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Wednesday, 29 March 2017

Amulya Khabar

9 Forms of Maa Durga in Hindi>> माँ दुर्गा के नौ रूप

9 Forms of Maa Durga in Hindi... माँ दुर्गा के नौ रूप...
Posted on 29.03.2017 By Deep Singh Yadav

1. शैलपुत्री...
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देवी दुर्गा के नौ रूप होते हैं। दुर्गाजी पहले स्वरूप में 'शैलपुत्री' के नाम से जानी जाती हैं।[१] ये ही नवदुर्गाओं में प्रथम दुर्गा हैं। पर्वतराज हिमालय के घर पुत्री रूप में उत्पन्न होने के कारण इनका नाम 'शैलपुत्री' पड़ा। नवरात्र-पूजन में प्रथम दिवस इन्हीं की पूजा और उपासना की जाती है।

मां दुर्गा को सर्वप्रथम शैलपुत्री के रूप में पूजा जाता है। हिमालय के वहां पुत्री के रूप में जन्म लेने के कारण उनका नामकरण हुआ शैलपुत्री। इनका वाहन वृषभ है, इसलिए यह देवी वृषारूढ़ा के नाम से भी जानी जाती हैं। इस देवी ने दाएं हाथ में त्रिशूल धारण कर रखा है और बाएं हाथ में कमल सुशोभित है। यही देवी प्रथम दुर्गा हैं। यही सती के नाम से भी जानी जाती हैं। उनकी एक मार्मिक कहानी है।

एक बार जब प्रजापति ने यज्ञ किया तो इसमें सारे देवताओं को निमंत्रित किया, भगवान शंकर को नहीं। सती यज्ञ में जाने के लिए विकल हो उठीं। शंकरजी ने कहा कि सारे देवताओं को निमंत्रित किया गया है, उन्हें नहीं। ऐसे में वहां जाना उचित नहीं है।

सती का प्रबल आग्रह देखकर शंकरजी ने उन्हें यज्ञ में जाने की अनुमति दे दी। सती जब घर पहुंचीं तो सिर्फ मां ने ही उन्हें स्नेह दिया। बहनों की बातों में व्यंग्य और उपहास के भाव थे। भगवान शंकर के प्रति भी तिरस्कार का भाव है। दक्ष ने भी उनके प्रति अपमानजनक वचन कहे। इससे सती को क्लेश पहुंचा। वे अपने पति का यह अपमान न सह सकीं और योगाग्नि द्वारा अपने को जलाकर भस्म कर लिया।

इस दारुण दुख से व्यथित होकर शंकर भगवान ने उस यज्ञ का विध्वंस करा दिया। यही सती अगले जन्म में शैलराज हिमालय की पुत्री के रूप में जन्मीं और शैलपुत्री कहलाईं। शैलपुत्री का विवाह भी भगवान शंकर से हुआ। शैलपुत्री शिवजी की अर्द्धांगिनी बनीं। इनका महत्व और शक्ति अनंत है। पार्वती और हेमवती भी इसी देवी के अन्य नाम हैं।

2. ब्रह्मचारिणी...
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नवरात्र पर्व के दूसरे दिन माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना की जाती है। साधक इस दिन अपने मन को माँ के चरणों में लगाते हैं। ब्रह्म का अर्थ है तपस्या और चारिणी यानी आचरण करने वाली। इस प्रकार ब्रह्मचारिणी का अर्थ हुआ तप का आचरण करने वाली।


भगवान शंकर को पति रूप में प्राप्त करने के लिए घोर तपस्या की थी। इस कठिन तपस्या के कारण इस देवी को तपश्चारिणी अर्थात्‌ ब्रह्मचारिणी नाम से अभिहित किया।

मांदुर्गा की नवशक्ति का दूसरा स्वरूप ब्रह्मचारिणी का है। यहां ब्रह्म का अर्थ तपस्या से है। मां दुर्गा का यह स्वरूप भक्तों और सिद्धों को अनंत फल देने वाला है। इनकी उपासना से तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार और संयम की वृद्धि होती है। ब्रह्मचारिणी का अर्थ तप की चारिणी यानी तप का आचरण करने वाली। देवी का यह रूप पूर्ण ज्योतिर्मय और अत्यंत भव्य है। इस देवी के दाएं हाथ में जप की माला है और बाएं हाथ में यह कमण्डल धारण किए हैं।

पूर्वजन्म में इस देवी ने हिमालय के घर पुत्री रूप में जन्म लिया था और नारदजी के उपदेश से भगवान शंकर को पति रूप में प्राप्त करने के लिए घोर तपस्या की थी। इस कठिन तपस्या के कारण इन्हें तपश्चारिणी अर्थात्‌ ब्रह्मचारिणी नाम से अभिहित किया गया। एक हजार वर्ष तक इन्होंने केवल फल-फूल खाकर बिताए और सौ वर्षों तक केवल जमीन पर रहकर शाक पर निर्वाह किया।

कुछ दिनों तक कठिन उपवास रखे और खुले आकाश के नीचे वर्षा और धूप के घोर कष्ट सहे। तीन हजार वर्षों तक टूटे हुए बिल्व पत्र खाए और भगवान शंकर की आराधना करती रहीं। इसके बाद तो उन्होंने सूखे बिल्व पत्र खाना भी छोड़ दिए। कई हजार वर्षों तक निर्जल और निराहार रह कर तपस्या करती रहीं। पत्तों को खाना छोड़ देने के कारण ही इनका नाम अपर्णा नाम पड़ गया।

कठिन तपस्या के कारण देवी का शरीर एकदम क्षीण हो गया। देवता, ऋषि, सिद्धगण, मुनि सभी ने ब्रह्मचारिणी की तपस्या को अभूतपूर्व पुण्य कृत्य बताया, सराहना की और कहा -हे देवी आज तक किसी ने इस तरह की कठोर तपस्या नहीं की। यह तुम्हीं से ही संभव थी। तुम्हारी मनोकामना परिपूर्ण होगी और भगवान चंद्रमौलि शिवजी तुम्हें पति रूप में प्राप्त होंगे। अब तपस्या छोड़कर घर लौट जाओ। जल्द ही तुम्हारे पिता तुम्हें बुलाने आ रहे हैं।

मां ब्रह्मचारिणी देवी की कृपा से सर्वसिद्धि प्राप्त होती है। दुर्गा पूजा के दूसरे दिन देवी के इसी स्वरूप की उपासना की जाती है। इस देवी की कथा का सार यह है कि जीवन के कठिन संघर्षों में भी मन विचलित नहीं होना चाहिए।

3. चंद्रघंटा...
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माँ दुर्गाजी की तीसरी शक्ति का नाम चंद्रघंटा है। नवरात्रि उपासना में तीसरे दिन की पूजा का अत्यधिक महत्व है और इस दिन इन्हीं के विग्रह का पूजन-आराधन किया जाता है। इस दिन साधक का मन 'मणिपूर' चक्र में प्रविष्ट होता है।

नवरात्रि में तीसरे दिन इसी देवी की पूजा का महत्व है। इस देवी की कृपा से साधक को अलौकिक वस्तुओं के दर्शन होते हैं। दिव्य सुगंधियों का अनुभव होता है और कई तरह की ध्वनियां सुनाई देने लगती हैं।

मां दुर्गा की तीसरी शक्ति हैं चंद्रघंटा। नवरात्रि में तीसरे दिन इसी देवी की पूजा-आराधना की जाती है। देवी का यह स्वरूप परम शांतिदायक और कल्याणकारी है। इसीलिए कहा जाता है कि हमें निरंतर उनके पवित्र विग्रह को ध्यान में रखकर साधना करना चाहिए। उनका ध्यान हमारे इहलोक और परलोक दोनों के लिए कल्याणकारी और सद्गति देने वाला है। इस देवी के मस्तक पर घंटे के आकार का आधा चंद्र है। इसीलिए इस देवी को चंद्रघंटा कहा गया है। इनके शरीर का रंग सोने के समान बहुत चमकीला है। इस देवी के दस हाथ हैं। वे खड्ग और अन्य अस्त्र-शस्त्र से विभूषित हैं।

सिंह पर सवार इस देवी की मुद्रा युद्ध के लिए उद्धत रहने की है। इसके घंटे सी भयानक ध्वनि से अत्याचारी दानव-दैत्य और राक्षस काँपते रहते हैं। नवरात्रि में तीसरे दिन इसी देवी की पूजा का महत्व है। इस देवी की कृपा से साधक को अलौकिक वस्तुओं के दर्शन होते हैं। दिव्य सुगंधियों का अनुभव होता है और कई तरह की ध्वनियां सुनाईं देने लगती हैं। इन क्षणों में साधक को बहुत सावधान रहना चाहिए।

इस देवी की आराधना से साधक में वीरता और निर्भयता के साथ ही सौम्यता और विनम्रता का विकास होता है। इसलिए हमें चाहिए कि मन, वचन और कर्म के साथ ही काया को विहित विधि-विधान के अनुसार परिशुद्ध-पवित्र करके चंद्रघंटा के शरणागत होकर उनकी उपासना-आराधना करना चाहिए। इससे सारे कष्टों से मुक्त होकर सहज ही परम पद के अधिकारी बन सकते हैं। यह देवी कल्याणकारी है।

4. कूष्माण्डा...
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नवरात्र-पूजन के चौथे दिन कूष्माण्डा देवी के स्वरूप की ही उपासना की जाती है। इस दिन साधक का मन 'अदाहत' चक्र में अवस्थित होता है।

नवरात्रि में चौथे दिन देवी को कुष्मांडा के रूप में पूजा जाता है। अपनी मंद, हल्की हंसी के द्वारा अण्ड यानी ब्रह्मांड को उत्पन्न करने के कारण इस देवी को कुष्मांडा नाम से अभिहित किया गया है। जब सृष्टि नहीं थी, चारों तरफ अंधकार ही अंधकार था, तब इसी देवी ने अपने ईषत्‌ हास्य से ब्रह्मांड की रचना की थी। इसीलिए इसे सृष्टि की आदिस्वरूपा या आदिशक्ति कहा गया है।

इस देवी की आठ भुजाएं हैं, इसलिए अष्टभुजा कहलाईं। इनके सात हाथों में क्रमशः कमण्डल, धनुष, बाण, कमल-पुष्प, अमृतपूर्ण कलश, चक्र तथा गदा हैं। आठवें हाथ में सभी सिद्धियों और निधियों को देने वाली जप माला है। इस देवी का वाहन सिंह है और इन्हें कुम्हड़े की बलि प्रिय है। संस्कृति में कुम्हड़े को कुष्मांड कहते हैं इसलिए इस देवी को कुष्मांडा।

