोधी ताकत के प्रति शक्ति का प्रयोग तथा उसमें अन्य राष्ट्रों का सहयोग भी दर्शाता है।
भारत एवम् पाक की प्रचलित नाम राशि क्रमश: धनु एवम् कन्या है। धनु एवम् कन्या राशि के स्वामी क्रमश: देव गुरु-बृहस्पति एवम् बुध है। बुध एवम् बृहस्पति में परस्पर शत्रुता है। देवगुरु बृहस्पति क्षमावान,  ज्ञानवान, अहिंसावादी एवम् सात्विक ग्रह है, जबकि इसके विपरीत बुध बेहद चालाक-अवसरवादी-बेईमान एवम् समयानुसार बदलाव की प्रकृति के मालिक है।

ग्रहों की स्थिति यह भी स्पष्ट करती है कि पाकिस्तान के कुटिल सैन्य तंत्र के कारण आतंकवादी तत्व पाकिस्तान से महाविनाशकारी परमाणु अस्त्रों को प्राप्त कर सकते हैं, जिससे भारत के गुजरात प्रांत में अहमदाबाद एवम् राजकोट क्षेत्र विशेष प्रभावित होंगे। पाकिस्तान आयोजित आतंकवादी आक्रमण के कारण भारत-पाक संबंधों में तनाव चरम सीमा पर होगा। भारत-पाकिस्तान व्यापार संधि समाप्त होगी। यह घटना 2017 में हो सकती है इस भारत-पाक युद्ध में पाक को चीन का पूर्ण सहयोग होगा।

2017 में भारत- पाक युद्ध की आशंका है किन्तु बाद में अंतर्राष्ट्रीय दबाव के चलते चीन पीछे हटेगा और पाकिस्तान तीन खंड में बंट जाएगा और इस युद्ध में पाकिस्तान परमाणु हथियारों का प्रयोग करेगा।

ज्योतिष गणना बताती है कि उक्त परमाणु हथियार के प्रयोग से इस युद्ध में लगभग 8,000 व्यक्तियों की मृत्यु हो सकती है और लगभग 35,000 व्यक्ति इस हमले से सीधा प्रभावित होंगे।
भारत की जन्मकुंडली के द्वितीय भाव में मारकेश मंगल बैठा है तथा कुंंडली  में अनंत नामक कालसर्प योग बना हुआ है जो स्वत: भंग होकर काल अमृत योग में परिवर्तित हो जा रहा है। लेकिन देश को खतरा उन गद्दारों से होगा जो भारत में ही रह कर आतंकवाद, जातिवाद, सम्प्रदायवाद और साम्यवाद जैसे संगीन अपराधों को जन्म देते हैं यही लोग इस युद्ध में अप्रत्यक्ष रूप से पाकिस्तान की मदद करेंगे। ख़ुशी की बात यह है कि भगवान सूर्य और शनि ने अकेले ही राजयोग बनाया है इसलिए भारत देश की विजय सुनिश्चित है।
साभार‍‍- योगेश मिश्र (वेब दुनिया)
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Sunday, 18 December 2016

Amulya Khabar

About New Army Chief Bipin Rawat >> नए आर्मी चीफ बिपिन रावत से जुड़ी कुछ बातें

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About New Army Chief Bipin Rawat/ नए आर्मी चीफ बिपिन रावत से जुड़ी कुछ बातें... 
Posted On 19.12.2016 By: Deep Singh Yadav 

सरकार ने उप थल सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल बिपिन रावत को देश का नया थल सेना प्रमुख नियुक्त किया है। बिपिन रावत की नियुक्ति उनके दो वरिष्ठ अधिकारियों से आगे बढ़ाते हुए की गई है। वहीं, एयर मार्शल बी.एस. धनोआ चीफ ऑफ एयर स्टाफ होंगे। वे मौजूदा एयर चीफ मार्शल अरूप राहा की जगह लेंगे। वर्तमान सेनाध्यक्ष दलबीर सिंह सुहाग और वायु सेनाध्यक्ष अरुप राहा दोनों 31 दिसंबर को सेवानिवृत्त हो रहे हैं।

