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Wednesday, 10 May 2017

Amulya Khabar

शास्त्रों के अनुसार इन संकेतो से आप जान सकते है, Death Date in Hindi !



शास्त्रों के अनुसार इन संकेतो से आप जान सकते है, Death Date in Hindi !
 posted on 10.05.2017 By: Deep Singh Yadav
इस दुनियाँ में मृत्यु सृष्टि का एक ऐसा नियम है, जिसे कोई नहीं झुठला सकता । जिसने इस धरती पर जन्म लिया है, उसकी एक न एक दिन मृत्यु  अवश्य होगी।  व्यक्ति के जन्म के साथ ही ईश्वर द्वारा यह भी निश्चित कर दिया जाता है कि किसी व्यक्ति की मृत्यु कब, कहाँ और कैसे होगी। ऐसे में इस कड़वे सच को जानते हुए भी हर व्यक्ति इससे बचने का प्रयास  करता है। जिसके चलते वह हमेशा इस चिंता में रहता है कि कही उसे या उसके परिजनों,रिश्तेदारों को कुछ हो तो नहीं जाएगा।

 इसमें कोई दोराय नहीं कि जैसे जीवन एक सत्य है, ठीक उसी तरह जीवन के बाद मृत्यु का आना भी एक बहुत बड़ा सत्य है. पर वही मृत्यु के बाद क्या होता है, इंसान की आत्मा कहाँ जाती है और क्या उसका दोबारा पुनर्जन्म होता है, ये सब बातें आज भी एक रहस्य की तरह बनी हुई हैं। इसके इलावा भले ही मनुष्य को अब तक ये पता नहीं चला कि उसका अंत कितना पास है, पर हमारे ग्रंथो और पुराणों में कुछ ऐसे संकेतो के बारे में बताया गया है, जिनकी सहायता से हमें ये पता चल सकता है, कि व्यक्ति का अंतिम समय यानि उसकी मृत्यु का समय कब आएगा।

 कि शिव पुराण में कुछ ऐसी बातें कही गयी है. जिससे व्यक्ति के मृत्यु के समय को ज्ञात किया जा सकता है। आज हम शिव पुराण में मृत्यु से सम्बन्धित लिखी इन्ही बातों के बारे में आपको बताने जा रहे हैं...

* चेहरे के रंग में बदलाव...  शिव पुराण के अनुसार यदि किसी व्यक्ति के चेहरे का रंग पीला, सफ़ेद या हल्का लाल पड़ जाए तो यह इस बात का संकेत है कि उस व्यक्ति की मृत्यु छह महीने के अंदर होनी निश्चित है।

* परछाई का न दिखना...  हम जब भी पानी या तेल से भरे किसी बर्तन में झाँकते है तो उसमे हमें अपनी परछाई साफ़ नजर आती है, पर ऐसे में यदि व्यक्ति को तेल या पानी में अपनी परछाई दिखाई देना बंद हो जाए तो यह इस बात का संकेत है, कि उसकी मृत्यु पास है।

* शीशे में चेहरा न दिखाई दे...  इसके इलावा यदि व्यक्ति को धूप या शीशे में भी अपनी परछाई दिखना बंद हो जाए, तो यह भी व्यक्ति की मृत्यु का बड़ा संकेत है

* वस्तु का काला नजर आना...   जिस व्यक्ति की मृत्यु का समय बहुत नजदीक होता है, उसे रंगो की पहचान करने में दिक्क्त आती है. ऐसे में उसे हर वस्तु काले रंग की दिखाई देती है।

* बाएं हाथ का काँपना...  शिव पुराण के अनुसार यदि किसी व्यक्ति का बाया हाथ एक हफ्ते तक लगातार कांपता रहे, तो यह इस बात का संकेत है, कि उस व्यक्ति की मृत्यु एक महीने में होना तय है.


* इन्द्रियों में कड़ापन..  इसके इलावा यदि मनुष्य की पाँचों इन्द्रियों जैसे आँख. नाक, कान, जीभ और हाथ इन सभी में कड़ापन आ जाए, तो यह भी व्यक्ति की मृत्यु को सुनिश्चित करने के संकेत हैं।


* नाक का  दिखाई न  देना...  आम तौर पर हर व्यक्ति अपनी नाक को देख सकता है, फिर चाहे वो उसे धुंधली ही क्यों न दिखाई देती हो, पर यदि व्यक्ति को नाक दिखना बिलकुल बंद  हो जाए तो ऐसा कहा जाता है, कि व्यक्ति की आँखे मृत्यु के समय ऊपर की तरफ मुड़ने लगती हैं।


* रौशनी देखने में असमर्थ होना...  मनुष्य को सूर्य, चन्द्रमा और आग से ही रौशनी दिखाई देती है, पर  जिस व्यक्ति की मृत्यु पास हो उसके लिए इन सब में दिखने वाली रौशनी केवल लाल रंग में परिवर्तित हो जाती है।

* खंडित चाँद...  इसके अनुसार यदि व्यक्ति की मृत्यु कुछ ही क्षणों में होने वाली हो तो उसे चाँद में दरारे या खंडित चाँद नजर आता है।

* मृत परिजनों का एहसास...   यदि किसी व्यक्ति की मृत्यु नजदीक हो तो उसे अपने मृत परिजनों का एहसास होने लगता है. ऐसे में यह एहसास इतना गहरा होता है, कि उस व्यक्ति को लगता है, कि उसके मृत परिजन उसके करीब ही है और वह उन्हें सुन सकता है।


* अनजान साये के साथ होने का एहसास...  जब किसी व्यक्ति की मृत्यु में मात्र दो तीन दिन का समय रह जाता है, तो उसे यह एहसास होने लगता है कि उसके साथ कोई अनजान साया भी रह रहा है।


* ध्रुव तारे का न दिखना...  इसके अनुसार यदि किसी व्यक्ति की मृत्यु पास हो तो वो आसमान में सबसे अधिक चमकने वाले तारे यानि ध्रुव तारे को नहीं देख पाता है। यह भी इस बात का संकेत है कि व्यक्ति की मृत्यु छह महीने के अंदर हो जाएगी।

* शीशे में किसी और का चेहरा नजर आना...  आमतौर पर जब हम शीशा देखते है, तो हमें उसमे अपना प्रतिबिम्ब ही नजर आता है। पर यदि व्यक्ति को शीशे में देखने पर किसी और का चेहरा नजर आये तो यह उसकी  मृत्य 24 घंटे में होने का संकेत है।
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Thursday, 4 May 2017

Amulya Khabar

गुरुवार (वृहस्पति वार) की पौराणिक व्रत कथा...Brihaspati Dev religious story in Hindi...







गुरुवार (वृहस्पति वार) की पौराणिक व्रत कथा...Brihaspati Dev religious story in Hindi...

Posted on 04.05.2017 By; Deep Singh Yadav 

 गुरुवार व्रत करने से वृहस्पति देवता प्रसन्न होते हैं। यह व्रत अत्यंत फलदायी है। अग्निपुराण के अनुसार अनुराधा नक्षत्र युक्त गुरुवार से आरंभ करके सात गुरुवार व्रत करने से वृहस्पति ग्रह की  पीड़ा से  मुक्ति मिलती है।  

 प्राचीन समय की बात है। एक नगर में एक बड़ा व्यापारी रहता था। वह जहाजों में माल लदवाकर दूसरे देशों में भेजा करता था। वह खूब धन कमाता और  दिल खोलकर दान भी करता था, परंतु उसकी पत्नी अत्यंत कंजूस थी। वह किसी को एक सिक्का भी नहीं देने देती थी।
एक बार सेठ जब दूसरे देश व्यापार करने गया तो पीछे से वृहस्पति देव ने साधु-वेश में उसकी पत्नी से भिक्षा मांगी। व्यापारी की पत्नी वृहस्पति देव से बोली हे साधु महाराज, मैं इस दान और पुण्य से तंग आ गई हूँ।  आप कोई ऐसा उपाय बतायें, जिससे मेरा सारा धन नष्ट हो जाए और मैं आराम से रह सकूं। मैं यह धन लुटता हुआ नहीं देख सकती। 
 वृहस्पति देव ने कहा, हे देवी, तुम बहुत विचित्र हो, संतान और धन से कोई दुखी होता है। अगर अधिक धन है तो इसे शुभ कार्यों में लगाओ, कुंवारी कन्याओं का विवाह कराओ, विद्यालय और बाग-बगीचों का निर्माण कराओ। ऐसे पुण्य कार्य करने से तुम्हारा लोक-परलोक सुधर सकता है, परन्तु साधु की इन बातों से व्यापारी की पत्नी को ख़ुशी नहीं हुई। उसने कहा- मुझे ऐसे धन की आवश्यकता नहीं है, जिसे मैं दान दूं।  