इस देवी का वास सूर्यमंडल के भीतर लोक में है। सूर्यलोक में रहने की शक्ति क्षमता केवल इन्हीं में है। इसीलिए इनके शरीर की कांति और प्रभा सूर्य की भांति ही दैदीप्यमान है। इनके ही तेज से दसों दिशाएं आलोकित हैं। ब्रह्मांड की सभी वस्तुओं और प्राणियों में इन्हीं का तेज व्याप्त है।

अचंचल और पवित्र मन से नवरात्रि के चौथे दिन इस देवी की पूजा-आराधना करना चाहिए। इससे भक्तों के रोगों और शोकों का नाश होता है तथा उसे आयु, यश, बल और आरोग्य प्राप्त होता है। यह देवी अत्यल्प सेवा और भक्ति से ही प्रसन्न होकर आशीर्वाद देती हैं। सच्चे मन से पूजा करने वाले को सुगमता से परम पद प्राप्त होता है।

विधि-विधान से पूजा करने पर भक्त को कम समय में ही कृपा का सूक्ष्म भाव अनुभव होने लगता है। यह देवी आधियों-व्याधियों से मुक्त करती हैं और उसे सुख समृद्धि और उन्नति प्रदान करती हैं। अंततः इस देवी की उपासना में भक्तों को सदैव तत्पर रहना चाहिए।

5. स्कंदमाता...
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नवरात्रि का पाँचवाँ दिन स्कंदमाता की उपासना का दिन होता है। मोक्ष के द्वार खोलने वाली माता परम सुखदायी हैं। माँ अपने भक्तों की समस्त इच्छाओं की पूर्ति करती हैं।

इस देवी की चार भुजाएं हैं। यह दायीं तरफ की ऊपर वाली भुजा से स्कंद को गोद में पकड़े हुए हैं। नीचे वाली भुजा में कमल का पुष्प है। बायीं तरफ ऊपर वाली भुजा में वरदमुद्रा में हैं और नीचे वाली भुजा में कमल पुष्प है।

पहाड़ों पर रहकर सांसारिक जीवों में नवचेतना का निर्माण करने वालीं स्कंदमाता। नवरात्रि में पाँचवें दिन इस देवी की पूजा-अर्चना की जाती है। कहते हैं कि इनकी कृपा से मूढ़ भी ज्ञानी हो जाता है। स्कंद कुमार कार्तिकेय की माता के कारण इन्हें स्कंदमाता नाम से अभिहित किया गया है। इनके विग्रह में भगवान स्कंद बालरूप में इनकी गोद में विराजित हैं। इस देवी की चार भुजाएं हैं।

यह दायीं तरफ की ऊपर वाली भुजा से स्कंद को गोद में पकड़े हुए हैं। नीचे वाली भुजा में कमल का पुष्प है। बायीं तरफ ऊपर वाली भुजा में वरदमुद्रा में हैं और नीचे वाली भुजा में कमल पुष्प है। इनका वर्ण एकदम शुभ्र है। यह कमल के आसन पर विराजमान रहती हैं। इसीलिए इन्हें पद्मासना भी कहा जाता है। सिंह इनका वाहन है।

शास्त्रों में इसका पुष्कल महत्व बताया गया है। इनकी उपासना से भक्त की सारी इच्छाएं पूरी हो जाती हैं। भक्त को मोक्ष मिलता है। सूर्यमंडल की अधिष्ठात्री देवी होने के कारण इनका उपासक अलौकिक तेज और कांतिमय हो जाता है। अतः मन को एकाग्र रखकर और पवित्र रखकर इस देवी की आराधना करने वाले साधक या भक्त को भवसागर पार करने में कठिनाई नहीं आती है।

उनकी पूजा से मोक्ष का मार्ग सुलभ होता है। यह देवी विद्वानों और सेवकों को पैदा करने वाली शक्ति है। यानी चेतना का निर्माण करने वालीं। कहते हैं कालिदास द्वारा रचित रघुवंशम महाकाव्य और मेघदूत रचनाएं स्कंदमाता की कृपा से ही संभव हुईं।

6. कात्यायनी...
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माँ दुर्गा के छठे स्वरूप का नाम कात्यायनी है। उस दिन साधक का मन 'आज्ञा' चक्र में स्थित होता है। योगसाधना में इस आज्ञा चक्र का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है।

नवरात्रि में छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा की जाती है। इनकी उपासना और आराधना से भक्तों को बड़ी आसानी से अर्थ, धर्म, काम और मोक्ष चारों फलों की प्राप्ति होती है। उसके रोग, शोक, संताप और भय नष्ट हो जाते हैं। जन्मों के समस्त पाप भी नष्ट हो जाते हैं।

इस देवी को नवरात्रि में छठे दिन पूजा जाता है। कात्य गोत्र में विश्वप्रसिद्ध महर्षि कात्यायन ने भगवती पराम्बा की उपासना की। कठिन तपस्या की। उनकी इच्छा थी कि उन्हें पुत्री प्राप्त हो। मां भगवती ने उनके घर पुत्री के रूप में जन्म लिया। इसलिए यह देवी कात्यायनी कहलाईं। इनका गुण शोधकार्य है। इसीलिए इस वैज्ञानिक युग में कात्यायनी का महत्व सर्वाधिक हो जाता है। इनकी कृपा से ही सारे कार्य पूरे जो जाते हैं। यह वैद्यनाथ नामक स्थान पर प्रकट होकर पूजी गईं।

मां कात्यायनी अमोघ फलदायिनी हैं। भगवान कृष्ण को पति रूप में पाने के लिए ब्रज की गोपियों ने इन्हीं की पूजा की थी। यह पूजा कालिंदी यमुना के तट पर की गई थी।

इसीलिए यह ब्रजमंडल की अधिष्ठात्री देवी के रूप में प्रतिष्ठित हैं। इनका स्वरूप अत्यंत भव्य और दिव्य है। यह स्वर्ण के समान चमकीली हैं और भास्वर हैं। इनकी चार भुजाएं हैं। दायीं तरफ का ऊपर वाला हाथ अभयमुद्रा में है तथा नीचे वाला हाथ वर मुद्रा में। मां के बाँयी तरफ के ऊपर वाले हाथ में तलवार है व नीचे वाले हाथ में कमल का फूल सुशोभित है। इनका वाहन भी सिंह है।

इनकी उपासना और आराधना से भक्तों को बड़ी आसानी से अर्थ, धर्म, काम और मोक्ष चारों फलों की प्राप्ति होती है। उसके रोग, शोक, संताप और भय नष्ट हो जाते हैं। जन्मों के समस्त पाप भी नष्ट हो जाते हैं। इसलिए कहा जाता है कि इस देवी की उपासना करने से परम पद की प्राप्ति होती है।

7.कालरात्रि...
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माँ दुर्गाजी की सातवीं शक्ति कालरात्रि के नाम से जानी जाती हैं। दुर्गापूजा के सातवें दिन माँ कालरात्रि की उपासना का विधान है। इस दिन साधक का मन 'सहस्रार' चक्र में स्थित रहता है। इसके लिए ब्रह्मांड की समस्त सिद्धियों का द्वार खुलने लगता है।

कालरात्रि की उपासना करने से ब्रह्मांड की सारी सिद्धियों के दरवाजे खुलने लगते हैं और तमाम असुरी शक्तियां उनके नाम के उच्चारण से ही भयभीत होकर दूर भागने लगती हैं।

नाम से अभिव्यक्त होता है कि मां दुर्गा की यह सातवीं शक्ति कालरात्रि के नाम से जानी जाती है अर्थात जिनके शरीर का रंग घने अंधकार की तरह एकदम काला है। नाम से ही जाहिर है कि इनका रूप भयानक है। सिर के बाल बिखरे हुए हैं और गले में विद्युत की तरह चमकने वाली माला है। अंधकारमय स्थितियों का विनाश करने वाली शक्ति हैं कालरात्रि। काल से भी रक्षा करने वाली यह शक्ति है।

इस देवी के तीन नेत्र हैं। यह तीनों ही नेत्र ब्रह्मांड के समान गोल हैं। इनकी सांसों से अग्नि निकलती रहती है। यह गर्दभ की सवारी करती हैं। ऊपर उठे हुए दाहिने हाथ की वर मुद्रा भक्तों को वर देती है। दाहिनी ही तरफ का नीचे वाला हाथ अभय मुद्रा में है। यानी भक्तों हमेशा निडर, निर्भय रहो।

बायीं तरफ के ऊपर वाले हाथ में लोहे का कांटा तथा नीचे वाले हाथ में खड्ग है। इनका रूप भले ही भयंकर हो लेकिन यह सदैव शुभ फल देने वाली मां हैं। इसीलिए यह शुभंकरी कहलाईं। अर्थात इनसे भक्तों को किसी भी प्रकार से भयभीत या आतंकित होने की कतई आवश्यकता नहीं। उनके साक्षात्कार से भक्त पुण्य का भागी बनता है।

कालरात्रि की उपासना करने से ब्रह्मांड की सारी सिद्धियों के दरवाजे खुलने लगते हैं और तमाम असुरी शक्तियां उनके नाम के उच्चारण से ही भयभीत होकर दूर भागने लगती हैं। इसलिए दानव, दैत्य, राक्षस और भूत-प्रेत उनके स्मरण से ही भाग जाते हैं। यह ग्रह बाधाओं को भी दूर करती हैं और अग्नि, जल, जंतु, शत्रु और रात्रि भय दूर हो जाते हैं। इनकी कृपा से भक्त हर तरह के भय से मुक्त हो जाता है।

8. महागौरी...
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माँ दुर्गाजी की आठवीं शक्ति का नाम महागौरी है। दुर्गापूजा के आठवें दिन महागौरी की उपासना का विधान है। इनकी शक्ति अमोघ और सद्यः फलदायिनी है। इनकी उपासना से भक्तों को सभी कल्मष धुल जाते हैं, पूर्वसंचित पाप भी विनष्ट हो जाते हैं।

यह अमोघ फलदायिनी हैं और भक्तों के तमाम कल्मष धुल जाते हैं। पूर्वसंचित पाप भी नष्ट हो जाते हैं। महागौरी का पूजन-अर्चन, उपासना-आराधना कल्याणकारी है। इनकी कृपा से अलौकिक सिद्धियां भी प्राप्त होती हैं।