1. बिपिन रावत ने भारतीय सेना दिसंबर 1978 में ज्वॉइन की थी। 1978 में इंडियन मिलिट्री एकेडमी देहरादून से ग्रेजुएशन किया इस दौरान उन्होंने वहां स्वोर्ड ऑफ ऑनर हासिल किया। इसके बाद वे गोरखा राइफल्स की पांचवीं बटालियन में कमीशन हुए। 


2.  लेफ्टिनेंट जनरल बिपिन रावत के पिता भी सेना में लेफ्टिनेंट जनरल थे। लेफ्टिनेंट जनरल रावत की पढ़ाई- लिखाई शिमला के सेंट एडवर्ड स्कूल में हुई। 


3.वे गोरखा बटालियन से सेना प्रमुख बनने वाले लगातार दुसरे अफसर हैं। वतर्मान सेना प्रमुख दलबीर सिहं सुहाग भी गोरखा राइफल्स से हैं।


4.  वाइस चीफ नियुक्त किए जाने से पहले रावत को पुणे स्थित दक्षिणी कमान का कमांडिंग ऑफिसर बनाया गया था। मिलिट्री ऑपरेशंस डायरेक्टोरेट में वे जनरल स्टाफ ऑफिसर ग्रेड 2 रहे।


5. लेफ्टिनेंट जनरल बिपिन रावत को ऊंची चोटियों की लड़ाई में महारत हासिल है। वे कश्मीर घाटी के मामलों पर अच्छी पकड़ रखते हैं। लेफ्टिनेंट जनरल रावत को काउंटर इंसर्जेंसी का विशेषज्ञ माना जाता है। कश्मीर घाटी में राष्ट्रीय राइफल्स और इंफैंट्री डिवीजन के वे कमांडिंग ऑफिसर रह चुके हैं। 


6. लेफ्टिनेंट जनरल बिपिन रावत एक हेलीकॉप्टर दुर्घटना में चमत्कारिक रुप से बच गए थे जब वे दीमापुर स्थित सेना मुख्यालय कोर 3 के कमांडर थे।


7. लेफ्टिनेंट जनरल बिपिन रावत 2008 में कांगों में यूएन के शांति मिशन को कमान संभाल चुके हैं। इस दौरान उनके द्वारा किए गए काम काफी सराहनीय रहे। यूनाइटेड नेशंस के साथ काम करते हुए भी उनको दो बार फोर्स कमांडर कमेंडेशन का अवार्ड दिया गया।


8. लेफ्टिनेंट जनरल बिपिन रावत ने मिलिट्री मीडिया स्ट्रेटजी स्टडीज में रिसर्च की जिसके लिए 2011 में चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी ने उनको पीएचडी की उपाधि दी।
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Saturday, 17 December 2016

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Film Release in 2017 >> 2017 में रिलीज होने वाली बड़ी फिल्में



Film Release in 2017...2017 में रिलीज होने वाली बड़ी फिल्में...
 Posted On 18.12.2016 By: Deep Singh Yadav
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Tuesday, 13 December 2016

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जेब में रखें इस हैलमेट को...


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 जेब में रखें इस हैलमेट को...

Posted On 13.12.2016 By: Deep Singh Yadav

 अपने सिर को बचाने के लिए लोग अच्छे से अच्छा हैलमेट पहनते हैं।

हैलमेट की देखरेख के लिए या तो उसे मोटर साईकिल , स्कूटर पर लटकाना पड़ता है या अपने साथ ले जाना पड़ता है।लेकिन अब हमें इस समस्या से छुटकारा मिल सकता है।

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स्पेन की एक कम्पनी ने ऐसा हैलमेट बनाया है जिसे हम फोल्ड करके पेंट की जेब में रख सकते हैं। इस कम्पनी का नाम है क्लोस्का। बाइक चलाते समय इस हैलमेट को पहन लीजिए और जब जरुरत न हो तो फोल्ड करके जेब में रख लिजिए।