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  तब वृहस्पति देव बोले "यदि तुम्हारी ऐसी इच्छा है तो तुम एक उपाय करना। सात वृहस्पति वार घर को गोबर से लीपना, अपने केशों को पीली मिटटी से धोना, केशों को धोते समय स्नान करना, व्यापारी से हजामत बनाने को कहना, भोजन में मांस-मदिरा खाना, कपड़े अपने घर धोना। ऐसा करने से तुम्हारा सारा धन नष्ट हो जाएगा। इतना कहकर वृहस्पति देव अंतर्ध्यान हो गए।  

व्यापारी की पत्नी ने वृहस्पति देव के कहे अनुसार सात वृहस्पति वार वैसा ही करने का निश्चय किया। केवल तीन वृहस्पति वार बीते थे कि उसी समस्त धन-संपत्ति नष्ट हो गई और वह परलोक सिधार गई।   जब व्यापारी वापस आया तो उसने देखा कि उसका सब कुछ नष्ट हो चुका है। उस व्यापारी ने अपनी पुत्री को सांत्वना दी और दूसरे नगर में जाकर बस गया। वहाँ वह जंगल से लकड़ी काटकर लाता और शहर में बेचता। इस तरह वह अपना जीवन व्यतीत करने लगा। 
एक दिन उसकी पुत्री ने दही खाने की इच्छा प्रकट की लेकिन व्यापारी के पास दही खरीदने के पैसे नहीं थे। वह अपनी पुत्री को आश्वासन देकर जंगल में लकड़ी काटने चला गया। वहाँ एक वृक्ष के नीचे बैठ अपनी पूर्व दशा पर विचार कर रोने लगा। उस दिन बृहस्पतिवार था। तभी वहां वृहस्पति देव साधु के रूप में सेठ के पास आए और बोले "हे मनुष्य, तू इस जंगल में किस चिंता में बैठा है?" 

  तब व्यापारी बोला "हे महाराज, आप सब कुछ जानते हैं।" इतना कहकर व्यापारी अपनी कहानी सुनाकर रो पड़ा। वृहस्पति देव बोले "देखो बेटा, तुम्हारी पत्नी ने वृहस्पति देव का अपमान किया था इसी कारण तुम्हारा यह हाल हुआ है लेकिन अब तुम किसी प्रकार की चिंता मत करो। तुम गुरुवार के दिन वृहस्पति देव का पाठ करो। दो पैसे के चने और गुड़ को लेकर जल के लोटे में शक्कर डालकर वह अमृत और प्रसाद अपने परिवार के सदस्यों और कथा सुनने वालों में बांट दो। स्वयं भी प्रसाद और चरणामृत लो। भगवान तुम्हारा अवश्य कल्याण करेंगे।" 
साधु की बात सुनकर व्यापारी बोला "महाराज। मुझे तो इतना भी नहीं बचता कि मैं अपनी पुत्री को दही लाकर दे सकूं।" इस पर साधु जी बोले "तुम लकड़ियां शहर में बेचने जाना, तुम्हें लकड़ियों के दाम पहले से  चौगुने मिलेंगे, जिससे तुम्हारे सारे कार्य सिद्ध हो जायेंगे।" 

उसने लकड़ियाँ काटीं और शहर में बेचने के लिए चल पड़ा। उसकी लकड़ियाँ अच्छे दाम में बिक गई जिससे उसने अपनी पुत्री के लिए दही लिया और गुरुवार की कथा हेतु चना, गुड़   लेकर कथा की और प्रसाद बांटकर स्वयं भी खाया। उसी दिन से उसकी सभी कठिनाइयां दूर होने लगीं, परंतु अगले वृहस्पति वार को वह कथा करना भूल गया।  

अगले दिन वहां के राजा ने एक बड़े यज्ञ का आयोजन कर पूरे नगर के लोगों के लिए भोज का आयोजन किया। राजा की आज्ञा अनुसार पूरा नगर राजा के महल में भोज करने गया।  लेकिन व्यापारी व उसकी पुत्री तनिक विलंब से पहुंचे, अत: उन दोनों को राजा ने महल में ले जाकर भोजन कराया। जब वे दोनों लौटकर आए तब रानी ने देखा कि उसका खूंटी पर टंगा हार गायब है।  रानी को व्यापारी और उसकी पुत्री पर संदेह हुआ कि उसका हार उन दोनों ने ही चुराया है। राजा की आज्ञा से उन दोनों को कारावास की कोठरी में कैद कर दिया गया। कैद में पड़कर दोनों अत्यंत दुःखी हुए।  वहाँ उन्होंने वृहस्पति देवता का स्मरण किया। बृहस्पति देव ने प्रकट होकर व्यापारी को उसकी भूल का आभास कराया और उन्हें सलाह दी कि गुरुवार के दिन कैदखाने के दरवाजे पर तुम्हें दो पैसे मिलेंगे उनसे तुम चने और मुनक्का मंगवाकर विधिपूर्वक वृहस्पति देवता का पूजन करना। तुम्हारे सब दुख दूर हो जाएंगे। 

वृहस्पति वार को कैदखाने के द्वार पर उन्हें दो पैसे मिले। बाहर सड़क पर एक स्त्री जा रही थी। व्यापारी ने उसे बुलाकार गुड़ और चने लाने को कहा। इसपर वह स्त्री बोली "मैं अपनी बहू के लिए गहने लेने जा रही हूं मेरे पास समय नहीं है।" इतना कहकर वह चली गई। थोड़ी देर बाद वहां से एक और स्त्री निकली, व्यापारी ने उसे बुलाकर कहा कि हे बहन मुझे वृहस्पति वार की कथा करनी है। तुम मुझे दो पैसे का गुड़-चना ला दो।  
वृहस्पति देव का नाम सुनकर वह स्त्री बोली "भाई, मैं तुम्हें अभी गुड़-चना लाकर देती हूं। मेरा इकलौता पुत्र मर गया है, मैं उसके लिए कफन लेने जा रही थी लेकिन मैं पहले तुम्हारा काम करूंगी, उसके बाद अपने पुत्र के लिए कफन लाऊंगी।" 

वह स्त्री बाजार से व्यापारी के लिए गुड़-चना ले आई और स्वयं भी वृहस्पति देव की कथा सुनी। कथा के समाप्त होने पर वह स्त्री कफन लेकर अपने घर गई। घर पर लोग उसके पुत्र की लाश को "राम नाम सत्य है"   कहते हुए श्मशान ले जाने की तैयारी कर रहे थे। स्त्री बोली "मुझे अपने लड़के का मुख देख लेने दो।" अपने पुत्र का मुख देखकर उस स्त्री ने उसके मुंह में प्रसाद और चरणामृत डाला। प्रसाद और चरणामृत के प्रभाव से वह पुन: जीवित हो गया। 


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पहली स्त्री जिसने वृहस्पति देव का निरादर किया था, वह जब अपने पुत्र के विवाह हेतु पुत्रवधू के लिए गहने लेकर लौटी और जैसे ही उसका पुत्र घोड़ी पर बैठकर निकला वैसे ही घोड़ी ने ऐसी  उछाल मारी कि वह घोड़ी से गिरकर मर गया। यह देख स्त्री रो-रोकर वृहस्पति देव से क्षमा याचना करने लगी। 