नवरात्रि में आठवें दिन महागौरी शक्ति की पूजा की जाती है। नाम से प्रकट है कि इनका रूप पूर्णतः गौर वर्ण है। इनकी उपमा शंख, चंद्र और कुंद के फूल से दी गई है। अष्टवर्षा भवेद् गौरी यानी इनकी आयु आठ साल की मानी गई है। इनके सभी आभूषण और वस्त्र सफेद हैं। इसीलिए उन्हें श्वेताम्बरधरा कहा गया है। 4 भुजाएं हैं और वाहन वृषभ है इसीलिए वृषारूढ़ा भी कहा गया है इनको।

इनके ऊपर वाला दाहिना हाथ अभय मुद्रा है तथा नीचे वाला हाथ त्रिशूल धारण किया हुआ है। ऊपर वाले बांए हाथ में डमरू धारण कर रखा है और नीचे वाले हाथ में वर मुद्रा है। इनकी पूरी मुद्रा बहुत शांत है। पति रूप में शिव को प्राप्त करने के लिए महागौरी ने कठोर तपस्या की थी। इसी वजह से इनका शरीर काला पड़ गया लेकिन तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने इनके शरीर को गंगा के पवित्र जल से धोकर कांतिमय बना दिया। उनका रूप गौर वर्ण का हो गया। इसीलिए यह महागौरी कहलाईं।

यह अमोघ फलदायिनी हैं और इनकी पूजा से भक्तों के तमाम कल्मष धुल जाते हैं। पूर्वसंचित पाप भी नष्ट हो जाते हैं। महागौरी का पूजन-अर्चन, उपासना-आराधना कल्याणकारी है। इनकी कृपा से अलौकिक सिद्धियां भी प्राप्त होती हैं।

9. सिद्धिदात्री...
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माँ दुर्गाजी की नौवीं शक्ति का नाम सिद्धिदात्री हैं। ये सभी प्रकार की सिद्धियों को देने वाली हैं। नवरात्र-पूजन के नौवें दिन इनकी उपासना की जाती है। इस दिन शास्त्रीय विधि-विधान और पूर्ण निष्ठा के साथ साधना करने वाले साधक को सभी सिद्धियों की प्राप्ति हो जाती है।
भगवान शिव ने भी इस देवी की कृपा से यह तमाम सिद्धियां प्राप्त की थीं। इस देवी की कृपा से ही शिवजी का आधा शरीर देवी का हुआ था। इसी कारण शिव अर्द्धनारीश्वर नाम से प्रसिद्ध हुए।

इस देवी की पूजा नौंवे दिन की जाती है। यह देवी सर्व सिद्धियां प्रदान करने वाली देवी हैं। उपासक या भक्त पर इनकी कृपा से कठिन से कठिन कार्य भी चुटकी में संभव हो जाते हैं। हिमाचल के नंदापर्वत पर इनका प्रसिद्ध तीर्थ है। अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वशित्व आठ सिद्धियां होती हैं। इसलिए इस देवी की सच्चे मन से विधि विधान से उपासना-आराधना करने से यह सभी सिद्धियां प्राप्त की जा सकती हैं।

भगवान शिव ने भी इस देवी की कृपा से यह तमाम सिद्धियां प्राप्त की थीं। इस देवी की कृपा से ही शिवजी का आधा शरीर देवी का हुआ था। इसी कारण शिव अर्द्धनारीश्वर नाम से प्रसिद्ध हुए। इस देवी के दाहिनी तरफ नीचे वाले हाथ में चक्र, ऊपर वाले हाथ में गदा तथा बायीं तरफ के नीचे वाले हाथ में शंख और ऊपर वाले हाथ में कमल का पुष्प है। इनका वाहन सिंह है और यह कमल पुष्प पर भी आसीन होती हैं। विधि-विधान से नौंवे दिन इस देवी की उपासना करने से सिद्धियां प्राप्त होती हैं। यह अंतिम देवी हैं। इनकी साधना करने से लौकिक और परलौकिक सभी प्रकार की कामनाओं की पूर्ति हो जाती है।
source:wikipedia
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Sunday, 26 March 2017

Amulya Khabar

Interesting Facts About National Flag Of India in Hindi>>भारतीय राष्ट्रीय झंडे के बारे में रोचक तथ्य






Interesting Facts About National Flag Of India in Hindi...भारतीय राष्ट्रीय झंडे के बारे में रोचक तथ्य...

Posted On 27.03.2017 By: Deep Singh Yadav

* भारत में ‘फ्लैग कोड ऑफ इंडिया’ (भारतीय ध्वज संहिता) नाम का एक कानून है, जिसमें तिरंगे को फहराने के कुछ नियम बनाये गए हैं।

*
कोई भी व्यक्ति ‘फ्लैग कोड ऑफ इंडिया’ के तहत गलत तरीके से 

तिरंगा फहराने का दोषी पाया जाता है तो उसे जेल भी हो सकती है।

* झंडा  कॉटन, खादी या सिल्क  का ही होना चाहिए।  


* फटे या क्षतिग्रस्त झंडे को  फहराया नहीं जा सकता है।

* झंडे का निर्माण हमेशा रेक्टेंगल आकार में ही होगा। जिसका अनुपात 3 : 2 होता है।
झंडे का प्रयोग किसी भी प्रकार की वेशभूषा या सजावट के तौर पर नहीं किया जा सकता है।।

* झंडे पर कोई भी आकृति बनाना या कुछ भी लिखना गैर कानूनी होता है।

* किसी भी गाड़ी के पीछे, बोट या प्लेन में झंडे का प्रयोग  नहीं किया जा सकता ।   झंडे का प्रयोग किसी इमारत को ढकने के लिये नहीं कर सकते।

* किसी भी हालत में झंडा  जमीन पर नहीं छूना चाहिए।

* यदि झंडा फट जाए   तो उसे एकांत में पूरा नष्ट कर देना चाहिये।

*
झंडा केवल राष्ट्रीय शोक के अवसर पर ही आधा झुकता  है।

* किसी भी दूसरे झंडे को राष्ट्रीय झंडे से ऊँचा  नहीं लगा सकते और न ही उसके बराबर रख सकते हैं।

* यदि राष्ट्रीय झंडा फट जाए या रंग खराब हो जाए तो इसे फहराया नहीं जा सकता। ऐसा करना राष्ट्रीय ध्वज का अपमान  माना जाता है।

*
यदि राष्ट्रीय झंडा फट जाता है तो इसे गोपनीय तरीके से सम्मान के साथ जला दिया जाता है या पवित्र नदी में जल समाधि दे दी जाती है।

* शहीदों के पार्थिव शरीर से उतारे गए राष्ट्रीय झंडे को भी गोपनीय तरीके से सम्मान के साथ जला दिया जाता है या नदी में जल समाधि दी जाती है।

* सबसे पहले लाल, पीले व हरे रंग की हॉरिजॉन्टल पट्टियों पर बने झंडे को 7 अगस्त 1906 को पारसी बागान चौक (ग्रीन पार्क), कोलकाता में फहराया गया था।

* भारत के राष्ट्रीय झंडे को पिंगली वैंकेया ने डिज़ाइन किया था।

* वर्तमान समय में जो राष्ट्रीय झंडा फहराया जाता है उसे 22 जुलाई 1947 को अपनाया गया था।

*
राष्ट्रीय झंडे में सबसे ऊपर केसरिया, बीच में सफ़ेद और नीचे हरे रंग की  बराबर पट्टियां होती है। झंडे की चौड़ाई और लंबाई का अनुपात 2 और 3 का होता है।

*
सफ़ेद पट्टी के बीच में गहरे नीले रंग का एक चक्र होता है।  इसका व्यास लगभग सफ़ेद पट्टी की चौड़ाई के बराबर होता है और इसमें 24 तीलियाँ  होती हैं।

*
22 जुलाई 1947 से पहले  झंडे के बीच में चक्र की जगह एक चरखा होता था।  इस झंडे को 1931 में अपनाया गया था।

* 26 जनवरी 2002 को भारतीय ध्वज संहिता में संशोधन किया गया।  इसके बाद आम जनता को अपने घरों और कार्यालयों में राष्ट्रीय झंडा फहराने की अनुमति दी गई।

* झारखंड की राजधानी राँची में 23 जनवरी 2016 को सबसे ऊँचा राष्ट्रीय झंडा फहराया गया।  66*99 साइज के इस तिरंगे को जमीन से 493 फ़ीट ऊँचाई पर फहराया गया।

* राष्ट्रपति भवन के संग्रहालय में एक छोटा तिरंगा रखा हुआ है, जिसे सोने के स्तंभ पर हीरे-जवाहरातों से  बनाया गया है।

* भारत में बैंगलुरू से 420 किलोमीटर स्थित हुबली एक मात्र लाइसेंस प्राप्त संस्थान है जो राष्ट्रीय झंडा बनाने  और सप्लाई करने का काम करता है।

* 29 मई 1953 में भारत का राष्ट्रीय झंडा  सबसे ऊँची पर्वत की चोटी माउंट एवरेस्ट पर यूनियन जैक तथा नेपाली राष्ट्रीय झंडे के साथ फहराता नजर आया था इस समय शेरपा तेनजिंग और एडमंड माउंट हिलेरी ने एवरेस्ट फतह की थी।

 
*
पहली बार 21 अप्रैल 1996 के दिन स्क्वाड्रन लीडर संजय थापर ने राष्ट्रीय झंडे की शान बढाते हुए एम. आई.-8 हेलिकॉप्टर से 10000 फीट की ऊँचाई से कूदकर देश के झंडे को उत्तरी ध्रुव में फहराया था।


* 1984 में विंग कमांडर राकेश शर्मा ने राष्ट्रीय झंडे को लेकर अंतरिक्ष के लिए पहली उड़ान भरी थी।


* दिसंबर 2014 से चेन्नई में 50,000 स्वयं सेवकों द्वारा मानव झंडा बनाने का विश्व रिकॉर्ड भी भारतीय लोगों के ही पास है।

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Monday, 20 March 2017

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Thursday, 19 January 2017

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Sunday, 15 January 2017

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Ginger Benefits in Hindi >>Adrak ke Fayde >> अदरक जूस (रस) के लाभ





Ginger Benefits in Hindi...Adrak ke Fayde



अदरक जूस (रस) के लाभ...