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फोल्ड करने पर इसका आकार सी. डी. जैसा हो जाता है। कम्पनी ने इस हैलमेट का नाम "फुगा" रखा है। फुगा नामक हैलमेट तीन टुकड़ों में बना हुआ है। हैलमेट के सबसे ऊपरी हिस्से को जोर से दबाने पर यह फोल्ड हो जाता है।

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इस समय हैलमेट की कीमत भारतीय रुपये में ६३००.०० रु० है।











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Monday, 5 December 2016

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Nostradamus predictions about india in Hindi >> भारत के बारे में नास्त्रेदमस की भविष्यवाणियाँ

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Nostradamus predictions about india in Hindi... भारत के बारे में नास्त्रेदमस की भविष्यवाणियाँ
Posted On 06.12.2016 By: Deep Singh Yadav
 
नास्त्रेदमस फ्रांस के 16 वीं सदी के महान भविष्यवक्ता थे। नास्त्रेदमस भविष्यवक्ता होने के साथ साथ एक डॉक्टर और शिक्षक भी थे। वो प्लेग जैसी बीमारियों का इलाज करते थे। भविष्य की बातों की घोषणा हजारों साल पहले करने वाले नास्त्रेदमस का जन्म 14 दिसम्बर 1503 को फ्रांस के एक छोटे से गाँव सेंट रेमी में हुआ था। उन्होंने अपनी किताब में 950 भविष्यवाणियों का वर्णन किया है। उनके द्वारा की गईं अधिकतर भविष्यवाणियाँ कोड और कविताओं मे छिपी होती थीं। उनके द्वारा की गई भविष्यवाणियाँ सही साबित हुई़। दोस्तो आज मैं इस लेख में आपको नास्त्रेदमस द्वारा भारत के संबंध में की गई भविष्यवाणियों के बारे में बताऊँगा जो कि निम्नलिखित हैं.....



1. श्रीमती इंदिरा गाँधी की मृत्यु....."निष्कासित स्त्री पुनः सत्तारुढ़ होगी। उसके दुश्मन उसके विरुद्ध षड़यंत्र रचेंगे। तीन वर्षों के अपने यादगार कार्यकाल के बाद 70 की आयु के लगभग उसकी मृत्यु होगी।"


सन् 1977 के आम चुनाव में इंदिरा गाँधी की पराजय हुई थी एंव जनता पार्टी की सरकार बनी थी। 1980 में सत्ता में इंदिरा जी की पुनः वापिसी हुई और वे प्रधानमंत्री बनी। जब  हत्या हुई यब उनकी उम्र 67 वर्ष की थी।

2. राजीव गाँधी की मृत्यु का संकेत.....     एक उत्तम वायु चालक अपना पेशा छोड़कर देश के सर्वोच्च पद पर आसीन हो जायेगा। सात वर्षों तक ख्यति अर्जित करने के बाद ऐसा अंत होगा जो रोंगटे खड़े कर देगा। एक बर्बर सेना का कृत्य वेनिस को आतंकित कर देगा। कोयले से काली महिला अचानक गायब हो जायेगी।
1984 में इंदिरा गाँधी की हत्या के बाद राजीव गाँधी राजनीति में आए और कांग्रेस के नेता बने। पचण्ड बहुमत से चुनाव जीतकर भारत के प्रधानमंत्री बने। 7 वर्ष के बाद 1991 में उनकी हत्या कर दी गई़। हत्या करने वाली महिला कोयले से भी काली थी। उसके उस कृत्य से वेनिस इटली आतंकित हो गई। सोनिया गाँधी इटली से ही हैं।

3. बाढ़ के बाद आयेगा ऐसा साल जब दो मुखिया चुने जायेंगे। इनमें से पहला सत्ता छोड़ देगा वह कलंक से वचने को ऐसा करेगा। परंतु दूसरे के सामने ओर कोई चारा नहीं होगा। पहले मुखिया को बनाने वाला घर भंग हो जायेगा।