उस स्त्री की याचना से वृहस्पति देव साधु वेश में वहां पहुँचकर कहने लगे "देवी। तुम्हें अधिक विलाप करने की आवश्यकता नहीं है। यह वृहस्पति देव का अनादार करने के कारण हुआ है।  तुम वापस जाकर मेरे भक्त से क्षमा माँगकर कथा सुनो, तब ही तुम्हारी मनोकामना पूर्ण होगी।"

जेल में जाकर उस स्त्री ने व्यापारी से माफी माँगी और कथा सुनी। कथा के बाद वह प्रसाद और चरणामृत लेकर अपने घर वापस गई। घर आकर उसने चरणामृत अपने मृत पुत्र के मुख में डाला। चरणामृत के प्रभाव से उसका पुत्र भी जीवित हो उठा। उसी रात वृहस्पति देव राजा के सपने में आए और बोले  "हे राजन। तूने जिस व्यापारी और उसके पुत्री को जेल में कैद कर रखा है वह बिलकुल निर्दोष हैं। तुम्हारी रानी का हार वहीं खूँटी पर टंगा है।" 

   दिन निकला तो राजा रानी ने हार खूँटी पर लटका हुआ देखा। राजा ने उस व्यापारी और उसकी पुत्री को रिहा कर दिया और उन्हें आधा राज्य देकर उसकी पुत्री का विवाह उच्च कुल में करवाकर दहेज़ में हीरे-जवाहरात दिए।  

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Thursday, 27 April 2017

Amulya Khabar

Motivational Story in Hindi...मजबूत इरादे...






Motivational Story in Hindi...मजबूत इरादे...

Posted on 28.04.2017 By: Deep Singh Yadav

परेशानियाँ हमारे जीवन की एक सच्चाई है। कुछ लोग इस बात को समझ लेते हैं लेकिन कुछ लोग पूरे
जीवन भर इसका रोना रोते रहते हैं। ज़िंदगी के हर मोड़ पर हमारा सामना परेशानियों से होता है, इसके बिना ज़िंदगी की कल्पना नहीं की जा सकती।


अक्सर हमारे सामने मुसीबते आती है तो तो हम उनके सामने हताश, निराश हो जाते है। उस समय हमें कुछ समझ नहीं आता की क्या सही है और क्या गलत , क्या करें ,क्या न करें। हर व्यक्ति का परिस्थितियों को देखने का नज़रिया अलग अलग होता है। कई बार हमारी ज़िंदगी मे मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ता है। उस कठिन समय मे कुछ लोग टूट कर बिखर जाते है, तो कुछ संभल जाते है।
मनोविज्ञान के अनुसार इंसान किसी भी  समस्या को दो तरीको से देखता है...

1 समस्या पर focus करके...
2 समाधान पर focus करके...


समस्या पर focus करके अक्सर मुसीबतों मे ढेर हो जाते है। इस तरह के लोग किसी भी परेशानी में उसका समाधान ढ़ूँढ़नें की बजाय उस परेशानी के बारे मे ज्यादा सोचते है। वही दूसरी ओर समाधान पर focus करके परेशानियों मे उसके समाधान के बारे मे ज्यादा सोचते है। इस तरह के लोग परेशानियों  का मुकाबला मजबूती के साथ करते है।

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मित्रो,  आज मैं आपके साथ एक महान solution focus व्यकि्त की कहानी बताने  जा रहा हूँ जो आपको किसी भी परेशानी से लड़ने के लिए प्रोत्साहित  करेगी। मित्रो, आपने नेपोलियन बोनापार्ट (napoleon Bonaparte) का नाम तो सुना ही होगा। जी हाँ वही नापोलियन बोनापार्ट जो फ़्रांस के एक महान निडर और साहसी शासक थे। जिनके जीवन मे असंभव नाम का कोई शब्द नहीं था। इतिहास में नेपोलियन को विश्व के सबसे महान और अजय सेनापतियों में से एक गिना जाता है। वह इतिहास के सबसे महान विजेताओं में से माने जाते थे । उसके सामने कोई टिक नहीं पाता था।

नेपोलियन के मजबूत इरादों की कहानी...  Motivational story...
नेपोलियन अक्सर जोखिम  भरे काम किया करते थे। एक बार उन्होने आलपास पर्वत को पार करने का ऐलान किया और अपनी सेना के साथ चल पड़े। सामने एक विशाल और गगनचुम्बी पहाड़ खड़ा था जिसपर चढ़ाई करना संभव नहीं था। उसकी सेना में अचानक हलचल की स्थिति पैदा हो गई। फिर भी उसने अपनी सेना को चढ़ाई का आदेश दिया। पास मे ही एक बुजुर्ग औरत खड़ी थी। उसने जैसे ही यह सुना वो उसके पास आकर बोली कि क्यों मरना चाहते हो। यहाँ जो भी आया है है वो मुँह की खाकर यही रह गया। अगर अपनी ज़िंदगी से प्यार है तो वापस चले जाओ। उस औरत की यह बात सुनकर नेपोलियन नाराज़ होने की बजाये प्रेरित हुआ और उसने झट हीरो का हार उतारकर उस बुजुर्ग महिला को पहना दिया और फिर बोला, "आपने मेरा उत्साह दोगुना कर दिया और मुझे प्रेरित किया है।  अगर मै जिंदा बचा तो आप मेरी जय-जयकार करना।" उस औरत ने नेपोलियन की बात सुनकर कहा- तुम पहले व्यकि्त हो जो मेरी बात सुनकर हताश और निराश नहीं हुए।  "जो करने या मरने" और मुसीबतों का सामना करने का इरादा रखते है, वह लोग कभी नही हारते।

आज सचिन तेंदुलकर को इसलिए क्रिकेट का भगवान कहा जाता है क्योंकि उन्होंने जरूरत के समय ही अपना शानदार खेल दिखाया और भारतीय टीम को  परेशानियों से उभारा। ऐसा नहीं है कि ये परेशानियँ हम जैसे लोगों के सामने ही आती है, भगवान राम के सामने भी मुसीबते आयी थी। विवाह के बाद वनवास हो गया। चौदह वर्षों की परेशानियाँ एक साथ मिलि। उन्होंने सभी परेशानियों का सामना आदर्श तरीके से किया। इसीलिये उन्हें मर्यादा पुरुसोत्तम कहा जाता है। परेशानियाँ  ही हमें आदर्श बनाती है।
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एक बात हमेशा याद रखिये...
जिंदगी में मुसीबते चाय के कप में जमी हुई मलाई की तरह है।
कामयाब वो लोग हैं जिन्हें फूँक मार कर मलाई को एक तरफ करके  चाय पीना आता है।


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Monday, 24 April 2017

Amulya Khabar

Earthday Quotes , Slogans & poem in Hindi...






Earth Quotes in Hindi...पृथ्वी पर अनमोल विचार , स्लोगन्स  व कविता
Posted on 25.04.2017 By: Deep Singh Yadav