 Posted On 15.01.2017 By: Deep Singh Yadav


सावधानी...गर्मी के मौसम में, रक्त की उल्टी,रक्त स्राव आदि के रोगी अदरक का सेवन कम से कम करें। अदरक एक बार में 10 से 15 या अधिकतम 20 ग्राम तक ही लें और उसका रस एक या दो चम्मच से ज्यादा न लें।


* जो व्यक्ति लगातार अदरक के रस का सेवन करते हैं उनके जोड़ों में दर्द और सूजन नहीं होती है। अदरक के रस में एंटीआॉक्सीडेंटस होते हैं जिससे शरीर में रक्त का प्रवाह बढ़ता है और खून भी साफ होता है।


* अदरक कैंसर जैसी बीमारी से भी हमें बचाता है। यह स्तन कैंसर पैदा करने वाले सेल्स को बढ़ने से भी रोकता है।


* अदरक के प्रयोग से ब्लड प्रैशर की बीमारी में भी लाभ होता है क्योंकि अदरक में खून को पतला करने की शक्ति होती है।


* अदरक के रस का प्रयोग करने से त्वचा सम्बंधी बीमारियों में भी फायदा होता है। इसका सेवन करने से मुहांसों से छुटकारा पा सकते हैं।


* अदरक वाली चाय पीने से स्मरण शक्ति बढ़ती है। जी मचलाना और गर्भावस्था के दौरान होने वाली उल्टी को भी रोकती है।


* सिर दर्द होने पर गर्म पानी या दूध में सौंठ (सूखी अदरक) का लेप बनाकर सिर में लगाने से लाभ होता है।


* अदरक पाचन शक्ति को बढ़ाती है। यह गर्म होती है। अदरक को चाय, सब्जी ,चटनी किसी भी रुप में लिया जा सकता है।

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* कान में दर्द होने पर एक चम्मच सरसों के तेल में लगभग 10 बूँदें अदरक के रस की मिलाकर गर्म कर लें फिर थोड़ा ठण्डा (गुनगुना) करके कान में डालें कान के दर्द में आराम मिलेगा।


* अदरक के रस का लगातार सेवन करने से आपके बाल घने और चमकदार बनते हैं और रुसी से भी छुटकारा मिलेगा।


* एक चम्मच रस, एक कप पानी में लगभग दो या तीन चम्मच पिसी हुई मिश्री मिलाकर प्रतिदिन दो बार सेवन करने से बहुमूत्रता (बार बार पेशाब होने) में आराम मिलेगा।


* अक्सर सर्दी की वजह से गला बैठ जाता है,  और आवाज साफ नहीं निकलती है इसके लिये अदरक के टुकड़े पर नमक डालकर चूसे आराम मिलेगा।


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Monday, 9 January 2017

Amulya Khabar

Ancient Indian Traditions in Hindi >> प्राचीन भारतीय परम्परायें






Ancient Indian Traditions in Hindi...प्राचीन भारतीय परम्परायें...

Posted On 09.01.2017 By: Deep Singh Yadav

समय के साथ सब कुछ बदलता रहता है लेकिन उनमें से कुछ बदलाव लाभदायक होते हैं और कुछ नुकसानदायक। जैसे परंपरागत खेती को छोड़कर आधुनिक खेती को अपनाया जा रहा है। जैसे परंपरागत जलस्रोतों को छोड़कर आरो का जल पीया जा रहा है। पूर्वजों के अनुभव से प्राप्त परंपराएं और ज्ञान को संरक्षित करने के  महत्व को शायद ही कभी कोई समझता होगा। हालांकि जब यह ज्ञान या परंपरा खो जाती है, तो इसका नुकसान भी उठाना पड़ता है। परंपरागत ज्ञान ही है विज्ञान।  भारत में ऐसी बहुत सारी परंपराएं और ज्ञान प्रचलन में था, जो अब लुप्त हो गया है या जो अब प्रचलन से बाहर है। परंपरागत ज्ञान या परंपरा का महत्व ही कुछ और था। ये  परंपराएं व्यक्ति को हर तरह की बाधाओं से मुक्त रखने के लिए होती थीं, लेकिन अब ये प्रचलन में लगभग बाहर हो चली हैं। आइए जानते हैं कि  कौन-सी परंपराएं थी, जो अब चलन में नहीं हैं.....
      
* नीम की दातौन करना : अब यह कुछ गाँवों में ही प्रचलित है कि नीम की छाल या डंडी तोड़कर उससे दांत साफ किए जाएं। कभी-कभी 4 बूंद सरसों के तेल में नमक मिलाकर भी दांत साफ किए जाते थे। वैज्ञानिक कहते हैं कि दांतों और मसूड़ों के मजबूत बने रहने से आपकी आंखें , कान और मस्तिष्क भी सही रहते हैं। 

* काला सुरमा लगाना : सुरमा दो तरह का होता है- एक सफेद और दूसरा काला। काले सुरमे का काजल बनता है।  दोनों ही तरह के सुरमा मूल रूप से पत्थर के रूप  पाए जाते हैं। इसका रत्न भी बनता है और इसी से काजल भी बनता है।   सुरमा लगाने से जहां आँखों के  रोग दूर हो जाते हैं, और  कुछ लोग इसका प्रयोग वशीकरण में भी करते हैं। इसका रत्न धारण करने के भी कई चमत्कारिक लाभ होते हैं। 


* गुड़-चने और सत्तू का सेवन : प्राचीनकाल में लोग जब तीर्थ, भ्रमण या अन्य कहीं दूसरे गाँव में जाते थे तो साथ में गुड़, चना या सत्तू साथ में रखकर ले जाते थे। घर में भी अक्सर लोग इसका सेवन करते थे। यह सेहत को बनाए रखने में लाभदायक होता है। हालांकि आजकल लोग इसका कम ही सेवन करते हैं। सत्तू पाचन में हल्का होता है तथा शरीर को छरहरा बना देता है। जल के साथ घोलकर पीने से बलदायक मल को प्रवृत्त करने वाले, रुचिकारक , श्रम, भूख एवं प्यास को नष्ट करने वाले होते हैं।  कई बार कब्ज की समस्या को दूर करने के लिए लोग गुड़ और चने खाना पसंद करते हैं, लेकिन इसके अलावा गुड़ और चना एनीमिया रोग दूर करने में काफी मददगार साबित होता है। कहते हैं कि 'जो खाए चना, वह रहे बना'। गुड़ और चना न केवल आपको एनीमिया से बचाने का काम करते हैं, बल्कि आपके शरीर में आवश्यक ऊर्जा की पूर्ति भी करते हैं।

* तुलसी और पंचामृत का सेवन : प्रतिदिन तुलसी और पंचामृत का सेवन करना चाहिए इसीलिए प्राचीनकालीन घरों के आंगन में तुलसी का पौधा होता था। हालांकि आज भी कई लोगों के घरों में यह मिल जाएगा लेकिन लोग इसका कम ही सेवन करते हैं। वे तुलसी को भगवान को चढ़ा देते हैं जबकि इसके पत्ते को ताँबे के लोटे में डालकर रखें और कुछ घंटों बाद उस जल को पीकर तुलसी के पत्ते को खा लेना चाहिए। ऐसा करने से जीवन में कभी भी कैंसर नहीं होगा और न ही किसी भी प्रकार का अन्य रोग।  तुलसी का पौधा एक एंटीबायोटिक मेडिसिन होता है। इसके सेवन से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता में बढ़ोतरी होती है, बीमारियां दूर भागती हैं । इसके अलावा तुलसी का पौधा अगर  घर में हो तो मच्छर, मक्खी, सांप आदि के आने का खतरा नहीं होता। 

* दोनों हाथ जोड़कर अभिवादन करना : आजकल दोनों हाथ जोड़कर 'नमस्ते' कहने का प्रचलन नहीं रहा। लोग एक-दूसरे से हाथ मिलाते हैं। वैज्ञानिक दृष्टि से देखें, तो 'नमस्ते' मुद्रा में हमारी अंगुलियों के शिरों बिंदुओं का मिलान होता है। यहां पर आंख, कान और मस्तिष्क के प्रेशर प्वॉइंट्स होते हैं।  दोनों हाथ जोड़ने के क्रम में इन बिंदुओं पर दबाव पड़ता है। इससे संवेदी चक्र प्रभावित होते हैं जिसकी वजह से हम उस व्यक्ति को अधिक समय तक याद रख पाते हैं। साथ ही, किसी तरह का शारीरिक संपर्क  न होने से कीटाणुओं के संक्रमण का खतरा भी नहीं रहता। दूसरी ओर ऐसा करने से हमारे मन में उस व्यक्ति के प्रति तो अच्छे भाव आते ही हैं, उसके मन में भी हमारे लिए आदर उत्पन्न होता है।
 
* पीपल में जल डालना : पीपल का पेड़ सबसे ज्यादा ऑक्सीजन का उत्पादन करता है। जहाँ अन्य पेड़-पौधे रात के समय में कार्बन डाई ऑक्साइड गैस का उत्सर्जन करते हैं, वहीं पीपल का पेड़ रात में भी अधिक मात्रा में ऑक्सीजन मुक्त करता है। इसी वजह से बड़े-बुजुर्गों ने इसके संरक्षण पर विशेष बल दिया है। पुराने जमाने में लोग रात के समय पीपल के पेड़ के नजदीक जाने से मना करते थे। उनके अनुसार पीपल में बुरी आत्माओं का वास होता है, जबकि सच तो यह है कि ऑक्सीजन की अधिकता के कारण मनुष्य को दम घुटने का अहसास  होता है। जिस घर के पास पीपल का वृक्ष होता है, वहां के लोग निरोगी रहते हैं। 

* महत्वपूर्ण व्रत : हालांकि अब यह परंपरा महिलाओं तक ही सीमित रह गई है। एकादशी, प्रदोष, चतुर्थी, पूर्णिमा और अमावस्या का व्रत रखना क्यों महत्वपूर्ण है? इसका उल्लेख पुराणों में मिलता है।  ये चन्द्र से संबंधित व्रत हैं। इन विशेष दिनों में व्यक्ति के शरीर और मन में बदलाव होते हैं।  यदि इन दिनों में व्यक्ति सिर्फ फलाहार ही करे, तो निश्चित ही वह सभी तरह की बाधाओं से मुक्त होकर सुखी जीवन-यापन कर सकता है।

