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Friday, 16 June 2017

Amulya Khabar

Motivational Story in Hindi...आप खुद बदल सकते है अपना भाग्य...






 Motivational Story in Hindi...आप खुद बदल सकते है अपना भाग्य...
Posted on 17.06.2017 By: Deep Singh Yadav

जब कभी भाग्य की बात आती है तो हर व्यक्ति यही सोचता है कि जो होना है वह तो होकर ही रहेगा। फिर आप कितनी भी मेहनत करें  या बिल्कुल न करें जो भाग्य में नही है वह नही मिलेगा और जो भाग्य में है वह अवश्य मिलेगा। जब हमें कुछ हासिल नही होता है तो फिर हम अपने भाग्य को कोसने लगते है कि किस्मत में लिखा ही नही है। इसलिए मिलेगा कहाँ से?
 कभी पंडितों और ज्योतिषियों की बातों में आ कर पता नहीं क्या क्या उपाय, तंत्र मंत्र करते है कभी हाथ दिखाते है कभी कुंडली दिखाते हैं। हमारी वही पुरानी आदत, दूसरा व्यक्ति तो बिना मेहनत के इतना खुश है सब कुछ है और आराम की ज़िंदगी है मेरे ही भाग्य में कुछ नहीं है।

ये तो वही बात हुई की अजगर और चिड़िया भी तो कुछ काम नहीं करते कुछ मेहनत नहीं करते फिर उन्हें भी तो खाना मिल ही जाता है तो जो भाग्य में होता है मिल ही जाता है , बस धैर्य रखना चाहिए, ऐसी सोच ले कर चले तो बेचारा भाग्य भी क्या करेगा। एक कहावत है "अजगर करे न चाकरी, पंछी करे न काम। दास मलूका कह गये, सबके दाता राम।।

एक बात हमेशा ध्यान रखनी चाहिये कि  समस्या से जूझे बिना हल नही मिलेगा और जो समस्या से जूझ गया उसका भाग्य जरूर चमकेगा।
 भाग्य है क्या ? सिर्फ भगवान की कृपा।  जीवन में कैसी भी विषम परिस्थिति सामने आए फिर भी हमें अपने इष्ट या अपने गुरु पर विश्वास बनाये रखना चाहिये। भाग्य अपना कार्य करता है। शास्त्र कहते हैं कि भाग्य बड़ा प्रबल है, मगर पुरुषार्थ द्वारा भाग्य को  सौभाग्य में बदला जा सकता है।

  आपकी सोच भी उसी तरह ही काम करती है , जैसे एक भिखारी जब तक भीख माँगता है तो वह सिर्फ भीख ही माँगता है और ये सोचता है एक दिन का जितना भाग्य में लिखा होगा मिल जाएगा और वह जिंदगी भर भीख ही माँगता रहता है।

 अगर वह थोड़ा आगे बढ़ने की कोशिश करें और एक जूता पालिश करने वाला ब्रुश खरीद लाये और जहाँ वह भीख माँगता है वहीँ बूट पालिश करना शुरु कर दे तब भी  वह भाग्य के ही भरोसे रहेगा कि जितना मिलेगा मिल जाएगा लेकिन उसका काम थोड़ा बढ़ा, वह कर्मठ बना और मेहनत करने लगा उसने कर्म शुरु किया।  धीरे धीरे वह सोचेगा कि बूट पालिश की एक स्थायी दुकान खोली जाये । उसके बाद काम को और बढ़ाया जाये। इस तरह आप मेहनत करते रहें और भाग्य के भरोसे न बैठें। आप  पुरुषार्थ करें फिर जितना मिलना होगा अवश्य मिलेगा। भाग्य के भरोसे कतई न रहें।

तो समस्या को सिर्फ भाग्य से न जोड़ कर थोड़ा आगे सोचेंगे मेहनत करेंगे थोड़ा जोखिम लेंगे तो ईश्वर भी मदद करेंगे।

क्या आप ऐसे इंसान को उधार दे सकते है जिसनें कुछ न करने की ठान ली है  या जिसका कोई उद्देश्य नहीं जो सिर्फ भाग्य के भरोसे जीता है। निश्चित रुप से आप ऐसे किसी भी व्यक्ति को उधार नहीं देंगे।   क्योंकि आपको उससे कोई अपेक्षा नहीं तो फिर भगवान अपनी कृपा आपको क्यों देंगे जब आपने भाग्य के भरोसे जिंदगी जीने की ठान ली हो।
कैसी भी परिस्थिति हो मन को कमजोर नहीं होने देना है। आपने सुना होगा "मन के हारे हार है, मन के जीते जीत"। ईश्वर कृपा भी होगी और भाग्य भी बदलेगा ।