* आने वाली पीढ़ी है प्यारी, तो पृथ्वी को बचाना है हमारी जिम्मेदारी। 
* अर्थ का कुछ करो, नहीं तो अनर्थ हो जायेंगा।
* आने वाली पीढ़ी है प्यारीं, तो पृथ्वी को बचाना है हमारी जिम्मेदारी।
* धरती बचाओ, जीवन बचाओ, जीवन खुश हाल बनाओ।
जब हरी-भरी पृथ्वी होंगी, तब शाँत-स्वस्थ्य जनता होंगी।    
* पेड़ वो कविताएँ हैं जो पृथ्वी आकाश पर लिखती है।
* भगवान् ने पृथ्वी पर स्वर्ग बनाया लेकिन इंसान ने नरक।
* पृथ्वी नर्क का ही एक रूप है , और इंसान इसके राक्षस हैं।
* धरती माँ शायद पसंद ना करे जिस तरह हम उसकी रक्षा करते हैं।
* पश्चिमी सभ्यता इस ग्रह के सिर पर तानी एक भरी हुई बंदूक है।
* यह ग्रह हमारे पूर्वजों से उत्तराधिकार में नहीं मिला ,हम इसे अपने बच्चों से उधार में लेते हैं।
* मनुष्य ही इस पृथ्वी पर एक मात्र प्राणी है जो अपने बच्चों को घर वापस आने की इज़ाज़त देता है।
* यदि आप खुद को ईश्वर के प्रेम की याद दिलाना चाहते है , तो बस सूर्योद देख लीजिये।
* इस नीले चमकते ग्रह पर बिताया हर एक पल कीमती है इसलिए इसे सावधानी से प्रयोग करो।
* पृथ्वी माँ इतना अधिक रोई कि उनके पास खुशियों की ज़मीन से अधिक आँसुओं के दरिये हैं।
* ये मत भूलो की धरती तुम्हारे पैरों को महसूस करके खुश होती है और हवा तुम्हारे बालों से खेलना चाहती है।
* जो पृथ्वी को नरक जैसा अनुभव करा रहा है वो हमारी अपेक्षा है कि इसे स्वर्ग जैसा होना चाहिए।
* एक बार मेरे एक दोस्त ने मुझे एक पोस्ट कार्ड भेजा जिस पर अंतरिक्ष से ली हुई पूरी पृथ्वी की फोटो थी,  पीछे लिखा था, "काश तुम यहाँ होते"।
* तुम पृथ्वी से जो लेते हो , उसे वापस कर देना चाहिए. यही प्रकृति का तरीका है।
* बिना पृथ्वी के मानव जाति घर के बिना मानवता के सामान है।
पृथ्वी एक कैनवास है, और परमेश्वर कलाकार है।
* सूर्य सौ साल पहले मुस्कुरा रहा था और आज वो हंस रहा है।
* कमजोरों को स्वर्ग पर शासन करने दो, जो मज़बूत हैं वे पृथ्वी पर शासन करें।
* हर कोई पृथ्वी को बचाना चाहता है , कोई अपनी माँ को खाना बनाने में मदद नहीं करना चाहता
* पृथ्वी हमारी नहीं हम पृथ्वी के हैं।
* ज़िन्दगी वो है जो आप इसे बनाते हैं, धरती पर स्वर्ग या नर्क़।
* मैं सिर्फ उसके लिए चाँद की सैर कराना चाहता था, पर जो चीज मुझे  वास्तव में देनी चाहिए थी वो पृथ्वी की एक असल यात्रा थी।
* फिर से बसंत आ गया है,पृथ्वी एक बच्चे की तरह है जिसे कविताएँ अच्छी तरह से याद हैं।
* एक अच्छे घर का क्या उपयोग है अगर आपके पास इसे बनाने के लिए एक सहनशील ग्रह नहीं है।
* मैं पृथ्वी देख रहा हूँ ! यह बहुत खूबसूरत है।

* स्वस्थ्य पृथ्वी स्वस्थ्य निवासियों के बराबर है।
* पानी और हवा , दो महत्त्वपूर्ण द्रव्य जिस पर हर प्रकार का जीवन निर्भर करता है, वैश्विक कचरे के डिब्बे बन गए हैं।
* पृथ्वी सभी मनुष्यों की ज़रुरत पूरी करने के लिए पर्याप्त संसाधन प्रदान करती है, लेकिन लालच पूरा करने के लिए नहीं।
* पृथ्वी स्वर्ग से भरी हुई है,लेकिन यह केवल वही देख पाता है जो अपने जूते उतारता है।
* विशाल ब्रह्मांडीय अखाड़े में पृथ्वी एक बहुत छोटा सा मंच है।
* ये ग्रह मर रहा है, मानवजाति इसे नष्ट कर रही है,अगर पृथ्वी मरती है, तुम मरते हो, अगर तुम मरते हो पृथ्वी जीती है।
* हम ऐसे बिंदु पर पहुँच रहे हैं जहाँ हमने पृथ्वी पर जो बोझ रखा है यदि उसे खुद नहीं हटाते तो पृथ्वी को उसे हटाना होगा।
* आप इस पृथ्वी में कभी अकेले नहीं हैं, तो आप हमेशा सर्वशक्तिमान ईश्वर के हाथ में मदद की है के साथ आप उस पर विश्वास है।
* पृथ्वी हरित क्षेत्र का नाम है, इसे काला और सफेद की ओर जाने देना नहीं है।
 
  Earth Day  Slogans in Hindi...पृथ्वी दिवस  नारे 
जन-जन की है यही पुकार हरा-भरा हो ये संसार
जल है तो कल है

पृथ्वी बचाओ जीवन बचाओ 
जीवन को हमें बचाना है, पृथ्वी को हरा बनाना है
धरा नहीं होगी तो सब धरा रह जाएगा
कटते वृक्ष उजड़ते वन, मौत को हैं आमन्त्रण

जन जन से ये कहनाहै, वृक्ष धरा का गहना है
मिटटी नहीं मिटाओ यारों, मिटटी में मिल जाओगे,
पृथ्वी नहीं होगी अगर, बोलो कहाँ तुम जाओगे?
Poem on earth…
बड़ी-बड़ी बातों से
नहीं बचेगी धरती
वह बचेगी
छोटी-छोटी कोशिशों से
मसलन
हम नहीं फेंकें कचरा
इधर-उधर
स्वच्छ रहेगी धरती,
हम नहीं खोदें गड्ढे
धरती पर
स्वस्थ रहेगी धरती,
हम नहीं होने दें उत्सर्जित
विषैली गैसें
प्रदूषण मुक्त रहेगी धरती,
हम नहीं काटे जंगल
पानीदार रहेगी धरती,
धरती को पानीदार बनाएँ
आओ, धरती बचाएँ।  


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Saturday, 22 April 2017

Amulya Khabar

History of Ajan in Hindi / About Ajan in Hindi...अज़ान का इतिहास...अज़ान क्या है?







History of Ajan in Hindi / About Ajan in Hindi...अज़ान का इतिहास...अज़ान क्या है?

Posted on 23.04.2017 By: Deep Singh Yadav

अजान लाउड स्पीकर पर होनी चाहिए या नहीं, इसको लेकर इन दिनों चर्चा गर्म है। इस मुद्दे से एक बात की तरफ ध्यान जाता है कि आखि़र अज़ान है क्या?  अज़ान हमसे क्या कहती है?  अज़ान का अर्थ और इसका  इतिहास क्या है?
 

अज़ान का इतिहास‍‍‍‍‌... मदीना में जब सामूहिक नमाज़ पढ़ने के लिए मस्जिद बनाई गई तो इस बात की जरूरत महसूस हुई कि लोगों को नमाज़ पढ़ने के लिए किस तरह बुलाया जाए  कि नमाज़ का समय हो गया है।   मोहम्मद साहब ने जब इस बारे में अपने साथियों सहाबा से सलाह मश्वरा किया तो सभी ने अपनी राय अलग अलग  दी। किसी ने कहा कि प्रार्थना के समय कोई झँडा दिखाया  जाए। किसी ने कहा  कि किसी ऊँची जगह पर आग जला दी जाए। बिगुल  और घँटियाँ बजाने का भी प्रस्ताव दिया गया, लेकिन मोहम्मद साहब को ये सभी तरीके पसंद नहीं आए।
 
रवायत है कि उसी रात एक अंसारी सहाबी हज़रत अब्दुल्लाह बिन ज़ैद ने सपने में देखा कि किसी ने उन्हें अज़ान और इक़ामत के शब्द सिखाए हैं। उन्होंने सुबह  पैगंबर साहब की सेवा में हाज़िर होकर अपना सपना बताया तो उन्होंने इसे पसंद किया और उस सपने को अल्लाह की ओर से सच्चा सपना बताया। 
पैगंबर साहब ने हज़रत अब्दुल्लाह बिन ज़ैद से कहा कि तुम हज़रत बिलाल को अज़ान इन शब्‍दों में पढ़ने की हिदायत कर दो, उनकी आवाज़ बुलंद है इसलिए वह हर नमाज़ के लिए इसी तरह अज़ान दिया करेंगे। इस तरह हज़रत बिलाल रज़ियल्लाहु अन्हु ने इस्लाम की पहली अज़ान कही।
  