* परंपरागत पोशाक : आजकल कोई परंपरागत पोशाक नहीं पहनता। पहले के लोग ढीले-ढाले वस्त्र पहनते थे, जैसे कुर्ता-पायजामा, धोती-कुर्ता, पगड़ी, साफा या टोपी, खड़ाऊ, सूती या खादी के कपड़े आदि।  परंपरागत पोशाक : आजकल कोई परंपरागत पोशाक नहीं पहनता। पहले के लोग ढीले-ढाले वस्त्र पहनते थे, जैसे कुर्ता-पायजामा, धोती-कुर्ता, पगड़ी, साफा या टोपी, खड़ाऊ, सूती या खादी के कपड़े आदि।  कुछ कपड़े तो ऐसे होते हैं जिसे पहनकर न तो आप ठीक से बैठ सकते हैं और न ही सो सकते हैं। खड़े भी कपड़ों के अनुसार ही रहना होता है। जो वस्त्र आपके तन को सुख दे या तन को अच्छा लगे, वही खास होता है। दूसरी बात, वस्त्र मौसम के अनुकूल भी होना चाहिए। प्राचीन लोगों ने सोच-समझकर ही वस्त्रों का निर्माण किया था।

  * लोक नृत्य-गान, लोकभाषा, लोक इतिहास और लोक व्यंजन : भारतीय समाज के लोकनृत्य, गान, भाषा और व्यंजन में कई राज छुपे हुए हैं। इनका संरक्षण किए जाने की जरूरत है। आप जिस भी क्षेत्र में रहते हैं वहां की भाषा से प्रेम करें। वहां की भाषा के मुहावरे, लोकोक्ति, लोकनृत्य, लोक-परंपरा, ज्ञान, व्यंजन आदि के बारे में ज्यादा से ज्यादा ज्ञान हासिल करें। वक्त के साथ यह सभी खत्म हो रहा है। उदाहरण के लिए मालवा से मालवी और कश्मीर से कश्मीरियत खत्म होती जा रही है।   क्या आप सोच सकते हैं कि यदि कश्मीरियत होती तो वहां कितनी शांति, सुख और सुगंध होती। सचमुच ही कश्मीर के लोगों में अब कश्मीरियत नहीं बची। जो क्षेत्र अपनी लोक-परंपरा और भाषा को खो देता है, देर-सबेर उसका भी अस्तित्व समाप्त हो जाता है। वहां एक ऐसा स्वघाती समाज होता है, जो अपनी पीढ़ियों को बर्बादी के रास्ते पर    धकेलता रहता है। यदि ऐसा नहीं होता तो आधुनिकता के नाम पर अपनी लोक-परंपरा खो रहे लोग भी एक दिन यह देखते हैं कि हमारे क्षेत्र में हम अब गिनती के ही रहे हैं।
  
 * परंपरागत नुस्खे : पहले के लोगों को इसका बहुत ज्ञान होता था लेकिन वर्तमान पीढ़ी यह ज्ञान प्राप्त नहीं करती, क्योंकि अब उनकी दादी और नानी या दादा और नाना भी वैसे   नहीं रहे, जो अपने अनुभव और ज्ञान को अपनी पीढ़ियों में हस्तांतरित करें। गाय के दूध में हींग या मैथी मिलाकर पीने से कब्ज की शिकायत दूर हो जाती है। जन्म घुट्टी पिलाने से बच्चा स्वस्थ हो जाता है। 

 उपरोक्त के अलावा भी सैंकड़ों ऐसी परंपरागत बातें हैं जिन्हें अपनाकर आप अपना जीवन बदल सकते हैं। जैसे चुल्हें की बनी रोटी खाना, पीतल के बर्तन में  भोजन और तांबे के ग्लास में पानी पीना। पानी भी मटके का पीना, ऐसे बिस्तर पर सोना जो परंपरागत हो। लकड़ी का पलंग या खाट, जल्दी सोना और जल्दी उठान। उत्तर, ईशान या पश्चिम मुखी मकान में ही रहना। प्रतिदिन प्रात: काल भ्रमण करना आदि। हालांकि कोल्ड्रिंक और कोक के जमाने में कोई मोसंबी और नींबू का रस   क्यों पीना चाहेगा। आम का रस भी नकली मिलने लगा है।
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Friday, 6 January 2017

Amulya Khabar

Political Kisse >> मुलायम सिंह यादव के पॉलिटिकल करियर की पूरी कहानी |


 Political Kisse...मुलायम सिंह यादव के पॉलिटिकल करियर की पूरी कहानी | 

Share On 06.01.2017 By: Deep Singh Yadav 

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Wednesday, 4 January 2017

Amulya Khabar

Guava Benefits in Hindi >> Amrood Khane Ke Fayde in Hindi / अमरुद खाने के लाभ


Guava Benefits in Hindi... Amrood Khane Ke Fayde in Hindi / अमरुद खाने के लाभ

Posted On 04.01.2017 By: Deep Singh Yadav 

 दोस्तो, अमरुद पेट और कब्ज के लिए बहुत लाभदायक होता है। सर्दियों में अमरुद को फलों का राजा भी कहा जाता है। अमरुद में विटामिन सी काफी मात्रा में होती है।वेदों में अमरुद को जामफल भी कहा जाता है। इसका वैज्ञानिक नाम सैडियम गुजावा है। आइए अब जानते हैं कि अमरुद खाने के क्या क्या लाभ होते हैं.....

* अमरुद में विटामिन ए होता है जिससे आँखों की रोशनी बढ़ती है।

* अमरुद खाने से ब्लड प्रेशर कन्ट्रोल होता क्योंकि इसमें विटामिन सी होता है।

* अमरुद के पत्तों को चबाने से साँसों में ताजगी आती है और मसूड़े मजबूत बनते हैं।

* अमरुद में पाये जाने वाले विटमिन ए, बी, सी की वजह से त्वचा में निखार आता है।

* अमरुद खाने से खाँसी में राहत महसूस होती है।

* अमरुद खाने से अस्थमा मसूड़ों का दर्द और ह्रदय से सम्बन्धित बीमारी को दूर किया जा सकता है।

* अमरुद चेहरे के दाग धब्बों और फुंसियों को  ठीक  करता है।

* अमरुद का रस पीने से फ्लू में फायदा होता है और यह डेंगू जैसे बुखार से भी दूर रखता है।

* अमरुद को काटकर शहद और काला नमक मिलाकर खाने से बच्चों के पेट के कीड़े खत्म हो जाते हैं।


* यदि जुकाम काफी दिनों से हो तो पके हुए अमरूद के बीजों को खायें और उसके बाद पानी पी लें।


* अमरूद के बीजों को चबाकर खाने से आंतों को फायदा होने के साथ-साथ पेट भी साफ रहता है।

* पके हुए अमरूद में पौष्टिकता अधिक होती है। क्योंकि यह हीमोग्लोबीन की कमी को दूर करता है। महिलाओं को पका हुआ अमरूद जरूर खाना चाहिए।


* अमरूद में पाया जाने वाला विटामिन बी-9 शरीर की कोशिकाओं और डीएनए को सुधारने का काम करता है
। 

* रोगप्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए अमरुद का सेवन लाभदायक होता है।

* प्रतिदिन अमरुद का सेवन करने से सर्दी जुकाम  में लाभ होता है।

* अमरूद में मौजूद लाइकोपीन नामक फाइटो न्‍यूट्र‍िएंट्स शरीर को कैंसर और ट्यूमर के खतरे से बचाने में सहायक होते हैं
 

* कच्‍चे अमरूद में पके अमरूद की अपेक्षा विटामिन सी अधिक पाया जाता है. इसलिए कच्‍चा अमरूद खाना ज्‍यादा फायदेमंद  होता है

* नॉर्मल थायरॉइड में भी डॉक्‍टर अमरूद खाने की सलाह देते हैं


* अमरुद उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा करता है।

*
  रोजाना अमरुद का सेवन करने से पाइल्स की समस्या का समाधान संभव है। अमरुद में मौजूद फाइबर की उच्च मात्रा  मल को मुलायम बनाती है तथा मेटाबोलिज्म में वृद्धि करती है, जिसके कारण बवासीर की समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है।

* अमरुद का सेवन करने से गुर्दे में पथरी  होने से रोका जा सकता है। अमरुद में मौजूद विटामिन सी की मात्रा शरीर में अतिरिक्त कैल्शियम को सोख लेती है, जिससे गुर्दे में पथरी होने का ख़तरा पैदा होता है।


*
अमरूद की पत्त‍ियों को पीसकर उसका पेस्ट बनाकर आँखों के नीचे लगाने से काले घेरे और सूजन कम हो जाती है
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Monday, 2 January 2017

Amulya Khabar

ट्रेडिंग सॉफ्टवेयर For Share Market and Commodity Market

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Share on 02.01.2017 By: Deep Singh Yadav

 दोस्तो, अगर आप SHARE MARKET या COMMODITY MARKET में काम करते हैं तो यह SOFTWARE आपके लिए लाभदायक हो सकता है।
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Friday, 30 December 2016

Amulya Khabar

Motivational Video in Hindi >> सकारात्मक सोच

Motivational Video in Hindi...सकारात्मक सोच...By-Study Buddy Club
Share On 31.12.2016 By: Deep Singh Yadav
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Wednesday, 28 December 2016

Amulya Khabar

Motivational Video in Hindi...सफलता का नया सूत्र।By-Vivek Bindra (Motivational Speaker)

Motivational Video in Hindi...सफलता का नया सूत्र।By-Vivek  Bindra (Motivational Speaker) 
Share On 29.12.2016 By: Deep Singh Yadav
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Tuesday, 27 December 2016

Amulya Khabar

Interesting Facts about Salman Khan in Hindi >> सलमान खान के बारे में रोचक तथ्य






Interesting Facts about Salman Khan in Hindi...सलमान खान के बारे में रोचक तथ्य
Posted On 27.12.2016 By: Deep Singh Yadav 

* फिल्मों में आने से पहले संगीता बिजलानी के साथ सलमान खान का रोमांस चल रहा था।

* सलमान खान निर्देशक बनना चाहते थे लेकिन उनके व्यक्तित्व को देखकर लोग उन्हें हीरो के रुप में लेना चाहते थे।


* सहायक अभिनेता के रुप में सलमान खान की पहली फिल्म "बीबी हो तो ऐसी" 1988 में रिलीज हुई।


* हीरो के रुप में सलमान खान की पहली फिल्म "मैंने प्यार किया" 1989 में प्रदर्शित हुई।


* सलमान खान को 2004 में "बेस्ट लुकिंग मैन इन द वर्ल्ड" की लिस्ट में भारत में पहला स्थान मिला।