इस भविष्यवाणी को विश्वनाथ प्रताप सिंह और चन्द्रशेखर के कार्यकाल से जोड़कर देखा जाता है। चन्द्रशेखर और देवीलाल सत्ता में आए, चन्द्रशेखर ने दबावों के चलते इस्तीफा देकर कलंक से बचने का काम किया। चौधरी देवीलाल उनका साथ न देते तो क्या करते। लोकसभा भंग हो और मध्यावधि चुनाव की घोषणा हुई। चन्द्रशेखर का कार्यकाल प्रधानमंत्री के रुप में 7 महीने का ही रहा। उन्होंने जनता दल के कुछ नेताओं को साथ लेकर समाजवादी जनता पार्टी की स्थापना की।
 यदि बाढ़ की बात की जाए तो हाल ही में कश्मीर और केदारनाथ में बाढ़ आई। उसके बाद देश के हालात बदले। नई सरकार में नरेन्द्र मोदी के समझ चुनौतियाँ बढ़ीं। पहले मुखिया को बनाने वाला घर भंग हो जायेगा ,ऐसी परिस्थितियाँ नहीं हैं। इसलिए यह भविष्यवाणी चन्द्रशेखर पर ही फिट बैठती है।

  4. एक दूसरे से अजनबी साम्राज्य के खिलाफ बगात करेंगे। एक ऊँचे सपने और आजादी के लिए सब कुछ दाव पर लगा देगा। एक किला आजाद करा लिया जायेगा और हुकूमत देखती रह जायेगी। भारी मारकाट से वह बौखला जायेंगे। एक नेता अपने देश से दूर किसी पनडुब्बी में छिपकर जायेगा और अलग भाषा व संस्कारों वाले लोगों की मदद से अपने देश के हजारों लोगों को रास्ता दिखायेगा। वह एक युद्ध में भाग लेगा,जिसमें बहुत से मारे जायेंगे।

इस भविष्यवाणी का पहला हिस्सा 1857 के स्वतंन्त्रता संग्राम से है, दूसरा हिस्सा व्याख्याकार के अनुसार नेता जी सुभाष चन्द्र बोस से जोड़कर देखते हैं। सुभाष चन्द्र बोस ने ही अपने देश से दूर दूसरे देश जापान और जर्मन में जाकर वहाँ के शासकों की मदद से भारत को अजाद कराने का सपना देखा था। बोस ने अपनी फौज भी बनाई थी और एक युद्ध में भी भाग लिया था। जापानी सैनिकों के साथ उनकी आजाद हिंद फौज रंगून से होती हुई थल मार्ग से 18 मार्च 1944 को कोहिमा और इम्फाल के भारतीय मैदानों में पहुँच गई थी। जापानी वायु सेना से सहायता न मिलने के कारण भारतीयों और जापानियों की मिली जुली सेना हार गई थी।

5. एक समय ऐसा आयेगा जब बेपढ़े लोग पढ़े लिखों की सभ्यता को तबाह कर देंगे और पुस्तकें बगैरह फूंक डालेंगे। ऐसा दुर्लभ ज्ञान नष्ट कर दिया जायेगा जिसका अधिकांश भाग वापस नहीं पाया जा सकेगा।

बर्बर आक्रमणकारियों के हमले में भारत के नालंदा, तक्षशिला और विक्रमशिला के विश्वविद्यालय नष्ट हो गये थे। हजारों मंदिरों और महलों को नष्ट कर दिया गया था। 

6. तीन ओर से घिरे समुद्र क्षेत्र में वह जन्म लेगा, जो वृस्हपतिवार को अपना अवकाश घोषित करेगा।  उसकी प्रसंशा और प्रसिद्ध एंव सत्ता और शक्ति बढ़ती जायेगी और भूमि व समुद्र में उस जैसा शक्तिशाली कोई न होगा।

तीन ओर समुद्र से भारत ही घिरा हुआ है। भारत में गुरुवार एक ऐसा वार है जिसे सभी धर्मों के लोग मानते हैं। भारत में पहले भी राम, कृष्ण, बुद्ध, महावीर, चाणक्य आदि महापुरुषों का जन्म हो चुका था। अभी इस भविष्यवाणी के पूरा होने का इंतजार है। कौन वृस्हपतिवार को अवकाश दिवस घोषित करेगा?