 अज़ान के प्रत्येक बोल के बहुत गहरे मायने हैं। मुअज्जिन (जो अज़ान कहते हैं) अज़ान की शुरुआत करते हुए कहते हैं कि अल्लाहु अकबर। यानि ईश्वर महान हैं। अज़ान के आखिर में भी अल्लाहू अकबर कहा जाता है और फिर ला इलाहा इल्लाह के बोल के साथ अज़ान पूरी होती है। यानि ईश्वर के सिवाए कोई माबूद नहीं।  
 अज़ान की शुरुआत और उसका मुकम्मल अल्लाह की महानता के साथ होता है, जबकि इसके बीच के बोल अज़ान की अहमियत पर रौशनी डालते हैं। अब पूरी अज़ान के अर्थ पर एक नज़र डालते हैं...  
अल्लाहु अकबर, अल्लाहु अकबर
अल्लाहु अकबर, अल्लाहु अकबर


ईश्वर सब से महान है।

अश-हदू अल्ला-इलाहा इल्लल्लाह
अश-हदू अल्ला-इलाहा इल्लल्लाह 

मैं गवाही देता हूं कि ईश्वर के अतिरिक्त कोई दूसरा इबादत के योग्य नहीं।
 

अश-हदू अन्ना मुहम्मदर रसूलुल्लाह
अश-हदू अन्ना मुहम्मदर रसूलुल्लाह

 

मैं गवाही देता हूं कि मुहम्मद सल्ल,
ईश्वर के अन्तिम मैं गवाही देता हूं कि ईश्वर के अतिरिक्त कोई दूसरा इबादत के योग्य नहीं।
 

अश-हदू अन्ना मुहम्मदर रसूलुल्लाह
अश-हदू अन्ना मुहम्मदर रसूलुल्लाह

 

मैं गवाही देता हूं कि मुहम्मद सल्ल,
ईश्वर के अन्तिम  संदेष्टा हैं।  

ह्या 'अलास्सलाह, ह्या 'अलास्सलाह

आओ नमाज़ की तरफ़।

हया 'अलल फलाह, हया 'अलल फलाह

आओ कामयाबी की तरफ़।
   अस्‍सलातु खैरूं मिनन नउम
अस्‍सलातु खैरूं मिनन नउम

(ये बोल केवल सुबह (फज़र) की अज़ान में कहे जाते हैं) 

नमाज़ सोए रहने से उत्तम है।
   अल्लाहु अकबर, अल्लाहु अकबर
 

ईश्वर सब से महान है।

ला-इलाहा इल्लल्लाह
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Thursday, 20 April 2017

Amulya Khabar

Prerak Prasang in Hindi...महात्मा बुद्ध , महात्मा गाँधी , एक राजा...







Prerak Prasang in Hindi...महात्मा बुद्ध , महात्मा गाँधी , एक राजा...
Posted on 21.04.2017 By: Deep Singh Yadav


दोस्तो, नीचे तीन प्रेरक प्रसंग लिखे हैं उम्मीद करता हूँ कि आप इनको पढ़कर अवश्य लाभ उठायेंगे तथा सोशल मीडिया पर शेयर करके अपने दोस्तों को भी बतायेंगे ताकि वो भी इसका लाभ ले सकें। धन्यवाद.




1. प्रेरक प्रसंग ---महात्मा बुद्ध


एक बार तथागत बुद्ध वैशाली पहुंचे। समाचार सुनकर वहाँ की प्रसिद्ध नृत्यांगना आम्रपाली भी उनके उपदेश सुनने पहुँची। तथागत एक वृक्ष की छाया में बैठे थे और हजारों लोग उनके उपदेश सुन रहे थे। उपदेश समाप्त होने पर  आम्रपाली ने नतमस्तक होकर तथागत को अपने यहाँ  भोजन पर आमंत्रित किया। वह बोली, "तथागत! आपके चरण कमलों से इस दासी की कुटिया पवित्र हो जायेगी।"

तथागत ने आम्रपाली की प्रार्थना स्वीकार कर ली। वहाँ उपस्थित राजकुमारों को यह अच्छा नहीं लगा। उन्होंने कहा, “यह वेश्या है, आपके चरणों के योग्य नहीं है।  तथागत के लिए राजा और वेश्या में क्या अंतर है? तथागत सम्दृष्टि हैं।”

 ख़ुशी से दीवानी आम्रपाली से राजकुमारों ने कहा, "आम्रपाली  हम तुझको एक लाख स्वर्ण मुद्रा देंगे, तू तथागत को कल के भोजन के लिए हमारे यहाँ आने दो।"
आम्रपाली ने उत्तर दिया, ‘आर्य पुत्रों यह नहीं हो सकता। यदि आप समस्त साम्राज्य भी मुझे दे देते, तो भी मै इस निमंत्रण को नहीं बेच सकती। यह गौरव बेचने या अदला बदली करने की चीज़ नहीं है।
आम्रपाली ने बुद्ध के प्रति अनुपम श्रृद्धा दिखाई और भोजन के बाद अपने आम्र उपवन को बुद्ध और भिछु संघ के लिए समर्पित कर दिया और स्वयं भी भिछुणी हो गयी।

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2. प्रेरक प्रसंग--- महात्मा गाँधी
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महात्मा गाँधी जी ने प्रारंभ में ही छुआछूत की आलोचना तो की परन्तु जाति के संबंध में पूर्व से चले आ रहे नियमों को वैसे ही रहने दिया। कुछ समय बाद उन्होंने दलितो के मंदिर में प्रवेश को लेकर आन्दोलन चलाया तथा साँझा भोज पर बल दिया। बहुत बाद में अपने आश्रम में एक दलित और एक सर्वण के विवाह की अनुमति दी।

भारतीय स्वतंत्रता आन्दोलन की अगुयाई कर रही कांग्रेस गाँधी जी द्वारा दलितों के सामाजिक उत्थान हेतु चलाये गये इन कदमों से सहमति नहीं रखती थी क्योंकि उसका मानना था कि ‘सामाजिक सुधार’ को ‘स्वतंत्रता आन्दोलन’ से पृथक रखा जाना चाहिये।

कांग्रेस के इस रवैये के कारण डॉ भीमराव अम्बेडकर अँग्रेजी राज का साथ दे रहे थे और भारत छोड़ो आन्दोलन के समय वे वायसराय की कार्यकारी परिषद के सदस्य होते थे इतना ही नहीं वे गाँधी के प्रखर आलोचक भी थे और उनके  विरुद्ध अपमानजनक और विवादास्पद भाषा का प्रयोग किया करते थे। अपने इस व्यवहार के पीछे उनका मानना था कि कांग्रेस के ब्राह्मण बाहुल्य ढाँचे से दलितों का भला नहीं हो सकता । (अम्बेडकर के पूर्वज भी लंबे समय तक ब्रिटिश ईस्ट इण्डिया कम्पनी की सेना में कार्यरत थे और भीमराव के पिता रामजी अम्बेडकर ब्रिटिश फ़ौज में सूबेदार थे)

1947 में जब देश स्वतंत्र हुआ तो डॉ. अम्बेडकर के इसी प्रकार के विचारों के चलते कांग्रेस के नेतागण विशेष रूप से जवाहरलाल नेहरू और सरदार पटेल उन्हें अपने पहले मंत्रिमंडल में साथ रखने को तैयार न थे परन्तु गांधी जी ने हस्तक्षेप करके यह समझाने का प्रयास किया कि कि आज़ादी कांग्रेस को नहीं मिली है अपितु देश को मिली है इसलिये पहले मंत्रिमंडल में सबसे अच्छी प्रतिभाओं को शामिल किया जाना चाहिये चाहे वह किसी भी दल अथवा समुदाय की ही क्यों न हो। गाँधी के इस सकारात्मक हस्तक्षेप के बाद ही डॉ. अम्बेडकर देश के पहले कानून मंत्री बन सके थे। गाँधी जी के लिये मन में किसी के लिये बैर अथवा पूर्वाग्रह नहीं था इसीलिये उन्हें महामानव कहा गया।

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3. प्रेरक प्रसंग--- ‍‍‌बुद्धिमान कौन
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  बादशाह ने वजीर के रिक्त पद पर नियुक्ति के लिए उम्मीदवार बुलवाए।  परीक्षा से गुज़र कर तीन उम्मीदवार योग्य पाए गए।