* सलमान खान हेमा मालिनि को अपनी फेवरेट हीरोइन मानते हैं।


सलमान खान नामक फिल्म का रजिस्ट्रेशन टिप्स फिल्म कम्पनी ने करवाया था लेकिन वो फिल्म आज तक नहीं बन पाई।


*  सलमान खान दिल फेंक किस्म के इंसान रहे हैं, संगीता बिजलानी के बाद सोमी अली के साथ उनका रोमांस चला।


* सोमी अली के बाद सलमान खान के जीवन में ऐशवर्या राय का प्रवेश हुआ जो ज्यादा दिन तक नहीं चल पाया।


* सलमान के नजदीकी लोग बताते हैं कि सलमान खान यदि किसी पर नाराज हो जाते हैं तो आसानी से माफ नहीं करते हैं।


*  ऐश्वर्या राय से अलग होने के बाद कैटरीना कैफ सलमान खान के सम्पर्क में आईं।


*
सलमान खान के बारे में कहा जाता है कि उन्हें किसी अवार्ड की नहीं जनता के प्यार के पुरुस्कार की जरुरत है।


*  सलमान खान ने चिलर पार्टी फिल्म देखी और उससे इतना प्रभावित हुए कि उस फिल्म के निर्माता बन गए।


*  जब रणवीर कपूर फिल्मों में नहीं आये थे तब सलमान खान और उनके बीच एक नाइट क्लब में झगड़ा हो गया था , मारपीट भी हुई थी। बाद में सलमान खान ने अपने पिता सलीम खान के कहने पर ऋषि कपूर के घर जाकर माफी माँग ली थी।


*  सलमान खान अपने पिता सलीम खान से बहुत डरते हैं। 


सलमान खान के पिता मुसलमान और माँ हिंदू है। सलीम खान की दूसरी बीबी ईसाई है। सलमान खान अपने परिवार को मिनी इंडिया कहते हैं।
सलमान खान अपनी संस्था बीइंग ह्यूमन के द्वारा जरुरतमंद और असहाय लोगों की मदद करते रहते हैं।


*  सलमान खान लेखक भी हैं। उन्होंने कई फिल्मों की कहानियाँ भी लिखी हैं।


* 2002  में रात में उनकी कार ने फुटपाथ पर सोये हुए 4 व्यक्तियों को कुचल दिया था। इसमें एक आदमी की मौत हो गई थी।


राजस्थान में चिंकारा को मारने के मामले में सलमान खान जेल की हवा खा चुके हैं।


फिल्म इंडस्ट्री के लोग सलमान खान को प्यार से भाई कहते हैं।


*
  फिल्म का प्रचार करने में सलमान खान की दिलचस्पी बिल्कुल नहीं थी लेकिन जब उनकी फिल्में पिटने लगीं तो उन्होंने "दबंग" का खूब प्रचार किया और फिल्म सुपरहिट हुई।


* सलमान खान को इंटरव्यू देना पसंद नहीं है लेकिन फिल्म की पब्लिसिटि के लिए सब करना पड़ता है।


* सलमान खान एक ब्रेसलेट पहनते हैं जिसमें "फिरोजा" पत्थर लगा हुआ है। उनका मानना है कि वह उन्हें बुरी नजर से बचाता है।


*  सलमान खान कारों के भी शौकीन हैं। उनके पास  बीएमडबलू,  ऑडी, रेंज रोवर, लैंड क्रूजर जैसी मँहगी गाड़ियाँ हैं।    


* सलमान खान को जिम में जाना पसंद नहीं लेकिन उनका पेशा ऐसा है जिसमें उन्हें फिट रहना पड़ता है।


*  सलमान खान को मुम्बई के अलावा लंदन भी काफी पसंद है।


*  सलमान खान का पूरा नाम अब्दुल रशीद सलीम सलमान खान है।


*
  देश के कुछ शहरों में  बीइंग ह्यूमन  शॉप खोली गई हैं।जिसकी आमदनी को भलाई के कामों में लगाया जाता है।  


*
  सलमान खान का जन्म 27 दिसम्बर 1965 को हुआ था।

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Monday, 26 December 2016

Amulya Khabar

1 जनवरी नहीं है साल का पहला दिन... जरूर पढ़ें यह आलेख

1 जनवरी नहीं है साल का पहला दिन... जरूर पढ़ें यह आलेख  
 Share On 26.12.2016 By: Deep Singh Yadav
न तो जनवरी साल का पहला मास है और न ही 1 जनवरी पहला दिन। जो आज तक जनवरी को पहला महीना मानते आए हैं, वे जरा इस बात पर विचार करें...! 

सितंबर, अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर क्रम से 7वां, 8वां, 9वां और 10वां महीना होना चाहिए जबकि ऐसा नहीं है। ये क्रम से 9वां, 10वां, 11वां और 12वां महीना है। हिन्दी में 7 को सप्त, 8 को अष्ट कहा जाता है। इससे september तथा October बना। नवंबर में तो सीधे-सीधे हिन्दी के 'नव' को ले लिया गया है तथा 10 अंग्रेजी में 'Dec' बन जाता है जिससे December बन गया। ऐसा इसलिए कि 1752 के पहले दिसंबर 10वां महीना ही हुआ  करता था। 

इसका एक प्रमाण और है। जरा विचार कीजिए कि 25 दिसंबर यानी क्रिसमस को X-mas क्यों कहा जाता है? इसका उत्तर यह है कि 'X' रोमन लिपि में 10 का प्रतीक है और mas यानी मास अर्थात महीना।   चूंकि दिसंबर 10वां महीना हुआ करता था इसलिए 25 दिसंबर 10वां महीना यानी X-mas से प्रचलित हो गया। इन सब बातों से यह निष्कर्ष निकलता है कि या तो अंग्रेज हमारे पंचांग के अनुसार ही चलते थे या तो उनका 12 के बजाय 10 महीना ही हुआ करता था। 

ल को 365 के बजाय 305 दिन का रखना तो बहुत बड़ी मूर्खता है तो ज्यादा संभावना इसी बात की है कि प्राचीनकाल में अंग्रेज भारतीयों के प्रभाव में थे। इस कारण वे सब कुछ भारतीयों जैसा ही करते थे और इंग्लैंड ही  क्या, पूरा विश्व ही भारतीयों के प्रभाव में था जिसका प्रमाण यह है कि नया साल भले ही वे 1 जनवरी को मना लें, पर उनका नया बही-खाता 1 अप्रैल से ही शुरू होता है।

लगभग पूरे विश्व में वित्त-वर्ष अप्रैल से लेकर मार्च तक होता है यानी मार्च में अंत और अप्रैल से शुरू। भारतीय अप्रैल में अपना नया साल मनाते थे तो क्या यह इस बात का प्रमाण नहीं है कि पूरे विश्व को   भारतीयों ने अपने अधीन रखा था? 

इसका अन्य प्रमाण देखिए कि अंग्रेज अपनी तारीख या दिन 12 बजे रात से बदल देते हैं। दिन की शुरुआत सूर्योदय से होती है तो 12 बजे रात से नया दिन का क्या तुक बनता है? तुक बनता है  कि    भारत में नया दिन सुबह से गिना जाता है। सूर्योदय से करीब दो-ढाई घंटे पहले के समय को ब्रह्म मुहूर्त की बेला कहा जाता है और यहां से नए दिन की शुरुआत होती है यानी कि करीब 5 से 5.30 के आस-पास। और इस समय इंग्लैंड में समय रात 12 बजे के आस-पास का होता है। चूंकि वे भारतीयों के प्रभाव में थे इसलिए वे अपना दिन भी भारतीयों के दिन से मिलाकर रखना चाहते थे इसलिए उन लोगों ने रात के 12 बजे से ही नया  दिन और तारीख बदलने का नियम अपना लिया। 

जरा सोचिए, वे लोग अब तक हमारे अधीन हैं, हमारा अनुसरण करते हैं और हम राजा होकर भी खुद अपने अनुचर का, अपने अनुसरणकर्ता का या सीधे-सीधे कहूं तो अपने दास का ही हम दास बनने को बेताब हैं?    कितनी बड़ी विडंबना है यह! मैं यह नहीं कहूंगा कि आप आज 31 दिसंबर को रात के 12 बजने का बेसब्री से इंतजार न करिए या 12 बजे नए साल की खुशी में दारू मत पीजिए या नॉनवेज मत खाइए। 
मैं तो बस यह कहूंगा कि देखिए खुद को आप, पहचानिए अपने आपको। हम भारतीय गुरु हैं, सम्राट हैं तथा किसी का अनुसरण नहीं करते हैं। अंग्रेजों का दिया हुआ नया साल हमें नहीं चाहिए। जब सारे त्याहोर हम भारतीय संस्कृति के रीति-रिवाजों के अनुसार ही मनाते हैं, तो नया साल क्यों नहीं? 
स्रोत- पं. प्रणयन एम. पाठक ( वेब दुनियाँ)

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Sunday, 25 December 2016

Amulya Khabar

Tulsi Benefits in Hindi / Tulsi ke fayde in Hindi >> तुलसी के फायदे और उपयोग...





Tulsi Benefits in Hindi / Tulsi ke fayde in Hindi...



तुलसी के फायदे और उपयोग...



 Posted on 25.12.2016 By: Deep Singh Yadav


हिंदू धर्म में तुलसी का विशेष धार्मिक महत्व होता है। तुलसी स्वास्थ्य के लिए भी बहुत लाभदायक होती है। वैज्ञानिकों ने भी तुलसी में पाये जाने वाले गुणों की पुष्टि की है। तुलसी को पवित्र मानकर इसकी पूजा की जाती है। सबसे अच्छी बात तुलसी को दवाई के रुप में लेने से इसका कोई साइड इफैक्ट नहीं होता है।

तो आइए अब जानते हैं कि तुलसी के क्या क्या फायदे हैं.....