7. पाँच नदियों के प्रख्यात द्वीप राष्ट्र में एक महान राजनेता का उदय होगा। इस राजनेता का नाम वरण या शरण होगा। वह एक शत्रु के उन्माद को हवा के जरिये समाप्त करेगा और उस कार्यवाही में छः लोग मारे जायेंगे।

पंजाब ऐसा क्षेत्र है जिसे पाँच नदियों की भूमि कहा जाता है। पंजाब अर्थात जहाँ पाँच नदियाँ बहती हों। इसे पंचनद प्रदेश भी कहा जाता था। यह शुरु से ही राजनीति का केन्द्र रहा है। सतलुज, व्यास, रावी, चिनाब और झेलम ये पाँच नदियाँ है। इन नदियों का वर्णन धार्मिक ग्रन्थों मे भी मिलता है। क्या महान राजनेता पंजाब से होगा?

8. सागरों के नाम वाला धर्म चाँद पर निर्भर रहने वालों के मुकाबले तेजी से पनपेगा और उसे भयभीत कर देंगे, "ए" तथा "ए" से घायल दो लोग।

चाँद पर आधारित एक ही धर्म है इस्लाम और दुनियाँ में जितने भी सागर हैं उनमें से सिर्फ हिंद महासागर के नाम पर ही एक धर्म "हिंदू धर्म" हैं। आगे के वाक्य की व्याख्या करना कठिन है। नास्त्रेदमस ने अपनी और भी भविष्यवाणियों में हिंदू धर्म के उत्थान की बात कही है।

9. नूरबरजेन के अनुसार तृतीय विश्वयुद्ध दक्षिण-पश्चिम एशिया में जब पश्चिमी देशों की संयुक्त सेना अभियान शुरू करेगी तो मध्यपूर्वी सैनिक उपनिवेशों के पास गंगा नदी के मुहाने पर और खाड़ी के आसपास संघर्ष होगा। हो सकता है कि पाकिस्तान और चीन मिलकर भारत की सीमा में घुसपैठ कर गंगा नदी के मुहाने तक पहुँच जायें।

तृतीय विश्व युद्ध के संदर्भ में नास्त्रेदमस लिखते हैं, 'अनीश्वरवादी और ईश्वरवादियों के बीच संघर्ष होगा।'  चीन का धर्म और वहाँ की सरकार अनीश्वरवादी ही है।  हाल ही में चीन द्वारा पाकिस्तान, श्रीलंका, बांग्लादेश, नेपाल से घनिष्ठता बढ़ाकर भारत की घेराबंदी करना इस बात की सूचना है कि चीन के इरादे नेक नहीं है। 

अंतिम जंग गंगा (ganges) के किनारे होगी।''गंगेज नाम से फ्रांस का एक कस्बा भी है लेकिन 'किनारे' शब्द का इस्तेमाल तो किसी नदी के लिए ही होता है। इसीलिए व्याख्याकार इसे भारत के संदर्भ में लिखी गई भविष्यवाणी मानते हैं। ''भारत, फ्रांस, जोर्डन आजाद कराएं जाएंगे। निर्दयी शक्तियों का सुदूर पूर्व में विनाश होगा। गंगा, जोर्डन, फ्रांस और स्पेन को हड़पने वाला साम्राज्य खत्म हो जाएगा। समुद्र में खून और लाशें तैरती दिखेंगी।'' 

यहां सवाल यह है कि भारत जैसे समर्थ देश के तृतीय विश्वयुद्ध में कमजोर होने की संभावना किस तरह है? इसके दो कारण हो सकते हैं- पहला राजनीतिक नेतृत्व की कमजोरी और दूसरा आंतरिक कारण और आपसी फूट में उलझे  रहने वाले कारणों में उलझे रहने वाले भारत का अपनी सीमा की ओर कभी ध्यान नहीं दे पाना। 
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