तीनों उम्मीदवारों से बादशाह ने एक-एक कर एक ही सवाल किया, ‘मान लो मेरी और तुम्हारी दाढ़ी में एक साथ आग लग जाए तो तुम क्या करोगे?’
पहले ने उत्तर दिया, "जहाँपनाह, पहले मैं आप की दाढ़ी की आग बुझाऊँगा।"
दूसरा ने कहा, "जहाँपनाह पहले मैं अपनी दाढ़ी की आग बुझाऊँगा।"

तीसरे उम्मीदवार ने उत्तर दिया, "जहाँपनाह, मैं एक हाथ से आपकी दाढ़ी और दूसरे हाथ से अपनी दाढ़ी की आग बुझाऊँगा।"

इस पर बादशाह ने कहा, "अपनी ज़रूरत को नज़रंदाज़ करने वाला नादान है। सिर्फ़ अपनी भलाई चाहने वाला स्वार्थी है और जो व्यक्तिगत जिम्मेदारी निभाते हुए दूसरे की भलाई करता है, वही बुद्धिमान है।"
इस तरह बादशाह ने वजीर के पद पर तीसरे उम्मीदवार की नियुक्ति कर दी।
 
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Wednesday, 19 April 2017

Amulya Khabar

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सैलरी जान कर हैरान रह जायेंगे आप…





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Tuesday, 18 April 2017

Amulya Khabar

Benefits of Cow Ghee in Hindi...गाय के घी के लाभ / नुस्खे...






Benefits of Cow Ghee in Hindi...गाय के घी के लाभ / नुस्खे...
Posted on 19.04.2017 By: Deep Singh Yadav 

 गाय के घी को अमृत कहा गया है  । ऐसा माना जाता है कि काली गाय का घी खाने से बूढ़ा व्यक्ति भी जवान जैसा लगने लगता है।गाय के घी में ऐसे औषधीय गुण होते हैं जो  किसी और चीज़ में नहीं मिलते। यहाँ तक की इसमें ऐसे माइक्रोन्यूट्रींस होते हैं जिनमें कैंसर  से लड़ने की क्षमता होती है। आप धार्मिक नजरिये  से देखें तो घी से हवन करने पर लगभग 1 टन ताजे ऑक्सीजन का उत्पादन होता है। यही कारण है कि मंदिरों में गाय के घी का दीपक जलाने तथा धार्मिक समारोहों में यज्ञ करने कि प्रथा प्रचलित है।

 आइए अब आपको बताते हैं कि गाय के घी का क्या क्या उपयोग है...


* गाय का घी नाक में डालने से पागलपन  एंव एलर्जी खत्म हो जाती है। गाय का घी नाक में डालने से लकवा के रोग का भी उपचार होता है। घी व मिश्री मिलाकर खिलाने से शराब, भाँग व गाँजें का नशा कम हो जाता है।
ऐसी मान्यता है कि  गाय का घी नाक में डालने से कान का पर्दा बिना ओपरेशन के ही ठीक हो जाता है। नाक में घी डालने से नाक की खुश्की दूर होती है और दिमाग तरोताजा हो जाता है। यहाँ तक की गाय का घी नाक में डालने से कोमा से बाहर निकल कर चेतना वापस लोट आती है।


* गाय का घी नाक में डालने से बालों का झड़ना समाप्त होकर नए बाल उगने लगते हैं। गाय के घी को नाक में डालने से मानसिक शाँती मिलती है एंव याददाश्त तेज होती है।


* हाथ पाँव मे जलन होने पर गाय के घी को तलवों में मालिश करने से जलन ठीक हो जाती है। हिचकी के न रुकने पर  गाय का आधा चम्मच घी खाए, हिचकी  रुक जाएगी। गाय के घी का नियमित सेवन करने से एसिडिटी व कब्ज की शिकायत दूर हो जाती है।


* गाय के घी से बल बढ़ता है और शारीरिक व मानसिक ताकत में भी बढ़ोतरी होती है। गाय के पुराने घी से बच्चों की छाती और पीठ पर मालिश करने से कफ की शिकायत दूर हो जाती है। अगर अधिक कमजोरी लगे, तो एक गिलास दूध में एक चम्मच गाय का घी और मिश्री डालकर पी लें।


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* गाय का घी न सिर्फ कैंसर को पैदा होने से रोकता है बल्कि इस बीमारी को फैलने से भी आश्चर्यजनक ढंग से रोकता है। देसी गाय के घी में कैंसर से लड़ने की अचूक क्षमता होती है। इसके सेवन से स्तन तथा आँत के खतरनाक कैंसर से भी बचा जा सकता है।


* जिस व्यक्ति को हार्ट अटैक की तकलीफ है और तैलीय चीजें खाने की मनाही है तो गाय का घी खायें, ह्रदय मज़बूत होता है।


* घी, छिलका सहित पिसा हुआ काला चना और पिसी शक्कर (बूरा) तीनों को समान मात्रा में मिलाकर लड्डू बना लें और सुबह खाली पेट एक लड्डू खूब चबा-चबाकर खाते हुए एक गिलास मीठा गुनगुना दूध घूँट-घूँट करके पीने से स्त्रियों के प्रदर रोग में आराम होता है, पुरुषों का शरीर मोटा ताजा यानी सुडौल और बलवान बनता है।


* फफोलो पर गाय का देसी घी लगाने से आराम मिलता है। सांप के काटने पर ५० -१०० ग्राम घी पिलायें उपर से जितना गुनगुना पानी पिला सके पिलायें जिससे उलटी और दस्त तो लगेंगे ही लेकिन सांप का विष कम हो जायेगा।


* दो बूंद देसी गाय का घी नाक में सुबह शाम डालने से माइग्रेन दर्द ठीक हो जाता है। सिर दर्द होने पर शरीर में गर्मी लगती हो, तो गाय के घी की पैरों के तलवे पर मालिश करे, सर दर्द ठीक हो जायेगा।


* गाय के घी के सेवन से कॉलेस्ट्रॉल नहीं बढ़ता है। वजन भी नही बढ़ता, बल्कि वजन को संतुलित करता है । यानी के कमजोर व्यक्ति का वजन बढ़ता है, मोटे व्यक्ति का मोटापा (वजन) कम होता है।


* एक चम्मच गाय का शुद्ध घी में एक चम्मच बूरा और 1/4 चम्मच पिसी काली मिर्च इन तीनों को मिलाकर सुबह खाली पेट और रात को सोते समय खाकर ऊपर से गर्म मीठा दूध पीने से आँखों की रोशनी बढ़ती है।


* गाय के घी को ठण्डे जल में फेंट ले और फिर घी को पानी से अलग कर ले यह प्रक्रिया लगभग सौ बार करे और इसमें थोड़ा सा कपूर डालकर मिला दें। इस विधि द्वारा प्राप्त घी एक असर कारक औषधि में परिवर्तित हो जाता है जिससे  त्वचा सम्बन्धी हर चर्म रोगों में चमत्कारिक मल्हम कि तरह से इस्तेमाल कर सकते है। यह सौराइशिस के लिए भी कारगर है।


* गाय का घी एक अच्छा  कोलेस्ट्रॉल है। उच्च कोलेस्ट्रॉल के रोगियों को गाय का घी ही खाना चाहिए। यह एक बहुत अच्छा टॉनिक भी है।

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 * रात को सोते समय एक गिलास मीठे दूध में एक चम्मच घी डालकर पीने से शरीर की खुश्की और दुर्बलता दूर होती है, नींद गहरी आती है, हड्डी बलवान होती है और सुबह शौच साफ आता है।

* यदि स्वस्थ व्यक्ति भी हर रोज नियमित रूप से सोने से पहले दोनों नासिकाओं में हल्का गर्म (गुनगुना) देसी गाय का घी डालकर सोने की आदत बनाले तो इससे नींद गहरी आएगी, खर्राटे बंद होंगे, याददाश्त तेज होगी और कई बीमारियों से शरीर का बचाव होगा । इसके लिए बिस्तर पर लेट कर दो दो बूँद घी दोनों नासिकाओं में डाल कर पाँच मिनट तक सीधे लेटे रहें।

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Saturday, 15 April 2017

Amulya Khabar

Benefits of Sugarcane Juice in Hindi...गन्ने के रस के चमत्कारिक फायदे...