 Motivational Story in Hindi...आप खुद बदल सकते है अपना भाग्य...
Posted on 17.06.2017 By: Deep Singh Yadav

जब कभी भाग्य की बात आती है तो हर व्यक्ति यही सोचता है कि जो होना है वह तो होकर ही रहेगा। फिर आप कितनी भी मेहनत करें  या बिल्कुल न करें जो भाग्य में नही है वह नही मिलेगा और जो भाग्य में है वह अवश्य मिलेगा। जब हमें कुछ हासिल नही होता है तो फिर हम अपने भाग्य को कोसने लगते है कि किस्मत में लिखा ही नही है। इसलिए मिलेगा कहाँ से?
 कभी पंडितों और ज्योतिषियों की बातों में आ कर पता नहीं क्या क्या उपाय, तंत्र मंत्र करते है कभी हाथ दिखाते है कभी कुंडली दिखाते हैं। हमारी वही पुरानी आदत, दूसरा व्यक्ति तो बिना मेहनत के इतना खुश है सब कुछ है और आराम की ज़िंदगी है मेरे ही भाग्य में कुछ नहीं है।

ये तो वही बात हुई की अजगर और चिड़िया भी तो कुछ काम नहीं करते कुछ मेहनत नहीं करते फिर उन्हें भी तो खाना मिल ही जाता है तो जो भाग्य में होता है मिल ही जाता है , बस धैर्य रखना चाहिए, ऐसी सोच ले कर चले तो बेचारा भाग्य भी क्या करेगा। एक कहावत है "अजगर करे न चाकरी, पंछी करे न काम। दास मलूका कह गये, सबके दाता राम।।

एक बात हमेशा ध्यान रखनी चाहिये कि  समस्या से जूझे बिना हल नही मिलेगा और जो समस्या से जूझ गया उसका भाग्य जरूर चमकेगा।
 भाग्य है क्या ? सिर्फ भगवान की कृपा।  जीवन में कैसी भी विषम परिस्थिति सामने आए फिर भी हमें अपने इष्ट या अपने गुरु पर विश्वास बनाये रखना चाहिये। भाग्य अपना कार्य करता है। शास्त्र कहते हैं कि भाग्य बड़ा प्रबल है, मगर पुरुषार्थ द्वारा भाग्य को  सौभाग्य में बदला जा सकता है।

  आपकी सोच भी उसी तरह ही काम करती है , जैसे एक भिखारी जब तक भीख माँगता है तो वह सिर्फ भीख ही माँगता है और ये सोचता है एक दिन का जितना भाग्य में लिखा होगा मिल जाएगा और वह जिंदगी भर भीख ही माँगता रहता है।

 अगर वह थोड़ा आगे बढ़ने की कोशिश करें और एक जूता पालिश करने वाला ब्रुश खरीद लाये और जहाँ वह भीख माँगता है वहीँ बूट पालिश करना शुरु कर दे तब भी  वह भाग्य के ही भरोसे रहेगा कि जितना मिलेगा मिल जाएगा लेकिन उसका काम थोड़ा बढ़ा, वह कर्मठ बना और मेहनत करने लगा उसने कर्म शुरु किया।  धीरे धीरे वह सोचेगा कि बूट पालिश की एक स्थायी दुकान खोली जाये । उसके बाद काम को और बढ़ाया जाये। इस तरह आप मेहनत करते रहें और भाग्य के भरोसे न बैठें। आप  पुरुषार्थ करें फिर जितना मिलना होगा अवश्य मिलेगा। भाग्य के भरोसे कतई न रहें।

तो समस्या को सिर्फ भाग्य से न जोड़ कर थोड़ा आगे सोचेंगे मेहनत करेंगे थोड़ा जोखिम लेंगे तो ईश्वर भी मदद करेंगे।

क्या आप ऐसे इंसान को उधार दे सकते है जिसनें कुछ न करने की ठान ली है  या जिसका कोई उद्देश्य नहीं जो सिर्फ भाग्य के भरोसे जीता है। निश्चित रुप से आप ऐसे किसी भी व्यक्ति को उधार नहीं देंगे।   क्योंकि आपको उससे कोई अपेक्षा नहीं तो फिर भगवान अपनी कृपा आपको क्यों देंगे जब आपने भाग्य के भरोसे जिंदगी जीने की ठान ली हो।
कैसी भी परिस्थिति हो मन को कमजोर नहीं होने देना है। आपने सुना होगा "मन के हारे हार है, मन के जीते जीत"। ईश्वर कृपा भी होगी और भाग्य भी बदलेगा ।