* खाँसी...तुलसी की पत्तियों को अदरक के साथ चबाने से  खाँसी में आराम मिलता है और चाय के साथ उबालकर पीने से गले की खराश दूर होती है।


* बवासीर.....तुलसी के बीजों का चूर्ण बनाकर दही के साथ लेने से बवासीर जैसी कष्टदायक बीमारी का खात्मा हो जाता है।


* चक्कर आना.....शहद में तुलसी के पत्तों का रस मिलाकर चाटने से चक्कर आना बंद हो जाता है।


* त्वचा में निखार.....तुलसी और नींबू का रस बराबर मात्रा में मिलाकर चेहरे पर लगाने से चेहरे पर निखार आता है और फुसिंयाँ एंव झाइयाँ ठीक हो जातीं हैं।


* कान दर्द..... तुलसी के पत्तों का रस और लहसुन के रस को  आग पर भून लीजिए, फिर हल्का गुनगुना कान में डालिए। कान दर्द ठीक हो जायेगा। ध्यान रखें कान में तेल डालते समय गर्म नहीं होना चाहिए। कान की समस्‍याओं जैसे कान बहना, दर्द होना और कम सुनाई देना आदि में तुलसी बहुत ही फायदेमंद होती है।


* उल्टी .....तुलसी का रस, अदरक का रस एंव छोटी इलाइची को समान मात्रा में लेने से उल्टी नहीं होती है।


* दस्त.....तुलसी के पत्ते भुने जीरे के साथ मिलाकर शहद के साथ दिन में 2 से 3 बार चाटने से आराम मिलता है।


* आँखों मे जलन..... यदि आपकी आँखों मे जलन होती है तो श्यामा तुलसी का अर्क 1- 1 बूँद आँखों में डालना चाहिए। आपको सलाह दी जाती है कि इस उपाय को आजमाने से पहले नेत्र चिकित्सक से सलाह जरूर ले लें।


* सिर दर्द..... अगर अक्सर आपको सिर दर्द रहता है और आप दवाइयाँ खाते खाते परेशान है स्थाई आराम नहीं मिल रहा है तो आप कुछ दिनों तक तुलसी का काढ़ा बनाकर पीजिए आराम मिलेगा।


* मुँह की बदबू.....अगर आपके मुँह में बदबू आती है तो आप तुलसी के पत्तों को सुखाकर उनका चूर्ण बना लें फिर सरसों के तेल में मिलाकर कुल्ला करें, राहत महसूस करेंगे। पायरिया में भी फायदा होगा।


* तनावरोधी.....तुलसी में तनावरोधी गुण भी पाये जाते हैं। प्रतिदिन 8 से 10 तुलसी के पत्तों का सेवन करने से तनाव से लड़ने की ताकत आती है।


* किडनी स्टोन.....तुलसी की पत्तियों को उबालकर उसका अर्क बना लें। शहद के साथ इस अर्क को मिलाकर 5 से 6 महीने तक सेवन करें किडनी स्टोन पेशाव से साथ बाहर निकल जायेगा।

* दाद, खाज.....दाद, खाज,  खुजली या त्वचा में संक्रमण होने पर तुलसी के अर्क को लगायें आराम मिलेगा।


* साँस, दमा.....तुलसी, अदरक और शहद का काढ़ा बना कर पीने से साँस नली की सूजन, कफ, दमा और सर्दी में फायदेमंद होती है।


* बुखार..... तुलसी का अर्क पीने से बुखार में राहत मिलती है।


* लीवर.....जिन्हें लीवर की समस्या है उन लोगों को सुबह खाली पेट तुलसी की 10-12 पत्तियों को खाना चाहिए, आराम मिलेगा।


* सर्दी जल्दी लगना..... जिन्हें सर्दी जल्दी लग जाती है उन्हें तुलसी की 8-10 पत्तियों को एक कप दूध में उबालकर पीना चाहिए।




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Saturday, 24 December 2016

Amulya Khabar

Motivational Video in Hindi >> केवल ज़िद्दी आदमी ही इतिहास रचता है,By-Vivek Bindra ( motivational Speaker)

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Thursday, 22 December 2016

Amulya Khabar

Motivational Video in Hindi >> Five Step to change your life in Hindi >> By Vivek Bindra (Motivational Speaker)


Motivational Video in Hindi...
Five Step to change your life in Hindi...By Vivek Bindra (Motivational Speaker)
Share By: Deep Singh Yadav, 23.12.2016
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Wednesday, 21 December 2016

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Tony Robbins Quotes / Thoughts in Hindi >> टोनी रॉबिन्स उध्दरण/ कथन /अनमोल विचार








Tony Robbins Quotes / Thoughts in Hindi... टोनी रॉबिन्स उध्दरण/ कथन /अनमोल विचार

Posted On 22.12.2016 By: Deep Singh Yadav

  * हम जिस चीज पर ध्यान देते हैं,  हमारी ऊर्जा उसी ओर बहती  है।

  * लक्ष्य बनाना अदृश्य को दृश्य में बदलने का पहला कदम है ।

  * सफलता का राज़ यह सीखने है कि आप दर्द और खुशी का औप्योग कैसे करते हैं न कि दर्द और खुशी आपका उपयोग करती है। यदि आप ऐसा करते हैं, तो आप अपने जीवन के नियंत्रण में हैं। यदि आप ऐसा नहीं करते हैं, तो जीवन आपको नियंत्रित करता है।


 *  प्रभावी ढंग से संवाद करने के लिए हमें एहसास होना चाहिए कि हम सभी अलग-अलग तरह से दुनिया को देखते हैं और इस समझ को एक गाइड के रूप में दूसरों से संवाद करने में प्रयोग करना चाहिए।


  * अपनी समस्याओं को पहचानें, लेकिन अपनी शक्ति और ऊर्जा समाधान में लगायें।


  * सफलता का राज ये सीखना है कि कैसे दर्द और ख़ुशी का उपयोग किया जाए बजाये      इसके कि दर्द और ख़ुशी कैसे आपका उपयोग करते हैं। अगर आप ये करते हैं, आप अपनी लाइफ के कंट्रोल में हैं। अगर नहीं तो लाइफ आपको कंट्रोल करती है।


  * जीवन एक उपहार है, और यह हमें विशेषाधिकार, अवसर, और बड़ा बनकर अधिकवापस करने की जिम्मेदारी प्रदान करता है।


 * अपने फैसले को लेकर प्रतिबद्ध रहे , लेकिन अपने तरीके को लेकर लचीले रहें।


 * नए साल = एक नया जीवन! आज निर्णय लें जो आप बनेगें, आप क्या देंगे, आप कैसे जियेंगे।


 * विश्वास में सृजन करने की शक्ति होती है और विनाश करने की भी।


 * नेतृत्वकर्ता समस्या पर 5% समय खर्च करते हैं और समाधान पर अपने समय का 95% समय देते हैं। इसपर विजय प्राप्त करो और इसे कुचल दो!


 * आपके निर्णय के क्षणों में आपकी नियति आकार लेती है।


 * आपका अतीत आपके भविष्य के समान नहीं होता है।


 * केवल वे जिन्होंने ईमानदार और निस्वार्थ योगदान की शक्ति को जान लिया है, जीवन की असली ख़ुशी अनुभव करते हैं : सच्ची परिपूर्णता ।


 * आपका जीवन उसी क्षण बदल जाता है जब आप एक नया, अनुकूल, और प्रतिबद्ध फैसला लेते हैं।


 * एक कारण कि हममें से इतने कम लोग वो हासिल कर पाते हैं जो हम सचमुच चाहते हैं कि हम कभी अपना ध्यान केंद्रित नहीं करते हम कभी अपनी शक्ति केंद्रित नहीं करते। अधिकतर लोग जीवन में इधर-उधर के काम करते रहते हैं , कभी भी किसी एक चीज में मास्टरी करने की नहीं सोचते।


* यदि आप  वह करते है जो आपने हमेशा किया है, तो आपको वही मिलेगा जो आपको हमेशा से मिला है।
 आपके प्रभाव की सीमा केवल आपकी कल्पना और प्रतिबद्धता है।


* यह आपके निर्णय का वह क्षण होता है जो आपके भाग्य को आकार प्रदान करता है।
 सफलता का मार्ग है बड़ी, दृढ कार्रवाई करना ।


 * जीवन में आप या तो प्रेरणा या हताशा की जरूरत होती है।


* हम अपना जीवन बदल सकते हैं। हम जो चाहते हैं बिलकुल वही कर, पा और हो सकते हैं।


* सफल लोग बेहतर सवाल पूछते हैं, और परिणाम के रूप में, वे बेहतर जवाब पाते हैं।


* लोग आलसी नहीं होते। बस उनके लक्ष्य कमजोर हैं - यानि ऐसे लक्ष्य जो उन्हें प्रेरित नहीं करते।
 चीजों के अर्थ नहीं होते हैं। हम सभी चीजों को अर्थ देते हैं।


* मैं आपको अपनी लाइफ एक मास्टरपीस बनाने की चुनौती देता हूँ। मैं चुनौती देता हूँ कि आप उन लोगों की श्रेणी में शामिल हों जो जो कहते हैं वो करते हैं, जो अपनी बात पर चलते हैं।


* अगर आप सफल होना चाहते हैं, तो वैसे व्यक्ति की खोज करें जिसने आपकी इच्छा के मुताबिक परिणाम प्राप्त किया हो और आप उनका अनुसरण कीजिये और आपको भी वैसा ही परिणाम प्राप्त होगा।


* हर किसी का जीवन या तो पुरस्कृत या एक उदाहरण  होता है।


 * अधिकांश लोग जीवन में असफल होते हैं क्योंकि वे छोटी बातों में प्रमुख रूप से फसे रहते हैं।


* समस्याओं के वगैर रहने वाले लोग वे होते हैं जो कब्रिस्तान में रहते हैं।


 *जब आप आभारी होते हैं डर गायब हो जाता है और प्राचुर्य दिखता है।


 *अवसर के साथ तैयारी का मिलन उस संतति की उतपत्ति करता है जिसे हम भाग्य कहते हैं।























































































































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Monday, 19 December 2016

Amulya Khabar

Prediction about INDIA and PAKISTAN >> चौंकाने वाली भविष्यवाणी, 2017 में नहीं रहेगा पाकिस्तान

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Prediction about INDIA and PAKISTAN...
 चौंकाने वाली भविष्यवाणी, 2017 में नहीं रहेगा पाकिस्तान ...