Benefits of Sugarcane Juice in Hindi...गन्ने के रस के चमत्कारिक फायदे...
Posted on 16.04.2017 By: Deep Singh Yadav




दिन में एक गिलास गन्ने का रस मिल जाए तो आपको  ताजगी मिल जाती है। गन्ने का रस केवल   गर्मी से ही नहीं बचाता है बल्कि कई प्रकार की बीमारियों से भी दूर रखता है। इसे पीने से आपको भरपूर ऊर्जा मिलती है।
गन्ने का रस बहुत ही सेहतमंद और गुणकारी पेय है। इसमें कैल्शियम, पोटैशियम, आयरन, मैग्नेशियम और फॉस्फोरस जैसे आवश्यक पोषक तत्व पाए जाते हैं. इनसे हड्डि‍याँ मजबूत बनती हैं और दाँतों की समस्या भी कम होती है. गन्ने के रस के ये पोषक तत्व शरीर में खून के बहाव को भी सही रखते हैं।


कैंसर से बचाव...
गन्ने के रस में कैल्शियम, पोटैशियम, आयरन और मैग्नेशियम की मात्रा इसके स्वाद को क्षारीय (खारा) करती है, गन्ने के रस में मौजूद यह तत्व हमें कैंसर से बचाते हैं. गन्ने का रस कई तरह के कैंसर से लड़ने में सहायक है। प्रोस्टेट और स्तन (ब्रेस्ट) कैंसर से लड़ने में भी इसे लाभदायक माना जाता है।


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पाचन को ठीक रखता है...
गन्ने के रस में पोटैशियम की अधिक मात्रा होने की वजह से यह शरीर के पाचनतंत्र के लिए बहुत लाभदायक होता है।  गन्ने का रस पाचन सही रखने के साथ-साथ पेट में होने वाले संक्रमणों से भी हमें बचाता है। गन्ने का रस कब्ज की समस्या को भी दूर करता है।


किडनी के लिए फायदेमंद...
गन्ने के रस में प्रोटीन अच्छी मात्रा में होता है। इसमें नींबू और नारियल पानी मिलाकर पीने से किडनी में संक्रमण, युरीन इन्फेक्शन, और पथरी जैसी समस्याओं में आराम मिलता  है।

ह्रदय रोगों से बचाव...
गन्ने का रस  दिल के दौरे के लिए भी फायदेमंद है। गन्ने के रस से शरीर में कॉलेस्ट्रोल और ट्राईग्लिसराइड का स्तर गिरता है। इस तरह धमनि‍यों में फैट नहीं जमता और दिल व शरीर के अंगों के बीच खून का बहाव ठीक रहता है।
 

तुरंत ताकत के लिए...
गन्ने के रस में प्राकृतिक तौर पर शुगर होती है जो शरीर में ग्लूकोज की मात्रा बढ़ाती है और यह पानी की कमी को पूरा करता है। इसके सेवन के तुरंत बाद आप  ऊर्जावान महसूस करेंगे। गर्मियों में डीहाइड्रेशन से बचाने में मददगार है।


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वजन कम करने में सहायक...
गन्ने का रस शरीर में प्राकृतिक शक्कर पहुँचाकर और खराब कॉलेस्ट्रोल को कम करके आपका वजन कम करने में सहायता करता  है। इस रस में घुलनशील फाइबर होने के कारण वजन संतुलित रहता है।


त्वचा में निखार ...
गन्ने के रस में अल्फा हाइड्रॉक्सी एसिड   होता है, जो त्वचा से सम्बन्धित परेशानियों को दूर करता है और इसमें कसाव लाता है। AHA मुहांसों से भी राहत पहुँचाता है, त्वचा के दाग कम करता है, त्वचा को नमी देकर झुर्रिया कम करता है। गन्ने के रस को त्वचा पर लगायें और सूखने के बाद पानी से धो लें।   आपकी त्वचा में निखार आ जायेगा।


रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है...
एंटीऑक्सीडेंट्स अच्छी मात्रा में होता हैं जो शरीर की  रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता  हैं। यह लिवर से जुड़े संक्रमण और पीलिया के मरीजों के लिए भी इसीलिए ही लाभदायक माना जाता है।


दाँतों के लिए लाभदायक...
गन्ने के रस में मिनिरल्स अधिक होते हैं इसलिए यह मुँह से संबंधित समस्याओं जैसे - दाँतों में सड़न, साँसों की दुर्गंध से बचाव में मददगार होता है। सफेद चमकदार दाँतों के लिए गन्ने के रस का सेवन करना चाहिये।


बुखार से बचाव...
फेब्रा‌इल डिसॉडर यानी प्रोटीन की कमी से बार-बार बुखार से बचाव के लिहाज से गन्ने का रस काफी लाभदायक होता है।


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लीवर को स्वस्थ रखता है...
गन्ना आपका बिलीरुबिन (bilirubin) लेवल बनाए रखता है। इसलिए आयुर्वेद में इसका पीलिया के इलाज के लिए उपयोग किया जाता है। अध्ययन के अनुसार, गन्ने का रस लीवर को खराब होने से बचाता है।  प्रतिदिन एक गिलास रस पीने से पीलिया की बीमारी में फायदा मिलता है।


गन्ने के रस में वे सारे पोषक पदार्थ होते हैं, जिनसे आपके नाखून चमकदार बनते हैं। यह प्राकृतिक रूप से नाखूनों को मज़बूत बनाता है और उन्हें रंग खोने से भी बचाता है।
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Friday, 14 April 2017

Amulya Khabar

Self Improvement in Hindi...ये काम आपकी जिन्दगी को बर्बाद कर सकते हैं...







Self Improvement in Hindi...ये काम आपकी जिन्दगी को बर्बाद कर सकते हैं...
Posted on 15.04.2017 By: Deep Singh Yadav 

 जिंदगी को बेहतर बनाने  और बेहतर तरीके से जीने के लिये बहुत सी बातों का, बहुत सी चीजों का ध्यान रखना पड़ता है। कुछ लोग ऐसे होते हैं जो अपनी जिन्दगी में ऐसे काम करते रहते हैं जिनके कारण उन्हें बाद में पछताना पड़ता है। ऐसे बहुत से काम और बहुत सी आदतें हैं जो  हमें शुरूआत में तो सही लगती हैं लेकिन बाद में पछताना पड़ता है।   हमें पता ही नहीं चलता है कि हम कुछ गलत कर रहे हैं लेकिन ये  आदतें और ये ही काम आने वाले समय में हमारी खुशियों को छीन लेते हैं, आपकी जिन्दगी को बर्बाद कर देते हैं।

 हम में से बहुत से लोग ऐसे होते हैं जो दिखावे की जिन्दगी जीते हैं और जिंदगी की हकीकत से अंजान रहते हैं, सच्चाई से दूर भागते हैं। अगर आपने समय पर ध्यान नहीं दिया कि आप जो कर रहें हैं वो सही है या गलत है या उन कामों को करके आपका भविष्य कैसा होगा.  तो एक दिन आप ऐसे दोराहे पर आकर खड़े हो जायेंगे जहाँ पर आपको आपकी जिंदगी अपने हाथों से फिसलती हुई दिखाई देगी।

आज मैं आपको ऐसी ही बातों और  कामों के बारे में बता रहा हूँ जिनको छोड़ कर आप अपनी जिंदगी में बदलाव ला सकते हैं, अपनी जिन्दगी को बर्बाद होने से बचा सकते हैं।

*  कमी निकालना या बात बात पर शिकायत करना...