 Motivational Story in Hindi...आप खुद बदल सकते है अपना भाग्य...
Posted on 17.06.2017 By: Deep Singh Yadav

जब कभी भाग्य की बात आती है तो हर व्यक्ति यही सोचता है कि जो होना है वह तो होकर ही रहेगा। फिर आप कितनी भी मेहनत करें  या बिल्कुल न करें जो भाग्य में नही है वह नही मिलेगा और जो भाग्य में है वह अवश्य मिलेगा। जब हमें कुछ हासिल नही होता है तो फिर हम अपने भाग्य को कोसने लगते है कि किस्मत में लिखा ही नही है। इसलिए मिलेगा कहाँ से?
 कभी पंडितों और ज्योतिषियों की बातों में आ कर पता नहीं क्या क्या उपाय, तंत्र मंत्र करते है कभी हाथ दिखाते है कभी कुंडली दिखाते हैं। हमारी वही पुरानी आदत, दूसरा व्यक्ति तो बिना मेहनत के इतना खुश है सब कुछ है और आराम की ज़िंदगी है मेरे ही भाग्य में कुछ नहीं है।

ये तो वही बात हुई की अजगर और चिड़िया भी तो कुछ काम नहीं करते कुछ मेहनत नहीं करते फिर उन्हें भी तो खाना मिल ही जाता है तो जो भाग्य में होता है मिल ही जाता है , बस धैर्य रखना चाहिए, ऐसी सोच ले कर चले तो बेचारा भाग्य भी क्या करेगा। एक कहावत है "अजगर करे न चाकरी, पंछी करे न काम। दास मलूका कह गये, सबके दाता राम।।

एक बात हमेशा ध्यान रखनी चाहिये कि  समस्या से जूझे बिना हल नही मिलेगा और जो समस्या से जूझ गया उसका भाग्य जरूर चमकेगा।
 भाग्य है क्या ? सिर्फ भगवान की कृपा।  जीवन में कैसी भी विषम परिस्थिति सामने आए फिर भी हमें अपने इष्ट या अपने गुरु पर विश्वास बनाये रखना चाहिये। भाग्य अपना कार्य करता है। शास्त्र कहते हैं कि भाग्य बड़ा प्रबल है, मगर पुरुषार्थ द्वारा भाग्य को  सौभाग्य में बदला जा सकता है।

  आपकी सोच भी उसी तरह ही काम करती है , जैसे एक भिखारी जब तक भीख माँगता है तो वह सिर्फ भीख ही माँगता है और ये सोचता है एक दिन का जितना भाग्य में लिखा होगा मिल जाएगा और वह जिंदगी भर भीख ही माँगता रहता है।

 अगर वह थोड़ा आगे बढ़ने की कोशिश करें और एक जूता पालिश करने वाला ब्रुश खरीद लाये और जहाँ वह भीख माँगता है वहीँ बूट पालिश करना शुरु कर दे तब भी  वह भाग्य के ही भरोसे रहेगा कि जितना मिलेगा मिल जाएगा लेकिन उसका काम थोड़ा बढ़ा, वह कर्मठ बना और मेहनत करने लगा उसने कर्म शुरु किया।  धीरे धीरे वह सोचेगा कि बूट पालिश की एक स्थायी दुकान खोली जाये । उसके बाद काम को और बढ़ाया जाये। इस तरह आप मेहनत करते रहें और भाग्य के भरोसे न बैठें। आप  पुरुषार्थ करें फिर जितना मिलना होगा अवश्य मिलेगा। भाग्य के भरोसे कतई न रहें।

तो समस्या को सिर्फ भाग्य से न जोड़ कर थोड़ा आगे सोचेंगे मेहनत करेंगे थोड़ा जोखिम लेंगे तो ईश्वर भी मदद करेंगे।

क्या आप ऐसे इंसान को उधार दे सकते है जिसनें कुछ न करने की ठान ली है  या जिसका कोई उद्देश्य नहीं जो सिर्फ भाग्य के भरोसे जीता है। निश्चित रुप से आप ऐसे किसी भी व्यक्ति को उधार नहीं देंगे।   क्योंकि आपको उससे कोई अपेक्षा नहीं तो फिर भगवान अपनी कृपा आपको क्यों देंगे जब आपने भाग्य के भरोसे जिंदगी जीने की ठान ली हो।
कैसी भी परिस्थिति हो मन को कमजोर नहीं होने देना है। आपने सुना होगा "मन के हारे हार है, मन के जीते जीत"। ईश्वर कृपा भी होगी और भाग्य भी बदलेगा ।

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