भारत की सरजमीं से निकला पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान आए दिन अपनी हरकतों से बाज नहीं आता है। भारत समेत दुनिया के अधिकांश देश उसे आतंकवाद को बढ़ावा देने वाला देश मान चुके हैं। आने वाले साल में सितारों की गणना के आधार पर कहा जा रहा है कि पाकिस्तान का इस दुनिया से नामोनिशान मिट जाएगा।
  पाक के नष्ट होने व उसके द्वारा महाविनाशकारी परमाणु अस्त्रों के प्रयोग की भविष्यवाणी मेदनी ज्योतिष द्वारा वर्ष 2012 में ही की जा चुकी है। तब केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी अत: इस भविष्यवाणी की बहुतआलोचना की गई थी किन्तु काल के प्रवाह मे आज यह भविष्यवाणी सत्य प्रतीत हो रही है।
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने परमाणु हथियारों के प्रयोग की धमकी देकर इस भविष्यवाणी की पुष्टि की है।
 
मेदनी ज्योतिष के सुदर्शन चक्र की ज्योतिषीय गणना के अनुसार भारत की कुण्डली का सुक्ष्म विश्लेषण किया गया है। उसके अनुसार स्वतंत्र भारत की जन्मकुंडली में कर्क राशिस्थ चन्द्र, सूर्य, बुध, शुक्र एक साथ आकर पाकिस्तान के मूलभाव से षड़ाष्टक योग बना रहे हैं।

स्वतंत्र भारत की जन्मकुंडली वृषभ लग्न की है। कुंडली के लग्न में ही राहू, द्वितीय धनभाव में मारकेश मंगल, तीसरे पराक्रम भाव में चन्द्र, सूर्य, बुध, शुक्र और शनि, छठे शत्रु भाव में बृहस्पति और सातवें भाव में केतु बैठे हैं। जिसके स्वामी स्वयं भगवान् सूर्य हैं, मेदिनी ज्योतिष में किसी भी राष्ट्र की जन्मकुंडली का लग्न, द्वितीय, चतुर्थ, छठा और नवम् भाव अति महत्वपूर्ण होता है।

लग्न से उस देश की प्रगति, शासन की पारदर्शिता, सत्ता की ईमानदारी, द्वीतीय भाव से धन, पड़ोसी राष्ट्रों से संबंध, चतुर्थ भाव से देश की जनता की मानसिक स्थिति और छठे भाव से ऋण, रोग और शत्रु के बारे में  जाना जाता है। 

वर्तमान समय में भारत की कुंडली में अनंत कालसर्प योग बन रहा है तथा राहु की महादशा 06 जुलाई 2011 से चल रही है। उसमें भी अगस्त 2016 से शनि की अंतर्दशा आरंभ हो चुकी है। इन सभी योगों के परिणामस्वरूप 15  अगस्त 2016 के बाद देश के प्रधानमंत्री पाकिस्तान के संदर्भ में कठोर कदम उठाएंगे।  नतीजतन सर्जिकल स्ट्राइक हमारे सामने हैं। 26 जनवरी 2017 से शनि धनु राशि में जा रहे हैं जो दशम, दुतीय तथा पंचम भाव को पूर्ण दृष्टि से देखेंगे। शनि भारत की जन्मकुंडली में अकेले ही राजयोग कारक हैं अतः आने वाला वर्ष 2017 भारत की एकता अखंडता एवं संप्रभुता के लिए गौरवपूर्ण तथा वरदानदायक होगा। 
ज्योतिष के अनुसार पाकिस्तान का निर्माण दिनांक 14-08 -1947 समय सुबह 9.30 बजे स्थान कराची में हुआ था। जिसमें भाग्य स्थान से पूर्ण कालसर्प योग है। इस के आधार पर पाकिस्तान की कुंडली कन्या लग्न तथा मिथुन राशि की बनती है। लग्न कुंडली के अनुसार नौवें घर में बैठा हुआ राहु पाकिस्तान की मानवता विरोधी ताकत तथा हिंसात्मक रवैये को दर्शाता है।

दसवें घर में अष्टमेश मंगल की चन्द्र के साथ युति पाक सरकार की शांति विरोधी नीति व भारत के प्रति प्रतिशोध तथा कानून व्यवस्था को प्रकट करती है। लग्नेश बुध का सूर्य और शुक्र के साथ एकादश भाव में युति बनाना मानव विरोधी ताकत के प्रति शक्ति का प्रयोग तथा उसमें अन्य राष्ट्रों का सहयोग भी दर्शाता है।
भारत एवम् पाक की प्रचलित नाम राशि क्रमश: धनु एवम् कन्या है। धनु एवम् कन्या राशि के स्वामी क्रमश: देव गुरु-बृहस्पति एवम् बुध है। बुध एवम् बृहस्पति में परस्पर शत्रुता है। देवगुरु बृहस्पति क्षमावान,  ज्ञानवान, अहिंसावादी एवम् सात्विक ग्रह है, जबकि इसके विपरीत बुध बेहद चालाक-अवसरवादी-बेईमान एवम् समयानुसार बदलाव की प्रकृति के मालिक है।

ग्रहों की स्थिति यह भी स्पष्ट करती है कि पाकिस्तान के कुटिल सैन्य तंत्र के कारण आतंकवादी तत्व पाकिस्तान से महाविनाशकारी परमाणु अस्त्रों को प्राप्त कर सकते हैं, जिससे भारत के गुजरात प्रांत में अहमदाबाद एवम् राजकोट क्षेत्र विशेष प्रभावित होंगे। पाकिस्तान आयोजित आतंकवादी आक्रमण के कारण भारत-पाक संबंधों में तनाव चरम सीमा पर होगा। भारत-पाकिस्तान व्यापार संधि समाप्त होगी। यह घटना 2017 में हो सकती है इस भारत-पाक युद्ध में पाक को चीन का पूर्ण सहयोग होगा।

2017 में भारत- पाक युद्ध की आशंका है किन्तु बाद में अंतर्राष्ट्रीय दबाव के चलते चीन पीछे हटेगा और पाकिस्तान तीन खंड में बंट जाएगा और इस युद्ध में पाकिस्तान परमाणु हथियारों का प्रयोग करेगा।

ज्योतिष गणना बताती है कि उक्त परमाणु हथियार के प्रयोग से इस युद्ध में लगभग 8,000 व्यक्तियों की मृत्यु हो सकती है और लगभग 35,000 व्यक्ति इस हमले से सीधा प्रभावित होंगे।
भारत की जन्मकुंडली के द्वितीय भाव में मारकेश मंगल बैठा है तथा कुंंडली  में अनंत नामक कालसर्प योग बना हुआ है जो स्वत: भंग होकर काल अमृत योग में परिवर्तित हो जा रहा है। लेकिन देश को खतरा उन गद्दारों से होगा जो भारत में ही रह कर आतंकवाद, जातिवाद, सम्प्रदायवाद और साम्यवाद जैसे संगीन अपराधों को जन्म देते हैं यही लोग इस युद्ध में अप्रत्यक्ष रूप से पाकिस्तान की मदद करेंगे। ख़ुशी की बात यह है कि भगवान सूर्य और शनि ने अकेले ही राजयोग बनाया है इसलिए भारत देश की विजय सुनिश्चित है।
साभार‍‍- योगेश मिश्र (वेब दुनिया)
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Sunday, 18 December 2016

Amulya Khabar

About New Army Chief Bipin Rawat >> नए आर्मी चीफ बिपिन रावत से जुड़ी कुछ बातें

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About New Army Chief Bipin Rawat/ नए आर्मी चीफ बिपिन रावत से जुड़ी कुछ बातें... 
Posted On 19.12.2016 By: Deep Singh Yadav 

सरकार ने उप थल सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल बिपिन रावत को देश का नया थल सेना प्रमुख नियुक्त किया है। बिपिन रावत की नियुक्ति उनके दो वरिष्ठ अधिकारियों से आगे बढ़ाते हुए की गई है। वहीं, एयर मार्शल बी.एस. धनोआ चीफ ऑफ एयर स्टाफ होंगे। वे मौजूदा एयर चीफ मार्शल अरूप राहा की जगह लेंगे। वर्तमान सेनाध्यक्ष दलबीर सिंह सुहाग और वायु सेनाध्यक्ष अरुप राहा दोनों 31 दिसंबर को सेवानिवृत्त हो रहे हैं।

1. बिपिन रावत ने भारतीय सेना दिसंबर 1978 में ज्वॉइन की थी। 1978 में इंडियन मिलिट्री एकेडमी देहरादून से ग्रेजुएशन किया इस दौरान उन्होंने वहां स्वोर्ड ऑफ ऑनर हासिल किया। इसके बाद वे गोरखा राइफल्स की पांचवीं बटालियन में कमीशन हुए। 


2.  लेफ्टिनेंट जनरल बिपिन रावत के पिता भी सेना में लेफ्टिनेंट जनरल थे। लेफ्टिनेंट जनरल रावत की पढ़ाई- लिखाई शिमला के सेंट एडवर्ड स्कूल में हुई। 


3.वे गोरखा बटालियन से सेना प्रमुख बनने वाले लगातार दुसरे अफसर हैं। वतर्मान सेना प्रमुख दलबीर सिहं सुहाग भी गोरखा राइफल्स से हैं।


4.  वाइस चीफ नियुक्त किए जाने से पहले रावत को पुणे स्थित दक्षिणी कमान का कमांडिंग ऑफिसर बनाया गया था। मिलिट्री ऑपरेशंस डायरेक्टोरेट में वे जनरल स्टाफ ऑफिसर ग्रेड 2 रहे।


5. लेफ्टिनेंट जनरल बिपिन रावत को ऊंची चोटियों की लड़ाई में महारत हासिल है। वे कश्मीर घाटी के मामलों पर अच्छी पकड़ रखते हैं। लेफ्टिनेंट जनरल रावत को काउंटर इंसर्जेंसी का विशेषज्ञ माना जाता है। कश्मीर घाटी में राष्ट्रीय राइफल्स और इंफैंट्री डिवीजन के वे कमांडिंग ऑफिसर रह चुके हैं। 


6. लेफ्टिनेंट जनरल बिपिन रावत एक हेलीकॉप्टर दुर्घटना में चमत्कारिक रुप से बच गए थे जब वे दीमापुर स्थित सेना मुख्यालय कोर 3 के कमांडर थे।


7. लेफ्टिनेंट जनरल बिपिन रावत 2008 में कांगों में यूएन के शांति मिशन को कमान संभाल चुके हैं। इस दौरान उनके द्वारा किए गए काम काफी सराहनीय रहे। यूनाइटेड नेशंस के साथ काम करते हुए भी उनको दो बार फोर्स कमांडर कमेंडेशन का अवार्ड दिया गया।


8. लेफ्टिनेंट जनरल बिपिन रावत ने मिलिट्री मीडिया स्ट्रेटजी स्टडीज में रिसर्च की जिसके लिए 2011 में चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी ने उनको पीएचडी की उपाधि दी।
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Saturday, 17 December 2016

Amulya Khabar

Film Release in 2017 >> 2017 में रिलीज होने वाली बड़ी फिल्में



Film Release in 2017...2017 में रिलीज होने वाली बड़ी फिल्में...
 Posted On 18.12.2016 By: Deep Singh Yadav
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