अगर आप बात-बात पर शिकायत करते हैं या हर छोटी बड़ी चीजों में कमी निकालते हैं  तो ये काम, ये आदत आपकी जिन्दगी के लिये सही नहीं हैं। ऐसा करने से एक तो आपको गुस्सा आता है, आपके स्वभाव में चिड़चिड़ापन आ सकता हैं, आप हतोत्साहित हो सकते हैं जो आपकी खुशियों को चुरा लेता है । इससे आपकी सामाजिक इमेज भी खराब होती है। आपका किसी से झगड़ा भी हो सकता है। ऐसा करने वाला व्यक्ति नकारात्मक विचारों से घिरा रहाता है। वह खुद तो टेंशन मे रहता ही है , दूसरों को भी टेंशन देता है। अगर कोई बात या शिकायत सही है  तो उसे  उचित समय पर कहें, हमेशा नहीं। जिंदगी में कुछ बातों और कुछ चीजों को नजरअंदाज करना ही ठीक रहता है। 

 
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* लोगों को माफ़ ना करना, बातों को पकड़कर बैठ जाना...

आप जिंदगी में बहुत ज्यादा और हर समय गम्भीर रहकर नहीं जी सकते। दूसरें लोगों की बहुत सी बातें, बहुत से काम आपको हमेशा अच्छे नहीं लगेंगे। आपकी भी बहुत सी बातें दूसरों को हमेशा अच्छी नहीं लगेंगी। लोग किसी ना किसी बात पर आपको चोट पहुँचाने की कोशिश करेंगे । किसी ने या कभी आपके साथ कुछ गलत किया है, बुरा व्यव्हार किया है, धोखा दिया है या आपका अपमान किया है तो उसको भूलना  थोड़ा कठिन होता है ,  लेकिन अगर आप लोगों पर अपने गुस्से को लेकर बैठें रहेंगे या बार-बार आप उसी बात के बारे में या बदला लेने के बारे में सोचते रहेंगे तो आप उन  कामों पर ध्यान नहीं दे पायेंगे जो आपके जीवन के लिये जरूरी हैं
,और आप अपनी जिंदगी के बहुमूल्य समय  और  खुशियों को खो देंगे।इसलिये अपनी शक्ति को, अपनी सोच को, अपने समय को ऐसी बातों पर लगायें, ऐसी चीजों पर लगायें, ऐसे कामों पर लगायें जो आपकी जिन्दगी को बेहतर बना सकते हैं। जिसने आपके साथ कुछ गलत किया है या आपको चोट पहुँचाई हो तो उसे माफ़ कर दें और  अपने लक्ष्यों पर ध्यान केन्द्रित करें । जो बात आपको बार बार परेशान करती है उसे भूलने की कोशिश करें। लोगों को माफ़ करना सीखें।

*  ऐसा काम या ऐसी नौकरी करना जो आपको पसन्द ना हो...

कभी-कभी हम ऐसा काम या ऐसी नौकरी करते हैं जो हमें पसंद नहीं होती है। चाहे वो काम या वो नौकरी हम किसी मजबूरी या परेशानी में ही क्यों न कर रहें हों, वो हमारी शांति और खुशियों को हमसे छीन लेते हैं। ऐसे काम करके हम अपने वर्तमान में ही उलझ जाते हैं और भविष्य के बारे में नहीं सोच पाते हैं। इसलिये ऐसी नौकरी करें जो आपकी योग्यता
, पसंद के अनुसार हो, जो आपके कैरियर, आपके भविष्य के लिये अच्छी हो। ऐसे काम करें जो आपको ख़ुशी दें, जिन्हें करके आपको आनन्द आये, आपको सुख शांती मिले।

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* गलत सम्बन्धों में रहना...

एक गलत साथी के साथ रिश्ता रखना, एक गलत रिलेशनशिप में रहना आपकी जिन्दगी को बर्बाद कर  सकता है। अगर आपका साथी  आपकी केयर नहीं करता है आपको प्यार नहीं करता है तो आपको खुशियाँ नहीं दे सकता तो ऐसे साथी  के साथ रहना नुकसान दायक है। इसलिये अपने पार्टनर का चुनाव समझदारी से करना चाहिये । पहले उसे जाने, उसे समझें फिर उसके साथ रिश्ते की शुरुआत करें। भावनाओं में बहकर फैसलें ना करें। अगर आपका पार्टनर गलत है तो उसके साथ अपनी जिंदगी बर्बाद करने से अच्छा है कि आप उससे अपना रिश्ता खत्म कर दें।

*  फिजूलखर्ची करना...

मैंने बहुत से ऐसे लोगों को देखा है जो पैसे को बेवजह और बिना मतलब के ही ऐसी चीजों पर खर्च कर देते हैं जिनकी उन्हें कोई ज़रूरत नहीं होती। जब तक उनके हाथ में पैसा होता है तो ऐसे ही फालतू में उड़ाते रहते हैं और मँहगे  शौक पाल लेते हैं, गंदी आदतें लगा लेते हैं,  लेकिन जब कभी उन्हें पैसे की कमी होती है या जब कभी उनके पास पैसा नहीं होता है तो फिर पछताते हैं या फिर अपने शौक पूरे करने के लिए गलत काम करते हैं, गलत रास्ते पर चलते हैं । ऐसा करके वो अपने लिये मुसीबतों का पहाड़ खड़ा के लेते हैं।

आपने जायज शौक और अपनी जरूरतें पूरी करना अच्छी बात है लेकिन शौक के नाम पर फिजूलखर्ची करने की आदत आने वाले समय में आपके लिये नुकसान दायक साबित हो सकती हैं। जो लोग पैसों की कद्र नहीं करते, पैसों को पैसा नहीं समझते,  उनको आगे चलकर बहुत नुकसान उठाना पड़ता है। अगर आप पैसे की कद्र नहीं करोगे तो एक समय ऐसा आयेगा कि पैसा भी आपकी कद्र नहीं करेगा। इसलिये सोच समझकर और अपनी जायज जरूरतों और शौक पर ही पैसा खर्च करें। पैसे का इस्तेमाल सही जगह और अच्छे कामों में करें। अगर आपके पास बहुत ज्यादा या बेहिसाब पैसा है तो उसे किसी अच्छे काम में लगायें, किसी की भलाई में लगायें। भूखे को खाना खिलायें।
*  दिखावे की जिन्दगी और झूठी शान में जीना...

जो लोग झूठी जिंदगी जीते हैं या लोगो के सामने अपनी झूठी शान दिखाते हैं, अपने बारे में बढ़ा चढ़ा कर बताते हैं , एक दिन ऐसे लोग अक्सर ऐसी स्थिति में आ जाते हैं जहाँ पर वे खुद को बिल्कुल असहाय और अकेला महसूस करते हैं। जो लोग अन्दर से कुछ और बाहर से कुछ और होतें हैं, उनकी असलियत कभी ना कभी लोगों के सामने आ ही जाती है। झूठी शान दिखाने  वालों को कभी ना कभी अपमानित होना ही पड़ता है। इसलिये झूठी और दिखावे की जिन्दगी ना जियें। आप जो हैं वही रहें, वही दिखें और वैसी ही जिन्दगी जियें।

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जिंदगी जीने के तरीके...



चाहे कोई माने या न माने लेकिन अगर कोई व्यक्ति ऊपर बताये गए कामों को करता है तो उसे एक दिन निश्चित रूप से पछताना  पड़ता है। आपमें से ऐसे बहुत से लोग होंगे जो ये काम करते हैं या पहले कभी कर चुके हैं
मेरी इस बात से बिल्कुल सहमत होंगे कि आपको कभी न कभी किसी बात के लिए पछताना जरुर पड़ा होगा और आप ऐसी बातो में, ऐसी सोच में उलझ कर रह गए कि आप अपनी जिंदगी में आगे बढ़ पाने के बारे में सोच ही नहीं पाए या अपनी जिंदगी के उन कामों पर, उन बातों पर ध्यान ही नहीं दे पाए होंगे जो आपको अपनी मंजिल तक पहुंचा सकती थीं।

मित्रो,  अभी भी कुछ नहीं बिगड़ा है इन कामों और आदतों को जितनी जल्दी हो सके छोड़ दें और अपने सपनों को पूरा करने,  लक्ष्य को प्राप्त करने और अपनी मंजिल तक पहुँचने वाले कामों ,आदतों पर ध्यान देना शुरु कर दें।




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